आंध्र प्रदेश की 108 एम्बुलेंस सेवा ने एक साल में 7,78,799 आपातकालीन कॉल संभाले, अंतरराष्ट्रीय मानकों पर अपग्रेड
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश सरकार ने अपनी 108 एम्बुलेंस आपातकालीन सेवा को अंतरराष्ट्रीय ट्रॉमा केयर मानकों के अनुरूप पूरी तरह आधुनिक बना दिया है, जिसके परिणामस्वरूप जून 2025 से मई 2026 के बीच 7,78,799 आपातकालीन कॉलों का सफलतापूर्वक जवाब दिया गया। विजयवाड़ा से 7 जून को जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई। यह उन्नयन 'जीवन बचाने में हर सेकंड मायने रखता है' के मूल सिद्धांत पर आधारित है और राज्य के ग्रामीण व शहरी, दोनों क्षेत्रों के लाखों नागरिकों के लिए एक भरोसेमंद जीवन रेखा साबित हो रहा है।
आधुनिकीकरण में क्या बदला
भव्या हेल्थ केयर के साथ साझेदारी में राज्य सरकार ने एम्बुलेंस बेड़े में उन्नत जीपीएस ट्रैकिंग, रियल-टाइम ट्रैफिक रूटिंग और डिजिटल पेशेंट लॉग को एकीकृत किया है। इन तकनीकी सुधारों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पीड़ितों तक चिकित्सा विज्ञान में 'गोल्डन आवर' कहे जाने वाले अत्यंत महत्वपूर्ण समय के भीतर पहुँचा जा सके और उनकी स्थिति मौके पर ही स्थिर की जा सके। आधिकारिक बयान के अनुसार, वाहनों के परिचालन को दो प्रमुख धाराओं में विभाजित किया गया है: अंतर-सुविधा स्थानांतरण (IFT) और गैर-IFT आपात स्थितियाँ।
मुख्य परिचालन आँकड़े
एक वर्ष के परिचालन चक्र में IFT के अंतर्गत 2,53,022 मामले संभाले गए, जिनमें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से तृतीयक सुपर-स्पेशियलिटी अस्पतालों तक गंभीर रोगियों को देखभाल की निरंतरता बनाए रखते हुए स्थानांतरित किया गया। गैर-IFT श्रेणी में 5,25,777 मामले शामिल रहे, जिनमें दुर्घटना स्थलों, घरों और दूरदराज के खेतों तक सीधे सहायता पहुँचाई गई।
सड़क दुर्घटनाएँ सबसे बड़ी श्रेणी रहीं — 1,13,764 पीड़ितों की स्थिति घटनास्थल पर ही स्थिर की गई। इसके बाद 1,05,786 गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित रूप से प्रसूति सुविधाओं तक पहुँचाया गया, जिससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में योगदान मिला।
विशेष चिकित्सा हस्तक्षेप
प्रथम प्रतिक्रियाकर्ताओं ने श्वसन संकट के 97,118 मामलों में तत्काल ऑक्सीजन और उन्नत वायुमार्ग प्रबंधन किया। 49,342 गैर-वाहन संबंधी चोटों में रक्तस्राव नियंत्रण तकनीक से स्थिरीकरण किया गया। इसके अतिरिक्त, 45,951 हृदय संबंधी आपात स्थितियों और 40,553 बेहोशी के मामलों को उन्नत ट्रैकिंग और पुनर्जीवन प्रोटोकॉल के माध्यम से सफलतापूर्वक संभाला गया।
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा पर असर
आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, इस सेवा ने ग्रामीण आंध्र प्रदेश में स्वास्थ्य सेवा की पहुँच को उल्लेखनीय रूप से बेहतर बनाया है। गौरतलब है कि ग्रामीण इलाकों में विशेष चिकित्सा सुविधाओं की कमी के चलते 'गोल्डन आवर' में समय पर उपचार न मिल पाना एक बड़ी चुनौती रही है — यह प्रणाली उसी अंतर को पाटने का प्रयास कर रही है। यह सेवा राज्य सरकार की व्यापक स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
आगे की राह
इस उन्नत ढाँचे के सफल परिचालन के बाद, राज्य सरकार से अपेक्षा है कि वह इस मॉडल को और विस्तार दे तथा डेटा-आधारित सुधारों के ज़रिए प्रतिक्रिया समय को और कम करे। आँकड़ों के अनुसार, यह प्रणाली अब आंध्र प्रदेश के आपातकालीन स्वास्थ्य तंत्र की रीढ़ बन चुकी है।