2 नवंबर 2026
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चीता KNG-22 की हत्या: श्योपुर में दो भाई गिरफ्तार, मुरैना जंगल से लाइसेंसी बंदूक बरामद

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चीता KNG-22 की हत्या: श्योपुर में दो भाई गिरफ्तार, मुरैना जंगल से लाइसेंसी बंदूक बरामद

सारांश

मध्य प्रदेश के श्योपुर में 19 महीने के नर चीते KNG-22 को लाइसेंसी बंदूक से मार डाला गया। एसटीएफ ने दो भाइयों को गिरफ्तार कर हथियार बरामद किया। यह घटना प्रोजेक्ट चीता के तहत संरक्षित क्षेत्र से बाहर विचरण करने वाले चीतों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाती है।

मुख्य बातें

भगवान सिंह और प्रीतम सिंह को चीता KNG-22 की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया; भगवान सिंह को 31 अक्टूबर को हिरासत में लिया गया।
घटना 24 अक्टूबर को श्योपुर जिले के विजयपुर के नितनवास गाँव के पास हुई; चीता 25 अक्टूबर को घायल मिला।
आपातकालीन सर्जरी में चीते के शरीर से बंदूक के 5 छर्रे निकाले गए; 27 अक्टूबर को उसकी मृत्यु हो गई।
लाइसेंसी डबल-बैरल मजल-लोडिंग बंदूक मुरैना जिले के जंगल से बरामद।
दोनों आरोपियों पर वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत मामला दर्ज; किसी संगठित अपराध गिरोह की संलिप्तता नहीं पाई गई।
केंद्र सरकार ने NTCA और WCCB के अधिकारियों सहित तीन सदस्यीय जाँच टीम तैनात की।

वन विभाग की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने 2 नवंबर 2026 को बताया कि मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में 19 महीने के नर चीते KNG-22 को गोली मारने के आरोप में दो भाइयों को गिरफ्तार किया गया है। घटना में इस्तेमाल की गई लाइसेंसी डबल-बैरल मजल-लोडिंग बंदूक को मुरैना जिले के जंगल से बरामद कर लिया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

आरोपियों की पहचान भगवान सिंह और प्रीतम सिंह के रूप में हुई है, जो मुरैना जिले के नवलपुरा-बेहरा गाँव के रहने वाले हैं। एसटीएफ के अनुसार, भगवान सिंह को पहले 31 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था।

पूछताछ में भगवान सिंह ने बताया कि वह और उसका भाई 24 अक्टूबर को विजयपुर के नितनवास गाँव के पास जंगल में शिकार के लिए गए थे। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, 'इलाके में चीते को देखकर उसने अपनी लाइसेंसी बंदूक से उस पर गोली चलाई और मौके से भाग गया।'

भगवान सिंह से मिली सूचना के आधार पर एसटीएफ ने मुरैना पुलिस की सहायता से प्रीतम सिंह को भी हिरासत में लिया। दोनों आरोपियों को घटनास्थल पर पहचान के लिए ले जाया गया, जहाँ बंदूक भी बरामद हुई।

चीते की चोट और मौत

चीता KNG-22 25 अक्टूबर को श्योपुर के वन कंपार्टमेंट नंबर 748 में गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिला था। उसे पहले कूनो नेशनल पार्क और फिर बेहतर उपचार के लिए जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय भेजा गया।

आपातकालीन सर्जरी के दौरान पशु चिकित्सकों ने चीते के शरीर से बंदूक के पाँच छर्रे निकाले। चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद 27 अक्टूबर को चीते की मृत्यु हो गई।

गौरतलब है कि KNG-22 का जन्म कूनो नेशनल पार्क में मादा चीता 'निर्वा' से हुआ था, और वह प्रोजेक्ट चीता के तहत भारत में पैदा हुई पीढ़ी का हिस्सा था।

जाँच टीम और कार्रवाई

मध्य प्रदेश सरकार ने घटना की जाँच के लिए वन विभाग और पुलिस अधिकारियों की चार सदस्यीय टीम गठित की थी। इस टीम ने मुखबिरों का नेटवर्क तैयार किया और डॉग स्क्वॉड की मदद से तलाशी अभियान चलाया।

केंद्र सरकार ने भी घटना की परिस्थितियों की जाँच और प्रोजेक्ट चीता के तहत सुरक्षा उपायों की समीक्षा के लिए तीन सदस्यीय टीम तैनात की, जिसमें नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) और वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB) के अधिकारी शामिल थे।

दोनों आरोपियों के विरुद्ध वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत मामला दर्ज किया गया है। एसटीएफ ने स्पष्ट किया है कि 'अब तक की जाँच में इस मामले में किसी भी तरह के व्यावसायिक अवैध वन्यजीव व्यापार या संगठित वन्यजीव अपराध गिरोह की संलिप्तता नहीं पाई गई है।'

प्रोजेक्ट चीता पर प्रभाव

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब प्रोजेक्ट चीता को नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीतों के प्रबंधन को लेकर पहले से ही कड़ी निगरानी का सामना करना पड़ रहा है। कूनो नेशनल पार्क के संरक्षित क्षेत्र से बाहर विचरण करने वाले चीतों की सुरक्षा को लेकर विशेषज्ञों की चिंताएँ इस घटना के बाद और गहरी हो गई हैं।

यह KNG-22 की मौत परियोजना के शुरू होने के बाद चीतों की एक लंबी श्रृंखला में एक और दुखद अध्याय है, और संरक्षण नीति निर्माताओं के सामने बफर ज़ोन प्रबंधन की चुनौती को और तीव्र करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो उसकी सुरक्षा अनिवार्यतः शून्य हो जाती है। यह पहली ऐसी मौत नहीं है जो पार्क की सीमाओं के बाहर हुई हो, लेकिन यह पहली है जहाँ एक स्थानीय शिकारी की लाइसेंसी बंदूक ने भारत में जन्मी पीढ़ी के एक सदस्य की जान ली। सरकार को जाँच के साथ-साथ यह भी स्पष्ट करना होगा कि बफर ज़ोन विस्तार और सामुदायिक संवेदनशीलता अभियानों की योजना क्या है।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चीता KNG-22 कौन था और उसकी मौत कैसे हुई?
KNG-22 एक 19 महीने का नर चीता था, जिसका जन्म कूनो नेशनल पार्क में मादा चीता 'निर्वा' से हुआ था। 24 अक्टूबर को श्योपुर जिले में शिकार के दौरान उसे लाइसेंसी बंदूक से गोली मारी गई और 27 अक्टूबर को उपचार के बावजूद उसकी मृत्यु हो गई।
गिरफ्तार किए गए आरोपी कौन हैं?
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान भगवान सिंह और प्रीतम सिंह के रूप में हुई है, जो मुरैना जिले के नवलपुरा-बेहरा गाँव के रहने वाले हैं। भगवान सिंह को 31 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था और उसकी सूचना पर उसके भाई को भी हिरासत में लिया गया।
क्या यह कोई संगठित वन्यजीव तस्करी का मामला है?
एसटीएफ ने स्पष्ट किया है कि अब तक की जाँच में इस मामले में किसी व्यावसायिक अवैध वन्यजीव व्यापार या संगठित अपराध गिरोह की संलिप्तता नहीं पाई गई है। जाँच अभी जारी है।
इस मामले में क्या कानूनी कार्रवाई हुई है?
दोनों आरोपियों के विरुद्ध वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत मामला दर्ज किया गया है। केंद्र सरकार ने NTCA और WCCB के अधिकारियों सहित तीन सदस्यीय जाँच टीम भी तैनात की है।
इस घटना का प्रोजेक्ट चीता पर क्या असर पड़ेगा?
यह घटना कूनो नेशनल पार्क के संरक्षित क्षेत्र से बाहर जाने वाले चीतों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएँ उत्पन्न करती है। केंद्र और राज्य सरकार दोनों ने सुरक्षा उपायों की समीक्षा शुरू की है।
राष्ट्र प्रेस
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