15 अगस्त 2026
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चमोली भूस्खलन: बिरही-निजमुला मार्ग पर 108 एंबुलेंस मलबे में फंसी, मरीज सुरक्षित बचाई गई

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चमोली भूस्खलन: बिरही-निजमुला मार्ग पर 108 एंबुलेंस मलबे में फंसी, मरीज सुरक्षित बचाई गई

सारांश

उत्तराखंड के चमोली में मानसून का कहर जारी है — बिरही-निजमुला मार्ग पर भूस्खलन ने 108 एंबुलेंस को मलबे में दबा दिया। सजग स्टाफ ने मरीज को बचा लिया, लेकिन मार्ग बाधित है और काली चट्टान क्षेत्र में खतरा बना हुआ है।

मुख्य बातें

15 अगस्त 2026 को चमोली के बिरही-निजमुला मार्ग पर काली चट्टान के पास भूस्खलन से 108 एंबुलेंस मलबे में फंस गई।
एंबुलेंस निजमुला घाटी से एक बीमार महिला को जिला अस्पताल गोपेश्वर ले जा रही थी।
चालक और स्टाफ की सूझबूझ से मरीज को सुरक्षित बाहर निकाला गया — कोई जनहानि नहीं।
भारी मलबे से बिरही-निजमुला मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध, दोनों ओर वाहनों की कतार।
चमोली में हाल ही में पीपलकोटी सुरंग हादसे में 7 लोगों की मौत हो चुकी है; जिला लगातार आपदाओं से जूझ रहा है।

चमोली जिले के बिरही-निजमुला मोटर मार्ग पर काली चट्टान के निकट शनिवार, 15 अगस्त 2026 को अचानक हुए भूस्खलन में 108 आपातकालीन एंबुलेंस मलबे के बीच फंस गई। एंबुलेंस निजमुला घाटी से एक बीमार महिला को जिला अस्पताल गोपेश्वर ले जा रही थी। सतर्क चालक और स्टाफ ने समय रहते मरीज को वाहन से बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया — इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई।

मुख्य घटनाक्रम

जानकारी के अनुसार, काली चट्टान क्षेत्र में पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और पत्थर अचानक सड़क पर आ गिरे। एंबुलेंस चालक ने खतरा भाँपते ही वाहन रोका और स्टाफ के साथ मिलकर मरीज महिला को सुरक्षित बाहर निकाला। भूस्खलन इतना तीव्र था कि एंबुलेंस मलबे में दब गई और मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया।

यातायात पर असर

बिरही-निजमुला मार्ग पर भारी मलबा और पत्थर आने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मार्ग शीघ्र साफ कर यातायात सुचारु कराने की माँग की है। लगातार हो रही बारिश के कारण काली चट्टान क्षेत्र में भूस्खलन का खतरा अभी भी बना हुआ है, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों में चिंता व्याप्त है।

चमोली में आपदाओं का सिलसिला

यह ऐसे समय में आया है जब चमोली जिला पहले ही एक बड़े हादसे से उबर रहा है। हाल ही में जिले में एक निर्माणाधीन सुरंग में हुई दुर्घटना में 7 लोगों की मौत हो गई थी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं पीपलकोटी सुरंग हादसे की जगह का निरीक्षण करने पहुँचे थे और राहत-बचाव कार्यों का जायजा लिया था। चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने बताया था कि गुरुवार शाम लगभग 6.30 बजे निर्माण कार्य के दौरान बड़ी मात्रा में पानी और मलबा सुरंग के भीतर घुस गया था।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

गौरतलब है कि उत्तराखंड का चमोली जिला भूगर्भीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है। मानसून के दौरान यहाँ बार-बार भूस्खलन की घटनाएँ होती हैं, जिससे आपातकालीन सेवाओं पर दबाव बढ़ जाता है। आलोचकों का कहना है कि पहाड़ी मार्गों पर भूस्खलन-रोधी उपायों और पूर्व चेतावनी प्रणाली को और मज़बूत किए जाने की ज़रूरत है।

क्या होगा आगे

स्थानीय प्रशासन मार्ग से मलबा हटाने के प्रयासों में जुटा है। मानसून की सक्रियता को देखते हुए काली चट्टान क्षेत्र में आवाजाही को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। अधिकारियों से मार्ग की बहाली की समयसीमा की पुष्टि की प्रतीक्षा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

प्रशासनिक तैयारी पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चमोली के बिरही-निजमुला मार्ग पर क्या हुआ?
15 अगस्त 2026 को काली चट्टान के पास पहाड़ी से अचानक भारी मलबा और पत्थर गिरने से 108 आपातकालीन एंबुलेंस सड़क पर फंस गई। एंबुलेंस एक बीमार महिला को जिला अस्पताल गोपेश्वर ले जा रही थी और भूस्खलन के कारण मार्ग पूरी तरह बाधित हो गया।
क्या एंबुलेंस में सवार मरीज सुरक्षित है?
हाँ, एंबुलेंस चालक और स्टाफ ने समय रहते खतरा भाँपकर मरीज महिला को वाहन से बाहर निकाल लिया और सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया। इस घटना में किसी की जान नहीं गई।
बिरही-निजमुला मार्ग कब तक खुलेगा?
स्थानीय प्रशासन मलबा हटाने के कार्य में जुटा है, लेकिन मार्ग बहाली की सटीक समयसीमा की अभी पुष्टि नहीं हुई है। लगातार बारिश के कारण काली चट्टान क्षेत्र में भूस्खलन का खतरा बना हुआ है, जिससे कार्य में बाधा आ सकती है।
चमोली में हाल ही में और कौन-सी बड़ी आपदा आई थी?
हाल ही में चमोली जिले में पीपलकोटी सुरंग हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई थी। जिलाधिकारी गौरव कुमार के अनुसार गुरुवार शाम लगभग 6.30 बजे निर्माण कार्य के दौरान बड़ी मात्रा में पानी और मलबा सुरंग के भीतर घुस गया था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं हादसास्थल का निरीक्षण करने पहुँचे थे।
चमोली में भूस्खलन इतने क्यों होते हैं?
चमोली जिला भूगर्भीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है और मानसून के दौरान यहाँ बार-बार भूस्खलन की घटनाएँ होती हैं। लगातार बारिश से पहाड़ी ढलानें कमज़ोर हो जाती हैं, जिससे काली चट्टान जैसे क्षेत्रों में मलबा और पत्थर गिरने का खतरा बना रहता है।
राष्ट्र प्रेस
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