एस. जानकी के निधन पर CM चंद्रबाबू नायडू ने दी श्रद्धांजलि, 'दक्षिण की नाइटिंगेल' को याद किया
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने प्रख्यात प्लेबैक गायिका एस. जानकी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया, जिनका शनिवार, 12 जुलाई को निधन हो गया। 'दक्षिण भारत की नाइटिंगेल' के नाम से विख्यात एस. जानकी ने छह दशकों से अधिक लंबे करियर में 48,000 से अधिक गाने गाकर भारतीय फिल्म संगीत में अमिट स्थान बनाया।
मुख्यमंत्री की श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री नायडू ने अमरावती स्थित कैंप ऑफिस में एस. जानकी की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी। उन्होंने भारतीय संगीत जगत में उनके असाधारण योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि तेलुगु धरती पर जन्मी इस महान गायिका ने अपनी बेमिसाल आवाज से लाखों संगीत प्रेमियों के दिलों को छुआ। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उनके गाए गीत आने वाली पीढ़ियों तक श्रोताओं के दिलों में जीवित रहेंगे। उन्होंने एस. जानकी के परिजनों और प्रशंसकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
मंत्री नारा लोकेश की प्रतिक्रिया
आंध्र प्रदेश सरकार के मंत्री नारा लोकेश ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर एस. जानकी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने लिखा, 'दक्षिण भारत की नाइटिंगेल के तौर पर मशहूर एस. जानकी गारू ने 48,000 से ज़्यादा गाने गाए और संगीत प्रेमियों के दिलों में अपनी अमिट छाप छोड़ी।' नारा लोकेश ने उनके जाने को फिल्म इंडस्ट्री के लिए 'अपूरणीय क्षति' बताया और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
मंत्री किंजरापु अचन्नाइडु का शोक संदेश
आंध्र प्रदेश सरकार के मंत्री किंजरापु अचन्नाइडु ने भी एक्स पर पोस्ट कर कहा कि 'भारतीय फिल्मी संगीत की दुनिया में एक असाधारण युग का अंत हो गया है।' उन्होंने एस. जानकी को उनके जन्मनाम 'जानकम्मा' से याद करते हुए कहा कि वे भारतीय फिल्मी संगीत के इतिहास में एक ध्रुव तारे की तरह हैं। उन्होंने तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री और समूचे संगीत जगत के लिए इस क्षति को अपूरणीय बताया।
एस. जानकी की संगीत विरासत
तेलुगु धरती पर जन्मी एस. जानकी ने तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मलयालम, हिंदी सहित अनेक भाषाओं में गाने गाए। पाँच दशकों से अधिक के करियर में उन्होंने 48,000 से अधिक गीत रिकॉर्ड किए, जो उन्हें भारतीय संगीत इतिहास की सबसे विपुल गायिकाओं में से एक बनाता है। उनकी सुरीली आवाज और भावपूर्ण अभिव्यक्ति ने उन्हें पीढ़ियों के संगीत प्रेमियों का प्रिय बनाया। उनके जाने से भारतीय शास्त्रीय और फिल्मी संगीत की एक गौरवशाली परंपरा का एक अध्याय बंद हो गया है।
उनके निधन से उपजा शोक केवल तेलुगु भाषी क्षेत्रों तक सीमित नहीं है — समूचे दक्षिण भारत और हिंदी फिल्म संगीत के प्रशंसक भी इस अपूरणीय क्षति से व्यथित हैं। संगीत जगत उनकी स्वर-विरासत को सदैव संजोए रखेगा।