बिहार में नए मुख्यमंत्री का चेहरा एनडीए नेतृत्व द्वारा तय होगा: रामकृपाल यादव
सारांश
Key Takeaways
- एनडीए नेतृत्व नए मुख्यमंत्री का चेहरा तय करेगा।
- नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद छोड़ने का निर्णय लिया।
- उनका सपना है कि बिहार 2030 तक विकसित राज्य बने।
- रामकृपाल यादव का कांग्रेस पर कटाक्ष।
- गंगा के पवित्र स्थान पर नॉन-वेज इफ्तार पार्टी का आयोजन गलत है।
पटना, १८ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बिहार की राजनीति में फिर से हलचल मचती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि एनडीए नेतृत्व ही निर्णय करेगा कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। उन्होंने कहा कि आगामी कुछ दिनों में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी।
जनता दल (यूनाइटेड) में नेतृत्व के मुद्दे पर भी उन्होंने अपनी राय व्यक्त की। रामकृपाल यादव ने कहा कि नीतीश कुमार जदयू के संस्थापक हैं। उन्होंने याद दिलाया कि समता पार्टी से जदयू का निर्माण हुआ और इस प्रक्रिया में नीतीश कुमार ने संगठन को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास किए। उन्होंने बताया कि नीतीश कुमार ने स्वयं निर्णय लिया है कि वे अब मुख्यमंत्री पद पर नहीं रहेंगे, लेकिन नई सरकार को मार्गदर्शन प्रदान करते रहेंगे। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया है कि वे पार्टी संगठन की जिम्मेदारी आगे भी निभाते रहेंगे।
उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार का सपना है कि साल 2030 तक बिहार एक विकसित राज्य बने। इस लक्ष्य को पाने के लिए वे लगातार प्रयासरत हैं और उनके मार्गदर्शन से यह संभव होगा। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए रामकृपाल यादव ने कहा कि भविष्य में कांग्रेस का अस्तित्व पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव पर भी उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी शासन में बंगाल बर्बाद हो चुका है और वहां के लोगों के साथ अन्याय हुआ है। उन्होंने कहा कि अत्याचार के कारण जनता डरी हुई है, लेकिन चुनाव में लोग अपने मत का सही उपयोग करेंगे और टीएमसी को हटाकर भाजपा नेतृत्व वाली सरकार बनाएंगे।
वहीं, वाराणसी में गंगा नदी के बीच नॉन-वेज इफ्तार पार्टी के आयोजन पर उन्होंने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में गंगा मां के रूप में पूजी जाती हैं और यह एक अत्यंत पवित्र स्थान है। खासकर बनारस के घाटों पर दुनियाभर से लोग आते हैं। ऐसे स्थल पर इस प्रकार का आयोजन करना पूरी तरह गलत है। उन्होंने इसे सनातन और हिंदू धर्म का गंभीर अपमान बताया और कहा कि इसे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।