टिहरी बांध में सेना के जवानों ने पैरा जंपिंग का अद्वितीय प्रशिक्षण किया

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टिहरी बांध में सेना के जवानों ने पैरा जंपिंग का अद्वितीय प्रशिक्षण किया

सारांश

भारतीय सेना के जवानों ने टिहरी बांध में विशेष हवाई प्रशिक्षण अभ्यास के दौरान पैरा जंपिंग में असाधारण कौशल का प्रदर्शन किया। यह अभ्यास भारतीय सेना और वायुसेना के बीच तालमेल को भी दर्शाता है।

Key Takeaways

  • पैरा जंपिंग में असाधारण कौशल का प्रदर्शन
  • बड़ी ऊँचाई पर प्रशिक्षण का महत्व
  • सेना और वायुसेना के बीच सहयोग
  • टिहरी बांध की रणनीतिक भूमिका
  • हवाई अभियानों में ऑपरेशनल तत्परता

नई दिल्ली, 9 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय सेना के जवानों ने उत्तराखंड में स्थित टिहरी बांध के ऊँचाई वाले जलाशय में विशेष हवाई प्रशिक्षण अभ्यास के तहत असाधारण हवाई कौशल और परिचालन सटीकता का उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। इस अभ्यास के दौरान जवानों ने स्टैटिक लाइन और कॉम्बैट फ्रीफॉल दोनों प्रकार के पैरा जंप को सफलता पूर्वक अंजाम दिया।

भारतीय सेना के अनुसार, टिहरी बांध पर उच्च जोखिम वाले जलाशय में पैरा जंप का अनुकरण करते हुए इस जटिल ऑपरेशन में सटीक योजना, त्रुटिहीन समन्वय और सही निष्पादन की आवश्यकता थी। योद्धाओं ने टिहरी के चुनौतीपूर्ण जल में असाधारण सटीकता के साथ उतरकर हवाई अभियानों में अपनी महारत और कठिन भूभाग में विशेष मिशनों को अंजाम देने की तत्परता का प्रदर्शन किया।

इस अभ्यास ने भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना के बीच एक मजबूत संयुक्त तालमेल को भी उजागर किया, जो आधुनिक अभियानों में एकीकृत प्रशिक्षण और निर्बाध सहयोग पर बढ़ते जोर को दर्शाता है।

इस तरह के कठोर प्रशिक्षण के माध्यम से जवान भारत के हवाई बलों की विशिष्ट परंपराओं को कायम रखते हुए परिचालन तत्परता, युद्ध प्रभावशीलता और उत्कृष्टता की भावना को सुदृढ़ करते हैं, जो भारतीय सेना की पहचान है।

गौरतलब है कि टिहरी बांध टेहरी विकास परियोजना का एक प्रमुख बांध है, जो टिहरी जिले में स्थित है। इसे स्वामी रामतीर्थ सागर बांध भी कहा जाता है। इस बांध का निर्माण गंगा नदी की प्रमुख सहयोगी नदी भागीरथी और भीलांगना नदी के संगम पर किया गया है। टिहरी बांध की ऊँचाई 261 मीटर है। यह भारत का सबसे ऊँचा और विशालकाय बांध है, और इसे दुनिया का आठवाँ सबसे बड़ा बांध माना जाता है, जिसका उपयोग सिंचाई और बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है।

टिहरी बांध पर 600 मेगावाट का बिजली संयंत्र भी स्थापित किया गया है। इसका निर्माण कार्य 1978 में शुरू हुआ था, लेकिन आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभावों के कारण इसका कार्य 2006 में पूरा हुआ।

Point of View

बल्कि भारतीय वायुसेना और सेना के बीच सहयोग को भी सुदृढ़ करता है। इस तरह के अभ्यास से अद्वितीय चुनौतियों का सामना करने के लिए आवश्यक कौशल विकसित होते हैं।
NationPress
13/03/2026

Frequently Asked Questions

टिहरी बांध का निर्माण कब हुआ था?
टिहरी बांध का निर्माण कार्य 1978 में शुरू हुआ था और यह 2006 में पूरा हुआ।
टिहरी बांध की ऊँचाई कितनी है?
टिहरी बांध की ऊँचाई 261 मीटर है।
भारतीय सेना के जवानों ने किस प्रकार के पैरा जंप किए?
जवानों ने स्टैटिक लाइन और कॉम्बैट फ्रीफॉल दोनों प्रकार के पैरा जंप किए।
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य क्या था?
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य जवानों की हवाई कौशल और परिचालन सटीकता को बढ़ाना था।
टिहरी बांध का उपयोग किसके लिए किया जाता है?
टिहरी बांध का उपयोग सिंचाई और बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है।
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