18 सितंबर 2026
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नामपल्ली कोर्ट ने बीआरएस नेता कृष्णंक की रिमांड याचिका खारिज की, सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का दिया हवाला

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नामपल्ली कोर्ट ने बीआरएस नेता कृष्णंक की रिमांड याचिका खारिज की, सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का दिया हवाला

सारांश

सोशल मीडिया पर एक सवाल पूछना इतना महंगा पड़ा कि 100 पुलिसकर्मी दरवाजा तोड़कर घर में घुस गए — लेकिन अदालत ने घंटों में ही रिमांड याचिका खारिज कर दी। तेलंगाना में बीआरएस और कांग्रेस के बीच टकराव का नया मोर्चा खुल गया है।

मुख्य बातें

नामपल्ली अदालत ने 18 सितंबर 2026 को बीआरएस नेता मन्ने कृष्णंक की पुलिस रिमांड याचिका खारिज की।
कोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए रिमांड देने से इनकार किया।
पुलिस ने सुबह 5 बजे लोहे की ग्रिल का ताला तोड़कर कृष्णंक के घर में प्रवेश कर उन्हें गिरफ्तार किया था।
गिरफ्तारी 14 सितंबर की सैफबाद पुलिस स्टेशन घटना से जुड़ी एक सोशल मीडिया पोस्ट पर दर्ज मामले में हुई।
बीआरएस कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव ने एक्स पर पोस्ट कर राहुल गांधी से सवाल किया और गिरफ्तारी को लोकतंत्र विरोधी बताया।

हैदराबाद की नामपल्ली अदालत ने 18 सितंबर 2026 को भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के सोशल मीडिया कन्वीनर मन्ने कृष्णंक की पुलिस रिमांड की माँग को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए रिमांड याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती। यह फैसला उसी दिन आया जब पुलिस ने सुबह 5 बजे उनके घर का लोहे की ग्रिल का ताला तोड़कर उन्हें गिरफ्तार किया था।

गिरफ्तारी का घटनाक्रम

पुलिस सुबह से ही बड़ी संख्या में कृष्णंक के आवास के बाहर तैनात थी। जब कृष्णंक ने खुद को घर के अंदर बंद कर लिया, तो अधिकारियों ने उनसे बाहर आने की कई बार अपील की। अपील के बाद भी दरवाजा नहीं खुला, तो पुलिस ने लोहे की ग्रिल का ताला तोड़कर घर में प्रवेश किया और उन्हें हिरासत में ले लिया।

कृष्णंक ने बाद में कहा, 'सिर्फ इसलिए कि मैंने ट्वीट करके पूछा कि सैफबाद पुलिस स्टेशन में मास्क पहनकर कौन घुसा था, उन्हें 100 पुलिसकर्मियों के साथ आने की क्या जरूरत थी? क्या मैं कोई अपराधी हूँ? क्या मैं कहीं भागने की कोशिश कर रहा हूँ?' उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस की रेड के कारण उनका 7 साल का बच्चा अपनी परीक्षा में नहीं जा सका और वह डर के मारे घर पर ही बैठा रहा।

गिरफ्तारी की वजह

कृष्णंक पर एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर मामला दर्ज किया गया था। यह पोस्ट 14 सितंबर की उस कथित घटना के बारे में थी, जिसमें सैफबाद पुलिस स्टेशन में बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव के निजी सहायक और पब्लिक रिलेशंस ऑफिसर पर हमला किया गया था। कृष्णंक ने उस पोस्ट में यह सवाल उठाया था कि पुलिस स्टेशन में मास्क पहनकर कौन लोग घुसे थे।

गौरतलब है कि कृष्णंक का आरोप है कि उनके खिलाफ पहले भी कई मामले दर्ज किए जा चुके हैं और उन्हें दो बार जेल भेजा गया है। उन्होंने कहा, 'चाहे वे कितने भी गैर-कानूनी मामले दर्ज करें या मुझे कितना भी डराएँ-धमकाएँ, मेरा उनसे सवाल पूछना बंद करने का कोई इरादा नहीं है।'

केटी रामा राव की तीखी प्रतिक्रिया

बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर इस गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की और कांग्रेस नेता राहुल गांधी से सवाल किया। उन्होंने लिखा, 'राहुल गांधी, आप संविधान की एक कॉपी साथ रखते हैं और उपदेश देते हैं। आप कहते हैं कि आपकी राजनीति 'मोहब्बत की दुकान' के बारे में है। आप बोलने की आजादी की बात करते हैं। लेकिन तेलंगाना में आपकी सरकार ठीक इसके उलट काम कर रही है।'

रामा राव ने आरोप लगाया कि सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद, जिनमें सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर गिरफ्तारी न करने का निर्देश है, तेलंगाना की कांग्रेस सरकार लोकतांत्रिक सिद्धांतों का उल्लंघन कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि गिरफ्तारी के दौरान कृष्णंक की बेटी बुरी तरह रो रही थी।

अदालत का फैसला और आगे की राह

नामपल्ली अदालत ने कृष्णंक को न्यायिक हिरासत में भेजने से इनकार करते हुए पुलिस की रिमांड याचिका खारिज कर दी। अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का स्पष्ट उल्लेख किया। यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पुलिस कार्रवाई की सीमाओं को लेकर तेलंगाना में बढ़ते राजनीतिक तनाव को उजागर करता है। आने वाले दिनों में इस मामले की अदालती सुनवाई और बीआरएस की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

पुलिस शक्ति के दुरुपयोग के गंभीर सवाल खड़े करती है। अदालत ने जो कुछ ही घंटों में तय किया, वह पुलिस को पहले ही पता होना चाहिए था। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है वह यह है कि तेलंगाना में यह पहली ऐसी घटना नहीं है — और जब तक जवाबदेही तय नहीं होती, ऐसी घटनाएँ दोहराई जाती रहेंगी।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बीआरएस नेता मन्ने कृष्णंक को किस कारण गिरफ्तार किया गया?
मन्ने कृष्णंक को एक सोशल मीडिया पोस्ट के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया, जिसमें उन्होंने 14 सितंबर को सैफबाद पुलिस स्टेशन में हुई कथित घटना पर सवाल उठाए थे। उस घटना में बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव के निजी सहायक और पब्लिक रिलेशंस ऑफिसर पर हमला किया गया था।
नामपल्ली कोर्ट ने रिमांड याचिका क्यों खारिज की?
नामपल्ली अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के उन दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए रिमांड याचिका खारिज की, जिनमें सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर गिरफ्तार व्यक्ति को हिरासत में रखने पर रोक लगाई गई है। अदालत ने कृष्णंक को न्यायिक हिरासत में भेजने से भी इनकार किया।
केटी रामा राव ने इस गिरफ्तारी पर क्या कहा?
बीआरएस कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव ने एक्स पर पोस्ट कर कांग्रेस नेता राहुल गांधी से सवाल किया कि क्या सरकार की आलोचना करना गुनाह है। उन्होंने आरोप लगाया कि तेलंगाना में कांग्रेस सरकार लोकतंत्र की हत्या कर रही है और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन कर रही है।
पुलिस ने कृष्णंक को किस तरह गिरफ्तार किया?
पुलिस सुबह 5 बजे कृष्णंक के घर पहुँची और जब वे दरवाजा नहीं खोले तो लोहे की ग्रिल का ताला तोड़कर घर में प्रवेश किया। इस दौरान कथित तौर पर उनका 7 साल का बच्चा डर के मारे परीक्षा में नहीं जा सका और उनकी बेटी रो रही थी।
इस मामले का तेलंगाना की राजनीति पर क्या असर होगा?
यह गिरफ्तारी और अदालत द्वारा रिमांड याचिका की त्वरित अस्वीकृति तेलंगाना में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी बीआरएस के बीच राजनीतिक तनाव को और गहरा कर सकती है। बीआरएस ने इसे विपक्ष को दबाने की कोशिश बताया है, जबकि मामले की आगे की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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