धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर आकांक्षा चतुर्वेदी का परिवार: 'बेटी की कमी कोई फैसला नहीं भर सकता'
सारांश
मुख्य बातें
पेपर लीक विवाद के बाद जान गँवाने वाली अभ्यर्थी आकांक्षा चतुर्वेदी के परिजनों ने 25 जुलाई को नागपुर से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर तीखी प्रतिक्रिया दी। परिवार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह निर्णय उनकी बेटी के साथ हुई अपूरणीय क्षति की भरपाई नहीं कर सकता। साथ ही परिजनों ने चेतावनी दी कि छात्रों का आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सभी माँगें पूरी नहीं होतीं।
माँ का दर्द: 'हमें अभी तक कोई संदेश नहीं'
आकांक्षा की माँ ने कहा कि छात्रों और अभिभावकों के अथक संघर्ष ने सरकार को झुकने पर विवश किया है, लेकिन न्याय की राह अभी लंबी है। उन्होंने कहा, 'हम अपने बच्चों को इसलिए समर्थन दे रहे हैं क्योंकि सरकार समझ रही थी कि हम झुकेंगे — लेकिन हमारे बच्चों ने उन्हें झुकाया है, आगे भी झुकाएँगे।'
मुआवज़े के सवाल पर उन्होंने कहा कि अब तक परिवार के पास सरकार की ओर से कोई संदेश नहीं पहुँचा है। 'सिर्फ प्रफुल्ल जी हमारे घर आए; कोई नेता, कोई मंत्री नहीं आया। 36 दिन तक सरकार ने हमारे बच्चों को घसीटा — ऐसे में हम कैसे मान लें कि अब हमारी माँगें पूरी की जा रही हैं?'
पिता का आर्थिक संघर्ष: ₹28 लाख की ज़मीन बेची, फिर भी कर्ज़
आकांक्षा के पिता ने बताया कि बेटी के डॉक्टर बनने के सपने को पूरा करने के लिए परिवार ने हर संभव बलिदान किया। उन्होंने कहा, 'हमने केसीसी कार्ड से कर्ज़ लिया, फिर ₹28 लाख की ज़मीन बेचकर वह कर्ज़ चुकाया। जो भी पैसा था, सब उसकी पढ़ाई में लगा दिया।' उन्होंने दुखी स्वर में जोड़ा कि आज भी परिवार पर करीब ₹5 से 6 लाख का कर्ज़ बाकी है और अब उनके पास कोई सहारा नहीं बचा।
आंदोलन की स्थिति: माँगें अभी अधूरी
परिवार ने स्पष्ट किया कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा छात्र आंदोलन का अंत नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब पेपर लीक मामले में जवाबदेही और पीड़ित परिवारों को उचित मुआवज़े की माँग अभी भी अनुत्तरित है। परिजनों ने कहा कि जब तक सरकार ठोस कदम नहीं उठाती, आंदोलन जारी रहेगा।
व्यापक संदर्भ: पेपर लीक और छात्र आक्रोश
गौरतलब है कि आकांक्षा चतुर्वेदी उन अभ्यर्थियों में से थीं जिन्होंने पेपर लीक विवाद के बाद अपनी जान दे दी। इस मामले ने देशभर में छात्रों के आक्रोश को जन्म दिया और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए। आलोचकों का कहना है कि केवल मंत्री के इस्तीफे से प्रणालीगत खामियाँ दूर नहीं होंगी।
आगे क्या होगा
परिवार और छात्र संगठनों की माँग है कि पीड़ित परिवारों को तत्काल मुआवज़ा दिया जाए, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाई जाए। जब तक ये माँगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन की आग बुझने के आसार नहीं हैं।