अभिषेक बनर्जी के डर से टीएमसी में शामिल हुआ था, इस्तीफे के बाद आज़ाद महसूस कर रहा हूं: मोहम्मद अजमल सिद्दीकी
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के राज्य सचिव मोहम्मद अजमल सिद्दीकी ने 6 जून 2026 को अपने पद से इस्तीफा देने के बाद पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2015-16 में उन्हें अभिषेक बनर्जी के दबाव में टीएमसी में शामिल होने पर मजबूर किया गया था। कोलकाता से सामने आए इस विवाद ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
इस्तीफे की वजह
सिद्दीकी ने कहा, 'इस्तीफा देने के बाद मैं बहुत स्वतंत्र महसूस कर रहा हूं। अब मैं काफी हल्का और आराम महसूस कर रहा हूं।' उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी के भीतर अल्पसंख्यक समुदाय के हितों के लिए काम करने की कोई वास्तविक गुंजाइश नहीं थी। उनके अनुसार, 'यहां अल्पसंख्यकों के लिए कोई काम करने नहीं दिया जाता — सिर्फ लॉलीपॉप दिया जाता है।'
अभिषेक बनर्जी पर आरोप
सिद्दीकी ने दावा किया कि 2015-16 में जब वे व्यवसाय कर रहे थे, तब अभिषेक बनर्जी की ओर से बिनॉय मिश्रा ने उनसे पैसे मांगे। उनका कथन है, 'हमने पैसे नहीं दिए तो हमारे खिलाफ झूठा मामला दर्ज कर दिया गया। इसके बाद हमें सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट से जमानत लेनी पड़ी थी। हम अभिषेक बनर्जी के डर की वजह से पार्टी में शामिल हुए थे।' उल्लेखनीय है कि ये आरोप कथित तौर पर लगाए गए हैं और इन पर टीएमसी नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है।
अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार पर सवाल
सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि पार्टी ने लोगों को धमकाने और उनका इस्तेमाल करने की राजनीति अपनाई है। उन्होंने कहा, 'लोगों को धमकाया गया और उनका इस्तेमाल किया गया।' यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में अल्पसंख्यक समुदाय की राजनीतिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व को लेकर बहस पहले से जारी है।
सुवेंदु अधिकारी से उम्मीद
दिलचस्प बात यह है कि सिद्दीकी ने नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अधिकारी हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों को साथ लेकर चलेंगे और बंगाल को सही दिशा में आगे बढ़ाएंगे। टीएमसी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी का इस तरह विपक्षी नेता की प्रशंसा करना राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आगे क्या होगा
सिद्दीकी के इस्तीफे और उनके आरोपों के बाद यह देखना होगा कि टीएमसी नेतृत्व इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले इस तरह की आंतरिक कलह पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकती है।