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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर आकांक्षा चतुर्वेदी का परिवार: 'बेटी की कमी कोई फैसला नहीं भर सकता'

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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर आकांक्षा चतुर्वेदी का परिवार: 'बेटी की कमी कोई फैसला नहीं भर सकता'

सारांश

आकांक्षा चतुर्वेदी के परिवार ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को अधूरा न्याय बताया। माँ ने कहा — 36 दिन के संघर्ष के बाद भी कोई मंत्री घर नहीं आया। पिता ने बताया कि बेटी की पढ़ाई के लिए ₹28 लाख की ज़मीन बेची, फिर भी ₹5-6 लाख कर्ज़ बाकी है। परिवार ने साफ कहा — आंदोलन जारी रहेगा।

मुख्य बातें

आकांक्षा चतुर्वेदी के परिवार ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को नाकाफी बताया, कहा — 'बेटी की कमी कोई फैसला पूरा नहीं कर सकता।' आकांक्षा की माँ ने कहा कि 36 दिन के आंदोलन के बाद भी कोई मंत्री या नेता उनके घर नहीं आया।
पिता ने बताया कि बेटी की पढ़ाई के लिए ₹28 लाख की ज़मीन बेची गई, फिर भी ₹5-6 लाख का कर्ज़ बाकी है।
परिवार ने स्पष्ट किया कि सरकार की ओर से मुआवज़े का अब तक कोई संदेश नहीं मिला।
परिजनों ने चेतावनी दी कि जब तक सभी माँगें पूरी नहीं होतीं, छात्र आंदोलन जारी रहेगा।

पेपर लीक विवाद के बाद जान गँवाने वाली अभ्यर्थी आकांक्षा चतुर्वेदी के परिजनों ने 25 जुलाई को नागपुर से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर तीखी प्रतिक्रिया दी। परिवार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह निर्णय उनकी बेटी के साथ हुई अपूरणीय क्षति की भरपाई नहीं कर सकता। साथ ही परिजनों ने चेतावनी दी कि छात्रों का आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सभी माँगें पूरी नहीं होतीं।

माँ का दर्द: 'हमें अभी तक कोई संदेश नहीं'

आकांक्षा की माँ ने कहा कि छात्रों और अभिभावकों के अथक संघर्ष ने सरकार को झुकने पर विवश किया है, लेकिन न्याय की राह अभी लंबी है। उन्होंने कहा, 'हम अपने बच्चों को इसलिए समर्थन दे रहे हैं क्योंकि सरकार समझ रही थी कि हम झुकेंगे — लेकिन हमारे बच्चों ने उन्हें झुकाया है, आगे भी झुकाएँगे।'

मुआवज़े के सवाल पर उन्होंने कहा कि अब तक परिवार के पास सरकार की ओर से कोई संदेश नहीं पहुँचा है। 'सिर्फ प्रफुल्ल जी हमारे घर आए; कोई नेता, कोई मंत्री नहीं आया। 36 दिन तक सरकार ने हमारे बच्चों को घसीटा — ऐसे में हम कैसे मान लें कि अब हमारी माँगें पूरी की जा रही हैं?'

पिता का आर्थिक संघर्ष: ₹28 लाख की ज़मीन बेची, फिर भी कर्ज़

आकांक्षा के पिता ने बताया कि बेटी के डॉक्टर बनने के सपने को पूरा करने के लिए परिवार ने हर संभव बलिदान किया। उन्होंने कहा, 'हमने केसीसी कार्ड से कर्ज़ लिया, फिर ₹28 लाख की ज़मीन बेचकर वह कर्ज़ चुकाया। जो भी पैसा था, सब उसकी पढ़ाई में लगा दिया।' उन्होंने दुखी स्वर में जोड़ा कि आज भी परिवार पर करीब ₹5 से 6 लाख का कर्ज़ बाकी है और अब उनके पास कोई सहारा नहीं बचा।

आंदोलन की स्थिति: माँगें अभी अधूरी

परिवार ने स्पष्ट किया कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा छात्र आंदोलन का अंत नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब पेपर लीक मामले में जवाबदेही और पीड़ित परिवारों को उचित मुआवज़े की माँग अभी भी अनुत्तरित है। परिजनों ने कहा कि जब तक सरकार ठोस कदम नहीं उठाती, आंदोलन जारी रहेगा।

व्यापक संदर्भ: पेपर लीक और छात्र आक्रोश

गौरतलब है कि आकांक्षा चतुर्वेदी उन अभ्यर्थियों में से थीं जिन्होंने पेपर लीक विवाद के बाद अपनी जान दे दी। इस मामले ने देशभर में छात्रों के आक्रोश को जन्म दिया और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए। आलोचकों का कहना है कि केवल मंत्री के इस्तीफे से प्रणालीगत खामियाँ दूर नहीं होंगी।

आगे क्या होगा

परिवार और छात्र संगठनों की माँग है कि पीड़ित परिवारों को तत्काल मुआवज़ा दिया जाए, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाई जाए। जब तक ये माँगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन की आग बुझने के आसार नहीं हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन पीड़ित परिवारों के लिए यह पर्याप्त नहीं है — और यह समझ में आता है। असली सवाल यह है कि पेपर लीक की प्रणालीगत विफलता के लिए जवाबदेही कब और कैसे तय होगी। जब एक परिवार बेटी के सपने के लिए ₹28 लाख की ज़मीन बेचता है और फिर भी कर्ज़ में डूबा रहता है, तो केवल मंत्री की कुर्सी जाने से न्याय नहीं होता। मुआवज़े की घोषणा और उसका वास्तविक वितरण — इन दोनों के बीच की खाई ही सरकार की असली परीक्षा है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आकांक्षा चतुर्वेदी के परिवार ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर क्या कहा?
परिवार ने कहा कि यह फैसला उनकी बेटी की कमी को पूरा नहीं कर सकता। माँ ने स्पष्ट किया कि छात्रों का आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सभी माँगें पूरी नहीं होतीं।
आकांक्षा चतुर्वेदी कौन थीं और उनकी मृत्यु क्यों हुई?
आकांक्षा चतुर्वेदी एक अभ्यर्थी थीं जिन्होंने पेपर लीक विवाद के बाद आत्महत्या कर ली। वे डॉक्टर बनने का सपना देख रही थीं और उनके परिवार ने इस सपने के लिए भारी आर्थिक बलिदान किया था।
आकांक्षा के परिवार को सरकार से मुआवज़ा मिला?
नहीं। परिवार ने बताया कि अब तक सरकार की ओर से मुआवज़े का कोई संदेश नहीं मिला है। माँ ने कहा कि केवल प्रफुल्ल जी उनके घर आए, कोई मंत्री या नेता नहीं आया।
आकांक्षा के पिता ने उनकी पढ़ाई के लिए क्या किया था?
पिता ने बताया कि उन्होंने केसीसी कार्ड से कर्ज़ लिया और बाद में ₹28 लाख की ज़मीन बेचकर वह कर्ज़ चुकाया। इसके बावजूद आज भी परिवार पर ₹5 से 6 लाख का कर्ज़ बाकी है।
पेपर लीक के बाद छात्र आंदोलन की अब क्या स्थिति है?
परिवार और छात्र संगठनों ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। उनकी माँगों में पीड़ित परिवारों को मुआवज़ा, दोषियों पर कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली में सुधार शामिल हैं।
राष्ट्र प्रेस
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