बुकर विजेता बानू मुश्ताक बोलीं — एसआईआर सरल प्रक्रिया, आधार और वोटर आईडी ही काफी
सारांश
मुख्य बातें
कन्नड़ लेखिका और बुकर पुरस्कार विजेता बानू मुश्ताक ने मंगलवार, 30 जून 2026 को हसन, कर्नाटक में अपने आवास से मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) की शुरुआत करने के बाद स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया पूरी तरह सरल है और नागरिकों को परेशान करने के लिए नहीं बनाई गई है। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत अनुभव के बाद उनकी पूर्व आशंकाएँ दूर हो गईं।
मुश्ताक का व्यक्तिगत अनुभव
मुश्ताक ने बताया कि राजनेताओं और कार्यकर्ताओं की आलोचना सुनकर उन्हें शुरू में यह आभास हुआ था कि एसआईआर नागरिकों के लिए कठिन और परेशानी भरी प्रक्रिया है। उन्होंने कहा, "मुझे चिंता थी कि मुझे कौन से दस्तावेज दिखाने होंगे, क्या-क्या इकट्ठा करना होगा और क्या यह प्रक्रिया बहुत मुश्किल होगी।" जब डिप्टी कमिश्नर ने उन्हें सूचित किया कि एसआईआर की शुरुआत उनके आवास से होगी, तो वे हैरान रह गईं।
प्रक्रिया पूरी होने के बाद मुश्ताक ने कहा कि उन्हें केवल दो दस्तावेज — आधार कार्ड और पुराना वोटर आईडी कार्ड — जमा करने थे। उन्होंने स्वयं गणना फॉर्म भरा। एक प्रति जिला प्रशासन के पास रहेगी और दूसरी नागरिक के पास।
अधिकारियों से धैर्य का आग्रह
मुश्ताक ने जिला प्रशासन से आग्रह किया कि वे सुनिश्चित करें कि हर नागरिक को सही और विनम्र मार्गदर्शन मिले। उन्होंने डिप्टी कमिश्नर से कहा कि इस प्रक्रिया को लेकर जनता में और अधिक जागरूकता फैलाई जाए। उनके शब्दों में, "मुझे उम्मीद है कि अधिकारी जनता के साथ वैसा ही धैर्य और शांतिपूर्ण मार्गदर्शन करेंगे, जैसा उन्होंने फॉर्म भरने में मेरी मदद करते समय किया था।"
कर्नाटक में एसआईआर की शुरुआत
30 जून 2026 को पूरे कर्नाटक में एसआईआर अभियान की विधिवत शुरुआत हुई। इसके अंतर्गत 59,000 से अधिक बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) ने घर-घर जाकर एक महीने लंबे वेरिफिकेशन अभियान की शुरुआत की। इस अभियान का उद्देश्य राज्य की मतदाता सूची को सटीक, पूर्ण और अद्यतन बनाना है।
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने सदाशिवनगर स्थित अपने आवास पर एन्यूमरेशन फॉर्म भरकर राज्य में एसआईआर का आगाज़ किया। उन्होंने सभी योग्य मतदाताओं से अपील की कि वे अपने मतदान अधिकारों की सुरक्षा के लिए यह प्रक्रिया अवश्य पूरी करें और इस बात पर जोर दिया कि सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए मतदाता पंजीकरण अनिवार्य है।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब एसआईआर को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और नागरिक समूहों में मिश्रित प्रतिक्रियाएँ देखी जा रही हैं। कुछ आलोचकों का कहना है कि इस प्रक्रिया से वंचित वर्गों और दूरदराज के क्षेत्रों के नागरिकों को दस्तावेज़ीकरण में कठिनाई हो सकती है। हालाँकि, बानू मुश्ताक जैसी著名 हस्तियों का सकारात्मक अनुभव प्रशासन के लिए एक महत्त्वपूर्ण संदेश है कि प्रक्रिया को सुलभ और सहज बनाए रखना आवश्यक है। अभियान के सफल क्रियान्वयन पर राज्य की मतदाता सूची की विश्वसनीयता निर्भर करेगी।