9 अगस्त 2026
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बिदादी टाउनशिप परियोजना: कर्नाटक सरकार ने जस्टिस नरेंद्र की अध्यक्षता में समिति गठित, 30 दिन में रिपोर्ट तलब

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बिदादी टाउनशिप परियोजना: कर्नाटक सरकार ने जस्टिस नरेंद्र की अध्यक्षता में समिति गठित, 30 दिन में रिपोर्ट तलब

सारांश

दो दशक पुरानी बिदादी टाउनशिप परियोजना एक बार फिर जाँच के दायरे में है। कर्नाटक सरकार ने जस्टिस नरेंद्र की अगुवाई में समिति बनाई है जो 30 दिन में रिपोर्ट देगी — यह कदम हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद भी जारी जन-विरोध को शांत करने की कोशिश है।

मुख्य बातें

कर्नाटक सरकार ने बिदादी टाउनशिप परियोजना की जाँच के लिए जस्टिस गुहानाथन नरेंद्र की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित की।
समिति में रिटायर्ड मुख्य सचिव एस.वी.
उमाशंकर और प्रसन्ना कुमार सदस्य हैं; रिपोर्ट 30 दिनों में अपेक्षित।
परियोजना का विचार पहली बार 2006 में आया था; अब इसे ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड सबअर्बन प्रोजेक्ट के रूप में पुनर्जीवित किया जा रहा है।
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली PIL खारिज की; मुआवज़ा भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 के तहत दिए जाने का दावा।
सरकार ने रिहायशी विस्थापन न्यूनतम रखने और भूमि मालिकों को उचित मुआवज़ा सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया।

कर्नाटक सरकार ने बिदादी टाउनशिप परियोजना — जिसे अब ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड सबअर्बन प्रोजेक्ट के नाम से पुनर्जीवित किया जा रहा है — को लेकर उठ रही विविध आपत्तियों और चिंताओं की गहन जाँच के लिए 9 अगस्त 2026 को एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। जस्टिस गुहानाथन नरेंद्र की अध्यक्षता में बनी इस समिति को 30 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया है।

समिति की संरचना और कार्यक्षेत्र

समिति में रिटायर्ड मुख्य सचिव एस.वी. रंगनाथ, रिटायर्ड अतिरिक्त मुख्य सचिव एस.आर. उमाशंकर और रिटायर्ड आईएएस अधिकारी प्रसन्ना कुमार सदस्य के रूप में शामिल हैं। यह पैनल परियोजना की कानूनी, मानवीय और समग्र विकास की दृष्टि से समीक्षा करेगा और सरकार को ठोस सिफारिशें प्रस्तुत करेगा।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि समिति का उद्देश्य जनता के सुझावों, सिफारिशों और विचारों को आत्मसात करते हुए परियोजना को और अधिक जन-अनुकूल बनाना है।

परियोजना की पृष्ठभूमि

बिदादी के निकट एक एकीकृत टाउनशिप विकसित करने का विचार पहली बार 2006 में सामने आया था। दो दशकों की अनिश्चितता के बाद वर्तमान सरकार ने इसे ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड सबअर्बन प्रोजेक्ट के रूप में नए सिरे से शुरू करने का निर्णय लिया। अधिकारियों के अनुसार, परियोजना का लक्ष्य बेंगलुरु के आसपास निवेश के अवसरों को बढ़ाना और शहरी दबाव को उपनगरीय क्षेत्रों में विकेंद्रित करना है।

गौरतलब है कि यह परियोजना उस व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है जिसमें भारत के प्रमुख महानगर अपने विस्तार के लिए उपग्रह टाउनशिप मॉडल अपना रहे हैं — जैसे हैदराबाद का ओआरआर कॉरिडोर और दिल्ली-एनसीआर का नियोजित विस्तार।

सरकार का रुख और आश्वासन

सरकार ने दोहराया है कि परियोजना में मौजूदा रिहायशी इलाकों के विस्थापन को न्यूनतम रखा जाएगा और भूमि मालिकों को उचित मुआवज़ा सुनिश्चित किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि निवासियों की आकांक्षाओं का सम्मान करना और सभी हितधारकों का विश्वास अर्जित करना इस प्रक्रिया का केंद्रीय उद्देश्य है।

हाईकोर्ट का फैसला और कानूनी स्थिति

हाल ही में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बिदादी टाउनशिप परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका (PIL) खारिज कर दी, जिससे सरकार और मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को महत्वपूर्ण राहत मिली।

सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने कहा था कि अधिग्रहण की प्रक्रिया अलग हो सकती है और बेहतर मुआवज़े के लिए किसी विशेष कानून का उपयोग किया गया हो सकता है। बेंच ने यह भी नोट किया कि राज्य का दावा था कि मुआवज़ा भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 के प्रावधानों के अंतर्गत दिया जा रहा है, और याचिकाकर्ता से कानून के किसी ठोस उल्लंघन को रेखांकित करने को कहा।

आगे की राह

समिति की रिपोर्ट आने के बाद सरकार परियोजना के क्रियान्वयन पर अंतिम निर्णय लेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि रिपोर्ट की सिफारिशें न केवल बिदादी परियोजना बल्कि कर्नाटक में भविष्य की टाउनशिप नीति की दिशा भी तय कर सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो विस्थापन की आशंका वाले निवासियों का अविश्वास और गहरा होगा।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिदादी टाउनशिप परियोजना क्या है?
बिदादी टाउनशिप परियोजना, जिसे अब ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड सबअर्बन प्रोजेक्ट कहा जाता है, बेंगलुरु के निकट बिदादी में एक एकीकृत उपनगरीय टाउनशिप विकसित करने की योजना है। इसका विचार 2006 में पहली बार सामने आया था और इसका उद्देश्य बेंगलुरु के आसपास निवेश व आवासीय विकास को बढ़ावा देना है।
कर्नाटक सरकार ने समिति क्यों बनाई?
परियोजना को लेकर विभिन्न पक्षों की आपत्तियों और चिंताओं की व्यापक जाँच के लिए सरकार ने यह समिति गठित की है। समिति कानूनी, मानवीय और विकास के दृष्टिकोण से परियोजना की समीक्षा कर सरकार को सिफारिशें देगी।
समिति में कौन-कौन शामिल हैं और रिपोर्ट कब आएगी?
समिति की अध्यक्षता जस्टिस गुहानाथन नरेंद्र कर रहे हैं। सदस्यों में रिटायर्ड मुख्य सचिव एस.वी. रंगनाथ, रिटायर्ड अतिरिक्त मुख्य सचिव एस.आर. उमाशंकर और रिटायर्ड आईएएस अधिकारी प्रसन्ना कुमार शामिल हैं। समिति को 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने इस परियोजना पर क्या फैसला सुनाया?
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बिदादी टाउनशिप के लिए भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (PIL) खारिज कर दी। बेंच ने कहा कि मुआवज़ा भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 के तहत दिया जा रहा है और याचिकाकर्ता कानून का कोई ठोस उल्लंघन नहीं दर्शा सके।
इस परियोजना से प्रभावित निवासियों को क्या आश्वासन दिया गया है?
सरकार ने आश्वासन दिया है कि मौजूदा रिहायशी इलाकों का विस्थापन न्यूनतम रखा जाएगा और भूमि मालिकों को उचित मुआवज़ा सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही जनता के सुझावों और सिफारिशों को परियोजना में शामिल करने की प्रतिबद्धता जताई गई है।
राष्ट्र प्रेस
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