20 अगस्त 2026
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धनुष-बाण चिह्न फ्रीज़ करने की मांग पर शंभूराज देसाई का पलटवार — 'बालासाहेब की विचारधारा का अपमान'

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धनुष-बाण चिह्न फ्रीज़ करने की मांग पर शंभूराज देसाई का पलटवार — 'बालासाहेब की विचारधारा का अपमान'

सारांश

शिवसेना के धनुष-बाण चिह्न पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद यूबीटी नेता अरविंद सावंत की 'चिह्न फ्रीज़ करो' मांग ने नई सियासी आग भड़का दी। महाराष्ट्र मंत्री शंभूराज देसाई ने इसे बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा और हिंदुत्व का अपमान करार देते हुए कड़ा पलटवार किया।

मुख्य बातें

शंभूराज देसाई ने 20 अगस्त को शिवसेना (यूबीटी) नेता अरविंद सावंत के धनुष-बाण चिह्न फ्रीज़ करने के बयान की कड़ी निंदा की।
देसाई के अनुसार धनुष-बाण चिह्न को फ्रीज़ करने की मांग अप्रत्यक्ष रूप से बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा और हिंदुत्व को फ्रीज़ करने के समान है।
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कोर्ट में तर्क दिया कि दोनों गुटों के मुखिया उद्धव ठाकरे हैं; देसाई ने कहा पार्टी वकील अपना पक्ष रखेंगे।
चुनाव आयोग ने विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत शिंदे गुट को धनुष-बाण चिह्न और शिवसेना का नाम दिया है, जिसे यूबीटी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
शिवसेना विभाजन के बाद से चुनाव चिह्न और पार्टी नाम को लेकर दोनों गुटों के बीच कानूनी लड़ाई जारी है।

महाराष्ट्र सरकार के मंत्री शंभूराज देसाई ने 20 अगस्त को शिवसेना (यूबीटी) नेता अरविंद सावंत के उस बयान की कड़ी निंदा की, जिसमें सावंत ने धनुष-बाण चुनाव चिह्न को फ्रीज़ करने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट में शिवसेना के चुनाव चिह्न को लेकर चल रही सुनवाई के बाद यह विवाद और गहरा गया। देसाई ने इसे शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा और हिंदुत्व का सीधा अपमान करार दिया।

मुख्य घटनाक्रम

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद पत्रकारों से बात करते हुए शंभूराज देसाई ने कहा, 'आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद (यूबीटी) नेता अरविंद सावंत बाहर आए और कहा कि अगर शिवसेना (यूबीटी) को धनुष-बाण चिह्न नहीं मिलता तो इस चिह्न को फ्रीज़ या सीज़ कर देना चाहिए।' उन्होंने आगे कहा कि यह बयान सुनकर महाराष्ट्र और देशभर के शिवसैनिक हैरान रह गए हैं।

बालासाहेब की विरासत का सवाल

देसाई ने स्पष्ट किया कि धनुष-बाण महज एक चुनावी प्रतीक नहीं, बल्कि वह चिह्न है जिसे बालासाहेब ठाकरे अपने पूजा स्थल पर भगवान की भाँति पूजते थे। उनके अनुसार, इस चिह्न को फ्रीज़ करने की मांग करके अरविंद सावंत ने अप्रत्यक्ष रूप से बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा और हिंदुत्व को भी फ्रीज़ करने की बात कह दी है।

कपिल सिब्बल के दावे पर प्रतिक्रिया

कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि दोनों शिवसेना गुटों के मुखिया उद्धव ठाकरे ही हैं। इस पर शंभूराज देसाई ने कहा कि उन्होंने यह बयान स्वयं नहीं सुना है और जब पार्टी की बारी आएगी, तब उनके वकील सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पार्टी का पक्ष रखेंगे।

संविधान और चुनाव आयोग का हवाला

आदित्य ठाकरे द्वारा यह सवाल उठाए जाने पर कि चिह्न चुराकर कोई मान्यता नहीं बन सकती, देसाई ने जवाब दिया कि उनकी पार्टी देश के संविधान में विश्वास रखते हुए काम करती है। उन्होंने याद दिलाया कि चुनाव आयोग ने विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत उनके गुट को धनुष-बाण चिह्न और शिवसेना का नाम सौंपा है।

विवाद की पृष्ठभूमि

शिवसेना में विभाजन के बाद से धनुष-बाण चिह्न और पार्टी के नाम को लेकर दोनों गुटों के बीच कानूनी लड़ाई जारी है। चुनाव आयोग ने एकनाथ शिंदे गुट को असली शिवसेना मानते हुए चिह्न और नाम सौंपा था, जिसे शिवसेना (यूबीटी) ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। यह मामला भारतीय राजनीति में दल-विभाजन और चुनाव चिह्न के अधिकार से जुड़े सबसे चर्चित कानूनी संघर्षों में से एक बन चुका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि यह उसी प्रतीक को नकारता है जिसे वह अपना बताता है। शिंदे गुट इस बयान को वैचारिक हथियार की तरह इस्तेमाल करेगा — और बालासाहेब की विरासत के रक्षक की छवि को और मज़बूत करेगा। सुप्रीम कोर्ट का फैसला चाहे जो हो, असली चुनावी युद्ध महाराष्ट्र के शिवसैनिकों की भावनाओं पर लड़ा जाएगा।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अरविंद सावंत ने धनुष-बाण चिह्न फ्रीज़ करने की मांग क्यों की?
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद शिवसेना (यूबीटी) नेता अरविंद सावंत ने कहा कि यदि उनके गुट को धनुष-बाण चिह्न नहीं मिलता तो इस चिह्न को फ्रीज़ या सीज़ कर देना चाहिए। यह बयान चुनाव चिह्न पर चल रहे कानूनी विवाद के बीच आया है।
शंभूराज देसाई ने इस बयान को बालासाहेब ठाकरे का अपमान क्यों कहा?
महाराष्ट्र मंत्री शंभूराज देसाई का कहना है कि धनुष-बाण वह प्रतीक है जिसे बालासाहेब ठाकरे अपने पूजा स्थल पर भगवान की भाँति पूजते थे। इसलिए चिह्न फ्रीज़ करने की मांग अप्रत्यक्ष रूप से बालासाहेब की विचारधारा और हिंदुत्व को फ्रीज़ करने के समान है।
शिवसेना के चुनाव चिह्न विवाद में सुप्रीम कोर्ट की क्या भूमिका है?
चुनाव आयोग द्वारा शिंदे गुट को धनुष-बाण चिह्न और शिवसेना का नाम दिए जाने के बाद शिवसेना (यूबीटी) ने सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई कर रहा है और दोनों पक्षों के वकील अपने-अपने तर्क प्रस्तुत कर रहे हैं।
कपिल सिब्बल ने कोर्ट में क्या तर्क दिया?
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया कि दोनों शिवसेना गुटों के मुखिया उद्धव ठाकरे ही हैं। शंभूराज देसाई ने कहा कि उन्होंने यह बयान सीधे नहीं सुना और जब उनकी पार्टी की बारी आएगी तो वकील पूरा पक्ष रखेंगे।
शिवसेना में विभाजन के बाद चुनाव चिह्न का विवाद कैसे शुरू हुआ?
शिवसेना में विभाजन के बाद चुनाव आयोग ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को असली शिवसेना मानते हुए धनुष-बाण चिह्न और पार्टी का नाम सौंपा। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, और तब से यह कानूनी लड़ाई जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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