देहरादून: ₹16 करोड़ का नवनिर्मित पुल 16 दिन में क्षतिग्रस्त, कांग्रेस ने CBI जांच की मांग उठाई
सारांश
मुख्य बातें
देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र में टोंस नदी पर नंदा की चौकी के समीप ₹16 करोड़ की लागत से निर्मित पुल की एप्रोच रोड 28 जुलाई 2026 को रातभर हुई भारी बारिश के कारण क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे उस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई। उद्घाटन के मात्र 16 दिनों के भीतर हुई इस क्षति ने निर्माण की गुणवत्ता और मानसून-प्रतिरोधी डिज़ाइन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
लगातार भारी वर्षा के कारण पुल की एप्रोच रोड के निकट एक बड़ा गड्ढा बन गया, जिससे दोनों ओर से वाहन फंस गए। यह पुल क्षेत्र के कई विद्यालयों और महाविद्यालयों के लिए प्रमुख संपर्क मार्ग है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन के दावों के विपरीत, वास्तविकता में आवागमन पूरी तरह बाधित है।
गौरतलब है कि टोंस नदी पर पहले से बने पाँच अन्य पुल लगभग 20 वर्षों से सुरक्षित बताए जाते हैं। ऐसे में नवनिर्मित संरचना का पहली ही मानसून वर्षा में क्षतिग्रस्त होना आलोचकों के लिए एक बड़ा सवाल बन गया है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
देहरादून के जिलाधिकारी आशीष चौहान ने स्पष्ट किया कि पुल की मुख्य संरचना को कोई नुकसान नहीं पहुँचा है। उन्होंने कहा, 'इस मामले में हमारा चौबीस घंटे, सात दिन का कंट्रोल रूम पहले ही सक्रिय कर दिया गया था और तुरंत अतिरिक्त टीमें तैनात कर दी गई थीं। पुल पूरी तरह सुरक्षित है। पुल तक जाने वाली सड़क को नुकसान पहुँचा है, जिसकी मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है। सभी मुख्य अभियंता और अन्य अधिकारी मौके पर मौजूद हैं।'
हालाँकि, स्थानीय निवासियों ने प्रशासन के इस बयान को अपर्याप्त बताया। उनका कहना है कि 'केवल किनारे का हिस्सा क्षतिग्रस्त' कहना वास्तविक स्थिति को कम करके आँकना है, जबकि पूरी आवाजाही ठप है।
कांग्रेस का विरोध और CBI जांच की मांग
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने संग्राम सिंह पुंडीर के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन किया। पुंडीर ने परियोजना निर्माण में 'गंभीर लापरवाहियों' का आरोप लगाते हुए कहा, 'यह पुल अभी हाल ही में बना था। लेकिन सिर्फ 16 दिनों के अंदर ही इसमें नुकसान हो गया। यह एक बड़ी लापरवाही है। पहले ऐसी घटनाओं के बाद संबंधित मंत्री नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे देते थे, लेकिन अब ऐसा देखने को नहीं मिलता।'
पुंडीर ने उत्तराखंड लोक निर्माण विभाग के मंत्री सतपाल महाराज पर निशाना साधते हुए ठेकेदार की पहचान और निर्माण की जवाबदेही पर सवाल उठाए। उन्होंने केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) से जाँच की माँग करते हुए कहा, '₹16 करोड़ की लागत से बना पुल सिर्फ 16 दिनों में क्षतिग्रस्त हो गया — यह बेहद चिंताजनक है।'
आम जनता पर असर
स्थानीय निवासियों ने बताया कि यह पुल क्षेत्र के स्कूलों, कॉलेजों और रोज़मर्रा के यातायात के लिए एकमात्र सुगम संपर्क मार्ग था। एप्रोच रोड के क्षतिग्रस्त होने से दोनों ओर भारी संख्या में लोग और वाहन फंसे रहे। एक स्थानीय निवासी ने कहा, 'जिस इंफ्रास्ट्रक्चर का उद्देश्य लोगों की सुविधा था, वह मलबे में बदल गया है।' निवासियों ने क्षेत्र के दोनों विधायकों और लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री सतपाल महाराज से जवाबदेही की माँग की।
क्या होगा आगे
जिला प्रशासन के अनुसार एप्रोच रोड की मरम्मत का काम प्रारंभ हो चुका है और वरिष्ठ अभियंता स्थल पर निगरानी कर रहे हैं। कांग्रेस ने ठेकेदार के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन जारी रखने की चेतावनी दी है। स्थानीय निवासियों ने भी आगाह किया है कि यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो क्षेत्र की जनता व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होगी। टोंस नदी पर बने शेष पाँच पुलों की स्थिति की भी जाँच की माँग उठ रही है।