बच्चों में हीट स्ट्रोक के लक्षण और बचाव: WHO की जरूरी सलाह, तापमान 45°C पार
सारांश
मुख्य बातें
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 24 मई 2026 को अभिभावकों को चेतावनी जारी की है कि देश के कई हिस्सों में 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुँचे तापमान के बीच बच्चे हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के सबसे अधिक शिकार हो सकते हैं। संगठन ने स्पष्ट किया है कि गर्मी के मौसम में बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में कहीं तेज़ी से गर्म होता है, जिससे उन्हें विशेष देखभाल की आवश्यकता है।
बच्चों में हीट स्ट्रोक के प्रमुख लक्षण
WHO के अनुसार, यदि किसी बच्चे के शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस (104 डिग्री फ़ारेनहाइट) या उससे अधिक हो जाए, तो यह हीट स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। इसके साथ तेज़ सिरदर्द, अत्यधिक पसीना, मांसपेशियों में ऐंठन या दर्द, तेज़ दिल की धड़कन और साँस लेने में कठिनाई भी देखी जा सकती है।
इसके अलावा चक्कर आना, बेहोशी, असामान्य चिड़चिड़ापन और मतली या उल्टी भी गंभीर गर्मी से जुड़ी बीमारी के संकेत हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इनमें से कोई भी लक्षण दिखते ही तत्काल कदम उठाना ज़रूरी है।
फर्स्ट एड: तुरंत क्या करें
WHO ने अभिभावकों को सलाह दी है कि यदि बच्चे को लू लग जाए तो घबराने की बजाय तुरंत प्राथमिक उपचार शुरू करें। सबसे पहले बच्चे को छायादार स्थान या घर के अंदर ले जाएँ। यदि बच्चा होश में है और सतर्क है, तो उसे ORS, नींबू पानी या सादा पानी छोटे-छोटे घूंट में पिलाते रहें।
बच्चे को लिटाकर उसके पैर थोड़े ऊँचे कर दें और नल के ठंडे पानी से शरीर को स्पंज करें। यदि उल्टी हो रही हो, तो बच्चे को करवट पर लिटाएँ ताकि साँस की नली अवरुद्ध न हो।
बेहोश बच्चे के लिए विशेष सावधानी
संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि बच्चा बेहोश हो जाए, तो उसे जबरदस्ती पानी या कोई भी चीज़ खिलाने-पिलाने की कोशिश बिल्कुल न करें — इससे दम घुटने का खतरा हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत नज़दीकी डॉक्टर या आपातकालीन सेवा से संपर्क करें। बच्चे को सीधी धूप में न छोड़ें और भारी या गर्म कपड़े उतार दें।
बचाव के उपाय: रोज़ाना की सावधानियाँ
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अभिभावकों से अनुरोध किया है कि बच्चों को दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच घर से बाहर न निकालें, क्योंकि इस समय तापमान और UV किरणें सबसे तीव्र होती हैं। घर से निकलते समय पानी की बोतल, टोपी और छाता अनिवार्य रूप से साथ रखें।
बच्चों को हल्के, सूती और ढीले कपड़े पहनाएँ, जो शरीर की गर्मी को बाहर निकलने दें। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि थोड़ी सी सतर्कता और समय पर उचित कदम उठाकर बच्चों को गर्मी की गंभीर समस्याओं से बचाया जा सकता है।
आम जनता पर असर और आगे की स्थिति
यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब उत्तर भारत के कई राज्यों में लू की स्थिति लगातार बनी हुई है और मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक राहत की संभावना नहीं जताई है। विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे बच्चे और बुजुर्ग इस मौसम में सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं। लक्षण दिखते ही बिना देरी किए डॉक्टर से परामर्श लेना ही सबसे सुरक्षित कदम है।