10 अगस्त 2026
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कर्नाटक क्रॉस-वोटिंग पर BJP की चिंतन बैठक: राधा मोहन दास अग्रवाल बोले — 'यह नियमित समीक्षा है, कोई संकट नहीं'

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कर्नाटक क्रॉस-वोटिंग पर BJP की चिंतन बैठक: राधा मोहन दास अग्रवाल बोले — 'यह नियमित समीक्षा है, कोई संकट नहीं'

सारांश

कर्नाटक में क्रॉस-वोटिंग के बाद बुलाई गई चिंतन बैठक को BJP प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल ने 'नियमित संगठनात्मक समीक्षा' बताया। 22 राज्यों और करीब 2000 विधायकों वाले संगठन में 'छोटी कमज़ोरी' को दूर करना पार्टी की प्राथमिकता है — यह संदेश देकर अग्रवाल ने विपक्षी आख्यान को काटने की कोशिश की।

मुख्य बातें

राधा मोहन दास अग्रवाल ने 22 जून को स्पष्ट किया कि कर्नाटक चिंतन बैठक भाजपा की नियमित संगठनात्मक समीक्षा है, कोई संकट नहीं।
भाजपा 22 राज्यों में सरकार चला रही है और उसके पास दो से ढाई हजार विधायक हैं; छोटी कमज़ोरी को तुरंत दूर करना पार्टी की नीति है।
विधायकों को 'कसम खिलाने' की अटकलों को अग्रवाल ने सिरे से खारिज किया; वीरेंद्र हेगड़े के यहाँ प्रस्तावित बैठक को सामान्य राजनीतिक बैठक बताया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कथित 'यूजलेस फेलोज' बयान पर भाजपा ने पार्टी में आंतरिक असंतोष का प्रमाण बताया।
अग्रवाल ने कर्नाटक में जल्द होने वाले तीन एमएलसी चुनावों की तैयारी की भी समीक्षा की; वे स्वयं शीघ्र बेंगलुरु दौरे पर जाएंगे।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सांसद और कर्नाटक प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल ने 22 जून को नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि कर्नाटक में हुई क्रॉस-वोटिंग के बाद बुलाई गई चिंतन बैठक पार्टी की सामान्य संगठनात्मक प्रक्रिया का हिस्सा है, न कि किसी आंतरिक संकट का संकेत। उन्होंने कहा कि भाजपा हर चुनाव के बाद इस तरह की समीक्षा बैठकें आयोजित करती है, जिनमें जीत और हार दोनों के कारणों का विश्लेषण किया जाता है।

चिंतन बैठक का उद्देश्य

अग्रवाल ने कहा कि इन बैठकों में यह आकलन किया जाता है कि पार्टी किन कारणों से जीती और किन परिस्थितियों में उसे हार का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार, भाजपा देश के 22 राज्यों में सरकार चला रही है और उसके पास दो से ढाई हजार विधायक हैं। इतने विशाल संगठन में यदि कोई छोटी कमज़ोरी उभरती है, तो उसे तुरंत दूर करना पार्टी की ज़िम्मेदारी है। उन्होंने कहा, 'इतने बड़े संगठन में यदि कहीं छोटा सा छिद्र दिखाई देता है तो उसे भरना हमारी जिम्मेदारी है।'

क्रॉस-वोटिंग पर पार्टी का रुख

कर्नाटक में हुई क्रॉस-वोटिंग के संदर्भ में अग्रवाल ने कहा कि पार्टी यह समझने का प्रयास कर रही है कि किन परिस्थितियों में यह हुआ। उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ ऐसे लोग सामने आए हैं जिन्होंने 'संभवतः मतदान के दौरान अपेक्षित सतर्कता नहीं बरती।' एक चिकित्सकीय उपमा का प्रयोग करते हुए उन्होंने कहा कि इतने बड़े संगठन में कुछ अपवाद आ सकते हैं — जैसे एक स्वस्थ शरीर में कहीं फोड़ा-फुंसी हो जाए, तो इसका अर्थ यह नहीं कि पूरा शरीर बीमार है। उन्होंने कहा, 'फोड़े-फुंसी का इलाज किया जाता है और हम भी उसका इलाज कर लेंगे।'

'कसम खिलाने' की अटकलों पर स्पष्टीकरण

क्रॉस-वोटिंग को रोकने के लिए भाजपा विधायकों को कसम खिलाने की चर्चाओं पर अग्रवाल ने कहा कि उनकी जानकारी में ऐसी कोई बात नहीं है। उन्होंने बताया कि धर्मस्थल से जुड़े भाजपा के राज्यसभा सांसद वीरेंद्र हेगड़े के यहाँ यदि कोई बैठक प्रस्तावित है, तो वह एक सामान्य राजनीतिक बैठक हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया, 'कसम खिलाने जैसी कोई बात नहीं हो सकती।'

पश्चिम बंगाल और TMC पर निशाना

पश्चिम बंगाल की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए अग्रवाल ने दावा किया कि राज्य में जनता ने लोकतांत्रिक तरीके से अपना गुस्सा व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और गृह मंत्री अमित शाह की रणनीतियों के कारण पार्टी को मज़बूती मिली है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) छोड़कर अन्य दलों में जा रहे नेताओं के बारे में उन्होंने कहा कि इसके लिए भाजपा जिम्मेदार नहीं है — पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को TMC के भीतर 'घुटन' महसूस हो रही थी। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आलोचना करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि जनता उनके कथित अहंकार, तुष्टिकरण की राजनीति और तानाशाही प्रवृत्ति से परेशान हो चुकी थी।

कांग्रेस और NEET विवाद पर प्रहार

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा कथित तौर पर अपने ही कार्यकर्ताओं को 'यूजलेस फेलोज' कहे जाने पर अग्रवाल ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा अपने ही कार्यकर्ताओं के लिए ऐसे शब्दों का प्रयोग करना कांग्रेस के भीतर चल रहे असंतोष और अंतर्विरोध को दर्शाता है। भाजपा नेता ने दावा किया कि कर्नाटक कांग्रेस में सिद्धारमैया, डीके शिवकुमार और खड़गे खेमे के बीच प्रतिस्पर्धा जारी है, जिसका असर अब सार्वजनिक रूप से दिखाई देने लगा है। NEET परीक्षा के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए अपने कार्यक्रम में बदलाव किया, जबकि कांग्रेस पर आरोप लगाया कि परीक्षा से कुछ दिन पहले आयोजित राजनीतिक कार्यक्रमों के कारण छात्रों का बहुमूल्य समय प्रभावित हुआ। आने वाले दिनों में अग्रवाल स्वयं बेंगलुरु जाकर संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा करेंगे, जहाँ तीन एमएलसी चुनावों की तैयारी भी एजेंडे पर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन क्रॉस-वोटिंग की घटना और उसके तुरंत बाद बुलाई गई बैठक का समय-संयोग इस व्याख्या को कमज़ोर करता है। 'फोड़े-फुंसी' की उपमा भले ही आश्वस्त करने वाली लगे, पर यह सवाल अनुत्तरित रहता है कि इतने बड़े संगठन में अनुशासन की निगरानी के तंत्र कहाँ चूके। कांग्रेस पर खड़गे के बयान को लेकर किया गया हमला राजनीतिक रूप से सुविधाजनक है, लेकिन यह कर्नाटक में भाजपा की अपनी एकजुटता की चुनौती से ध्यान भटकाने का प्रयास भी दिखता है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भाजपा की कर्नाटक चिंतन बैठक क्यों बुलाई गई?
कर्नाटक में हाल ही में हुई क्रॉस-वोटिंग और उससे जुड़े राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद भाजपा ने राज्य नेतृत्व और संगठन से जुड़े नेताओं की यह बैठक बुलाई। पार्टी प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल के अनुसार, यह पार्टी की नियमित चुनाव-पश्चात समीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा है।
कर्नाटक में क्रॉस-वोटिंग पर भाजपा का क्या रुख है?
भाजपा प्रभारी अग्रवाल ने कहा कि पार्टी यह समझने का प्रयास कर रही है कि किन परिस्थितियों में क्रॉस-वोटिंग हुई। उन्होंने माना कि कुछ लोगों ने 'संभवतः मतदान के दौरान अपेक्षित सतर्कता नहीं बरती', लेकिन इसे पूरे संगठन की कमज़ोरी नहीं बताया।
क्या भाजपा विधायकों को कसम खिलाई जाएगी?
अग्रवाल ने इन अटकलों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी में ऐसी कोई बात नहीं है और 'कसम खिलाने जैसी कोई बात नहीं हो सकती।' वीरेंद्र हेगड़े के यहाँ प्रस्तावित बैठक को उन्होंने सामान्य राजनीतिक बैठक बताया।
कांग्रेस के 'यूजलेस फेलोज' विवाद पर भाजपा ने क्या कहा?
अग्रवाल ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कथित बयान को पार्टी के भीतर असंतोष और अंतर्विरोध का प्रमाण बताया। उन्होंने दावा किया कि कर्नाटक कांग्रेस में सिद्धारमैया, डीके शिवकुमार और खड़गे खेमे के बीच प्रतिस्पर्धा का असर अब सार्वजनिक रूप से दिखने लगा है।
कर्नाटक में आगे कौन से चुनाव होने वाले हैं?
राज्य में जल्द तीन एमएलसी चुनाव होने हैं, जिनमें शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र भी शामिल हैं। इन चुनावों की तैयारी पर भी चर्चा हुई और अग्रवाल स्वयं शीघ्र बेंगलुरु जाकर संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा करेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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