असम में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी से शासन क्रांति: ASSAC ने 5 वर्षों में 60 भू-स्थानिक परियोजनाएं पूरी कीं
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 को जानकारी दी कि राज्य सरकार दीर्घकालिक विकासात्मक चुनौतियों से निपटने के लिए विज्ञान और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को तेज़ी से अपना रही है। असम राज्य अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (ASSAC) ने 2021 से 2026 के बीच मात्र पाँच वर्षों में 60 से अधिक अंतरिक्ष एवं भू-स्थानिक परियोजनाएं पूरी की हैं — जो राज्य में प्रौद्योगिकी-आधारित शासन की रफ़्तार को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
ऐतिहासिक तुलना: 32 साल बनाम 5 साल
आँकड़े इस बदलाव की गहराई को उजागर करते हैं। 1989 से 2021 तक — यानी 32 वर्षों की अवधि में — ASSAC ने कुल 82 परियोजनाएं कार्यान्वित की थीं। इसके विपरीत, संगठन ने पिछले पाँच वर्षों में ही 60 परियोजनाएं पूरी कर लीं। यह वृद्धि दर भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियों को अपनाने की असाधारण गति को रेखांकित करती है।
परियोजनाओं का दायरा और क्षेत्र
मुख्यमंत्री सरमा के अनुसार, ये परियोजनाएं कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को कवर करती हैं — जिनमें मानचित्रण, रिमोट सेंसिंग, स्थानिक विश्लेषण और पूर्वानुमान शामिल हैं। इनका उद्देश्य साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को मज़बूत करना और सरकारी कार्यक्रमों के क्रियान्वयन को अधिक कुशल बनाना है।
अधिकारियों के अनुसार, उपग्रह इमेजरी, भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS), रिमोट सेंसिंग डेटा और भविष्यसूचक विश्लेषण का उपयोग अब बुनियादी ढाँचे की योजना, प्राकृतिक संसाधन निगरानी, आपदा प्रबंधन, शहरी विकास, कृषि और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में तेज़ी से महत्वपूर्ण होता जा रहा है।
शासन में प्रौद्योगिकी का एकीकरण
राज्य सरकार प्रशासनिक प्रक्रियाओं में वैज्ञानिक उपकरणों को एकीकृत कर पारदर्शिता, दक्षता और नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण में सुधार लाने पर ज़ोर दे रही है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में राज्य सरकारें डिजिटल और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को शासन के केंद्र में लाने की होड़ में हैं।
गौरतलब है कि असम बाढ़-प्रवण और भौगोलिक रूप से जटिल राज्य है, जहाँ आपदा प्रबंधन और भूमि रिकॉर्ड प्रबंधन जैसी चुनौतियों के लिए सटीक भू-स्थानिक डेटा की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जाती रही है।
आगे की राह
ASSAC की बढ़ती भूमिका यह संकेत देती है कि असम सरकार भविष्य में भी अंतरिक्ष और भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी को शासन की मुख्यधारा में बनाए रखने के प्रति प्रतिबद्ध है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन परियोजनाओं के परिणाम ज़मीनी स्तर पर नागरिकों तक पहुँचते हैं, तो यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय बन सकता है।