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एएमयू छात्रसंघ अध्यक्ष नोमान अशरफ: 'घोषणापत्र के वादे पूरे करना पहली प्राथमिकता', 8 साल बाद हुए चुनाव

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एएमयू छात्रसंघ अध्यक्ष नोमान अशरफ: 'घोषणापत्र के वादे पूरे करना पहली प्राथमिकता', 8 साल बाद हुए चुनाव

सारांश

आठ साल के इंतज़ार के बाद एएमयू को मिला नया छात्रसंघ अध्यक्ष — नोमान अशरफ ने हॉस्टल, प्लेसमेंट, महिला सुरक्षा और भ्रष्टाचार को प्राथमिकता सूची में रखा है। साथ ही अपने वायरल बयान पर सफाई देते हुए उन्होंने धर्मनिरपेक्षता और न्यायिक निष्पक्षता का हवाला दिया।

मुख्य बातें

नोमान अशरफ ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) छात्रसंघ के अध्यक्ष पद पर आठ साल बाद हुए चुनाव में जीत दर्ज की।
उनकी पहली प्राथमिकता घोषणापत्र के वादों को पूरा करना है — जिनमें हॉस्टल , खाना , रोज़गार एवं प्लेसमेंट , महिला सुरक्षा , भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद शामिल हैं।
अशरफ ने वायरल बयान पर सफाई दी — कहा कि उन्होंने भारत के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप और गंगा-जमुनी तहजीब की बात की थी, संदर्भ तोड़कर पेश किया गया।
उन्होंने कहा कि किसी को भी न्यायिक फैसले से पहले दोषी या आतंकवादी घोषित नहीं किया जाना चाहिए।
उनका आग्रह है कि सभी विश्वविद्यालयों में नियमित छात्रसंघ चुनाव हों ताकि छात्रों की आवाज़ राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचे।

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) छात्रसंघ के नवनिर्वाचित अध्यक्ष नोमान अशरफ ने 6 नवंबर 2026 को स्पष्ट किया कि आठ वर्षों के लंबे अंतराल के बाद हुए छात्रसंघ चुनाव के बाद उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता छात्रों से किए गए वादों और चुनावी घोषणापत्र को अमल में लाना है। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ विश्वविद्यालय में छात्रों के समक्ष कई गंभीर समस्याएँ हैं, जिनका समाधान चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।

मुख्य प्राथमिकताएँ

अशरफ ने बताया कि चुनाव प्रचार के दौरान छात्रों से जो वादे किए गए, उन पर गंभीरता से काम होगा। हॉस्टल में उचित आवास, खाने की व्यवस्था, रोज़गार एवं प्लेसमेंट, महिला सुरक्षा, भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद — ये वे छह मुद्दे हैं जो चुनाव प्रचार में सबसे अधिक उभर कर सामने आए। उन्होंने स्वीकार किया कि समस्याओं का अंबार एक साथ नहीं सुलझाया जा सकता, इसलिए प्राथमिकता तय करके एक-एक करके आगे बढ़ा जाएगा।

वायरल बयान पर सफाई

हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए उनके एक बयान को लेकर उठ रहे सवालों पर नोमान अशरफ ने कहा कि उनके वक्तव्य को पूरे संदर्भ में देखने के बजाय तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपने बयान में उन्होंने भारत के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप और गंगा-जमुनी तहजीब की बात की थी, साथ ही सर सैयद अहमद खाँ के एक कथन का भी उल्लेख किया था। अशरफ के अनुसार, बयान का एक हिस्सा अलग कर प्रस्तुत किए जाने से उसका वास्तविक अर्थ बदल जाता है।

न्यायिक प्रक्रिया और निष्पक्षता पर रुख

मुस्लिम राजनीतिक नेतृत्व से जुड़े विवादों पर टिप्पणी करते हुए अशरफ ने कहा कि किसी भी मामले में न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक अदालत अपना फैसला नहीं सुना देती, तब तक किसी पर टिप्पणी करने से बचना चाहिए। उनका स्पष्ट मत था कि बिना न्यायिक निर्णय के किसी को भी — चाहे वह कोई भी हो — 'आतंकवादी' घोषित नहीं किया जाना चाहिए।

छात्र राजनीति और विश्वविद्यालय चुनावों पर विचार

अशरफ ने कहा कि छात्र राजनीति का देश के निर्माण में ऐतिहासिक योगदान रहा है और एएमयू से भी ऐसे कई नेता निकले हैं जिन्होंने राष्ट्र का नाम रोशन किया। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सभी विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव नियमित रूप से आयोजित होने चाहिए, ताकि छात्रों की आवाज़ केवल परिसर की चारदीवारी तक सीमित न रहे, बल्कि राष्ट्रीय स्तर तक पहुँच सके। गौरतलब है कि एएमयू में आखिरी बार 2018 में छात्रसंघ चुनाव हुए थे, जिसके बाद विभिन्न विवादों और कानूनी अड़चनों के चलते लंबा अंतराल आया।

आगे की राह

नवनिर्वाचित अध्यक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे आठ साल में जमा हुई समस्याओं का समाधान सीमित संसाधनों और विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ समन्वय बनाते हुए करें। उनके कार्यकाल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि घोषणापत्र के वादे कितनी जल्दी ज़मीन पर उतरते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और छात्रसंघ की शक्तियाँ सीमित होती हैं। वायरल बयान प्रकरण यह भी बताता है कि राजनीतिक ध्रुवीकरण के इस दौर में एक अल्पसंख्यक विश्वविद्यालय के छात्र नेता के हर शब्द को राष्ट्रीय राजनीति के चश्मे से परखा जाएगा — जो छात्र मुद्दों को हाशिये पर धकेलने का जोखिम रखता है। अशरफ की असली परीक्षा नारों में नहीं, अगले छह महीनों के ठोस नतीजों में होगी।
RashtraPress
7 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एएमयू छात्रसंघ के नए अध्यक्ष कौन हैं और उनकी मुख्य प्राथमिकताएँ क्या हैं?
नोमान अशरफ अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छात्रसंघ के नवनिर्वाचित अध्यक्ष हैं। उनकी मुख्य प्राथमिकताएँ घोषणापत्र के वादे पूरे करना, हॉस्टल व्यवस्था सुधारना, रोज़गार-प्लेसमेंट, महिला सुरक्षा और भ्रष्टाचार पर काम करना है।
एएमयू में आखिरी बार छात्रसंघ चुनाव कब हुए थे?
एएमयू में इससे पहले 2018 में छात्रसंघ चुनाव हुए थे। इस तरह 2026 के चुनाव लगभग आठ साल के लंबे अंतराल के बाद आयोजित हुए, जिस दौरान छात्रों की कई समस्याएँ अनसुलझी रहीं।
नोमान अशरफ का वायरल बयान किस बारे में था?
अशरफ ने कहा कि उनके बयान को संदर्भ से अलग करके पेश किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने भारत के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप, गंगा-जमुनी तहजीब और सर सैयद अहमद खाँ के एक कथन का उल्लेख किया था; बयान का एक हिस्सा काटकर प्रसारित किए जाने से उसका अर्थ बदल गया।
नोमान अशरफ ने न्यायिक प्रक्रिया पर क्या कहा?
अशरफ ने कहा कि किसी को भी न्यायालय के फैसले से पहले दोषी या आतंकवादी घोषित नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार जब तक मामला अदालत में विचाराधीन हो, तब तक उस पर सार्वजनिक टिप्पणी से बचना चाहिए और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान होना चाहिए।
एएमयू छात्रसंघ चुनावों में छात्रों के प्रमुख मुद्दे क्या रहे?
चुनाव प्रचार के दौरान हॉस्टल में उचित कमरों की कमी, खाने की खराब व्यवस्था, नौकरी व प्लेसमेंट की दिक्कतें, महिला सुरक्षा, भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद प्रमुख मुद्दे रहे। नोमान अशरफ ने इन्हें चरणबद्ध तरीके से सुलझाने का वादा किया है।
राष्ट्र प्रेस
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