असम कांग्रेस ने नीलामणि सेन डेका का निष्कासन रद्द किया, चार साल बाद मिली वापसी
सारांश
मुख्य बातें
असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री नीलामणि सेन डेका के खिलाफ लगभग चार साल पहले जारी निष्कासन आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है। 29 मई 2026 को जारी इस आदेश के साथ डेका की पार्टी में औपचारिक वापसी हो गई है।
आधिकारिक आदेश का ब्यौरा
एपीसीसी के महासचिव (संगठन) रमन्ना बरुआ द्वारा जारी आधिकारिक आदेश में स्पष्ट किया गया कि असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई के निर्देश पर यह निर्णय लिया गया है। आदेश में कहा गया, 'अध्यक्ष, असम पीसीसी गौरव गोगोई के निर्देशानुसार नीलामणि सेन डेका के निष्कासन संबंधी आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाता है।'
निष्कासन की पृष्ठभूमि
नीलामणि सेन डेका, जो असम पीसीसी कार्यकारिणी के सदस्य हैं, को मई 2022 में कथित तौर पर पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोप में कांग्रेस से निष्कासित किया गया था। उस समय तत्कालीन एपीसीसी महासचिव (प्रशासन) अपूर्व कुमार भट्टाचार्य ने तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बूपेन कुमार बोरा के निर्देश पर यह कार्रवाई की थी। आदेश में उल्लेख था कि कई चेतावनियों और लिखित आश्वासनों के बावजूद डेका पार्टी हितों के विरुद्ध बयानबाजी और गतिविधियों में संलिप्त रहे।
नीलामणि सेन डेका का राजनीतिक सफर
डेका ने पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई की सरकार में कृषि मंत्री के रूप में कार्य किया था और उनके पास बागवानी तथा खाद्य प्रसंस्करण विभाग का भी दायित्व रहा। दो बार विधायक रहे डेका ने 2016 के विधानसभा चुनाव में धर्मपुर सीट से चुनाव लड़ा था, परंतु उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। गौरतलब है कि 2013 में उनका एक बयान राष्ट्रीय स्तर पर विवाद का केंद्र बना था, जब उन्होंने दावा किया था कि ₹20 में आठ लोग भरपेट भोजन कर सकते हैं।
असम में कांग्रेस की स्थिति
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस हाल ही में संपन्न असम विधानसभा चुनाव में केवल 19 सीटें जीत सकी — जो राज्य में उसका अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन माना जा रहा है। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पहली बार अपने दम पर बहुमत हासिल करते हुए 82 सीटें जीतीं, और BJP के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 126 सदस्यीय विधानसभा में कुल 102 सीटों पर जीत दर्ज की।
आगे की राह
डेका की पार्टी में वापसी को कांग्रेस के संगठनात्मक पुनर्निर्माण प्रयासों का हिस्सा माना जा रहा है। विपक्ष में सिकुड़ती उपस्थिति के बीच पार्टी अनुभवी नेताओं को साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है।