22 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

देहरादून: आर्मी कैडेट कॉलेज के 73 कैडेट्स को जेएनयू की बैचलर डिग्री, 127वें कोर्स का दीक्षांत समारोह संपन्न

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
देहरादून: आर्मी कैडेट कॉलेज के 73 कैडेट्स को जेएनयू की बैचलर डिग्री, 127वें कोर्स का दीक्षांत समारोह संपन्न

सारांश

देहरादून के चैटवुड हॉल में आर्मी कैडेट कॉलेज के 127वें कोर्स के 73 कैडेट्स ने तीन वर्षीय कठोर सैन्य और अकादमिक प्रशिक्षण पूरा कर जेएनयू की बैचलर डिग्री हासिल की। जुलाई 2026 में ये अधिकारी बनने की राह पर आईएमए में कदम रखेंगे।

मुख्य बातें

आर्मी कैडेट कॉलेज विंग के 127वें कोर्स के 73 कैडेट्स ने 6 जून 2026 को देहरादून में दीक्षांत समारोह में जेएनयू की बैचलर डिग्री प्राप्त की।
साइंस स्ट्रीम के 32 और ह्यूमैनिटीज़ स्ट्रीम के 42 कैडेट्स को डिग्री प्रदान की गई।
सीओएएस गोल्ड मेडल विंग कैडेट कैप्टन नवीन , सिल्वर मेडल अवनीश कुमार मिश्रा और ब्रॉन्ज़ मेडल हर्षराज को मिला।
नुब्रा कंपनी को समग्र श्रेष्ठ प्रदर्शन पर प्रतिष्ठित 'कमांडेंट बैनर' से सम्मानित किया गया।
सभी कैडेट्स जुलाई 2026 में इंडियन मिलिट्री एकेडमी में प्री-कमीशनिंग ट्रेनिंग के लिए शामिल होंगे।

देहरादून के चैटवुड हॉल में 6 जून 2026 को आयोजित भव्य दीक्षांत समारोह में आर्मी कैडेट कॉलेज (एसीसी) विंग के 127वें कोर्स के 73 कैडेट्स को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), नई दिल्ली की बैचलर डिग्री प्रदान की गई। इन कैडेट्स ने तीन वर्षीय कठोर अकादमिक एवं सैन्य प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण किया है और अब ये जुलाई 2026 में इंडियन मिलिट्री एकेडमी (आईएमए) में प्री-कमीशनिंग ट्रेनिंग के लिए ऑफिसर कैडेट्स के रूप में शामिल होंगे।

समारोह का मुख्य घटनाक्रम

आईएमए के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल नागेंद्र सिंह (एवीएसएम, वाईएसएम, एसएम) ने मुख्य अतिथि के रूप में साइंस स्ट्रीम के 32 और ह्यूमैनिटीज़ स्ट्रीम के 42 कैडेट्स को डिग्री प्रदान की। समारोह में कैडेट्स के अभिभावक, प्रशिक्षक एवं विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम में अनुशासन, भाईचारे और राष्ट्रसेवा की भावना स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई।

पुरस्कार एवं सम्मान

उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए कई कैडेट्स को विशेष सम्मान से नवाज़ा गया। चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (सीओएएस) गोल्ड मेडल विंग कैडेट कैप्टन नवीन को, सीओएएस सिल्वर मेडल कंपनी कैडेट कैप्टन अवनीश कुमार मिश्रा को और सीओएएस ब्रॉन्ज़ मेडल विंग कैडेट क्वार्टर मास्टर हर्षराज को प्रदान किया गया।

सर्विस सब्जेक्ट्स में प्रथम स्थान के लिए कमांडेंट का सिल्वर मेडल कंपनी क्वार्टर मास्टर सार्जेंट अमनप्रीत सिंह को दिया गया। ह्यूमैनिटीज़ स्ट्रीम में शीर्ष स्थान अवनीश कुमार मिश्रा ने और साइंस स्ट्रीम में विंग कैडेट कैप्टन नवीन ने प्राप्त किया।

नुब्रा कंपनी को 'कमांडेंट बैनर'

समारोह में नुब्रा कंपनी को आर्मी कैडेट कॉलेज की चैंपियन कंपनी घोषित कर प्रतिष्ठित 'कमांडेंट बैनर' से सम्मानित किया गया। यह सम्मान खेल, शारीरिक प्रशिक्षण, कैंप, वाद-विवाद, आंतरिक व्यवस्था, हथियार प्रशिक्षण, अकादमिक प्रदर्शन और सर्विस ट्रेनिंग सहित समग्र प्रतिस्पर्धाओं में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के आधार पर दिया जाता है।

कमांडेंट का संबोधन

दीक्षांत भाषण में लेफ्टिनेंट जनरल नागेंद्र सिंह ने कैडेट्स को इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर बधाई देते हुए कहा कि चरित्र, आत्म-अनुशासन, साहस, प्रेरणा, सकारात्मक सोच और पेशेवर क्षमता एक सफल सैन्य अधिकारी के प्रमुख स्तंभ हैं। उन्होंने एसीसी विंग के कमांडर ब्रिगेडियर पीयूष खुराना (एसएम) तथा समस्त प्रशिक्षक एवं फैकल्टी टीम की भी सराहना की।

आगे का रास्ता

गौरतलब है कि आर्मी कैडेट कॉलेज, इंडियन मिलिट्री एकेडमी के लिए एक प्रमुख फीडर संस्थान है, जहाँ कैडेट्स स्नातक शिक्षा के साथ-साथ कठोर सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। जुलाई 2026 में पासआउट होने वाले ये 73 कैडेट्स अब आईएमए में प्री-कमीशनिंग ट्रेनिंग पूरी कर भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त अधिकारी बनने की दिशा में अग्रसर होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारतीय सेना की उस दीर्घकालिक नीति का प्रमाण है जो अधिकारियों को शैक्षणिक और सैन्य दोनों मोर्चों पर एक साथ तैयार करती है। जेएनयू जैसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय की डिग्री के साथ सैन्य प्रशिक्षण का यह संयोजन 'सोल्जर-स्कॉलर' की अवधारणा को मज़बूत करता है। हालाँकि, यह भी विचारणीय है कि क्या तीन वर्षीय इस गहन पाठ्यक्रम में आधुनिक युद्धक्षेत्र की उभरती तकनीकी चुनौतियाँ — जैसे साइबर युद्ध, ड्रोन रणनीति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस — पर्याप्त रूप से शामिल हो रही हैं। भविष्य के अधिकारियों की गुणवत्ता ही सेना की रीढ़ है, और इस संस्थान की निरंतर प्रासंगिकता इसी पर निर्भर करती है।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आर्मी कैडेट कॉलेज (एसीसी) विंग क्या है?
आर्मी कैडेट कॉलेज देहरादून में स्थित भारतीय सेना का एक प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान है, जो इंडियन मिलिट्री एकेडमी के लिए फीडर संस्थान के रूप में कार्य करता है। यहाँ कैडेट्स को तीन वर्षों में स्नातक शिक्षा और कठोर सैन्य प्रशिक्षण एक साथ दिया जाता है, ताकि वे कमीशन प्राप्त अधिकारी बन सकें।
एसीसी के कैडेट्स को जेएनयू की डिग्री क्यों मिलती है?
आर्मी कैडेट कॉलेज का अकादमिक कार्यक्रम जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), नई दिल्ली से संबद्ध है। तीन वर्षीय पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा करने पर कैडेट्स को जेएनयू की मान्यता प्राप्त बैचलर डिग्री प्रदान की जाती है, जो उनकी शैक्षणिक योग्यता को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देती है।
127वें कोर्स के कैडेट्स आगे क्या करेंगे?
दीक्षांत समारोह के बाद ये 73 कैडेट्स जुलाई 2026 में इंडियन मिलिट्री एकेडमी (आईएमए), देहरादून में ऑफिसर कैडेट्स के रूप में प्री-कमीशनिंग ट्रेनिंग के लिए शामिल होंगे। इस प्रशिक्षण के बाद वे भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त अधिकारी बनेंगे।
इस बार के दीक्षांत समारोह में किन कैडेट्स को शीर्ष पुरस्कार मिले?
सीओएएस गोल्ड मेडल विंग कैडेट कैप्टन नवीन को, सीओएएस सिल्वर मेडल कंपनी कैडेट कैप्टन अवनीश कुमार मिश्रा को और सीओएएस ब्रॉन्ज़ मेडल विंग कैडेट क्वार्टर मास्टर हर्षराज को प्रदान किया गया। सर्विस सब्जेक्ट्स में प्रथम स्थान के लिए कमांडेंट का सिल्वर मेडल अमनप्रीत सिंह को दिया गया।
'कमांडेंट बैनर' किस आधार पर दिया जाता है?
'कमांडेंट बैनर' आर्मी कैडेट कॉलेज की उस कंपनी को दिया जाता है जो खेल, शारीरिक प्रशिक्षण, कैंप, वाद-विवाद, हथियार प्रशिक्षण, अकादमिक प्रदर्शन और सर्विस ट्रेनिंग सहित समग्र प्रतिस्पर्धाओं में सर्वश्रेष्ठ रहती है। इस बार यह सम्मान नुब्रा कंपनी को प्रदान किया गया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 1 साल पहले