टोंस नदी पुल की अप्रोच रोड ध्वस्त: उत्तराखंड सरकार ने PWD के 3 इंजीनियर सस्पेंड किए, डिज़ाइन कंसल्टेंट पर कार्रवाई के आदेश
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड सरकार ने 7 अगस्त 2026 को टोंस नदी पर निर्मित एक नए पुल की अप्रोच रोड क्षतिग्रस्त होने के मामले में लोक निर्माण विभाग (PWD) के तीन इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया और डिज़ाइन कंसल्टेंट के विरुद्ध फौरी कार्रवाई के निर्देश जारी किए। यह पुल पुराने देहरादून-पांवटा साहिब राष्ट्रीय राजमार्ग पर 'नंदा की चौकी' के निकट स्थित है।
क्षति का कारण और प्रारंभिक जाँच
प्रारंभिक जाँच रिपोर्ट के अनुसार, नदी के बहाव से हुए कटाव के कारण अप्रोच रोड के नीचे गड्ढा बन गया, जिसने सड़क को क्षतिग्रस्त कर दिया। जाँच में मुख्य दोषी डिज़ाइन कंसल्टेंट को ठहराया गया, जो नदी के बहाव को मोड़ने (रिवर डायवर्जन) का आवश्यक डिज़ाइन उपलब्ध कराने में विफल रहे। इसके अतिरिक्त, नदी के तल की ढलान और घुमावदार प्रकृति को देखते हुए जलधारा नियंत्रण के उपाय भी नहीं सुझाए गए, जिसके परिणामस्वरूप नदी का पूरा प्रवाह एक ही बिंदु पर केंद्रित हो गया और भारी कटाव हुआ।
सरकार की कार्रवाई
उत्तराखंड सरकार के सचिव पंकज कुमार पांडे ने 7 अगस्त 2026 को देहरादून में PWD के चीफ इंजीनियर को निर्देश जारी किए। क्षेत्रीय कार्यालय के चीफ इंजीनियर की प्रारंभिक जाँच रिपोर्ट के आधार पर उन्होंने डिज़ाइन कंसल्टेंट और प्रूफ-चेकिंग कंसल्टेंट दोनों की जवाबदेही तय करते हुए तत्काल कार्रवाई का आदेश दिया। साथ ही, जाँच रिपोर्ट में सुझाए गए सुरक्षा उपायों के आधार पर एक समयबद्ध एक्शन प्लान भी माँगा गया।
निलंबित इंजीनियर और आरोप
उसी दिन जारी कार्यालय आदेश में देहरादून PWD प्रांतीय प्रभाग के अधिशासी अभियंता राजेश कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। आदेश में कहा गया कि वे तकनीकी निगरानी, गुणवत्ता नियंत्रण, अनुबंध की शर्तों के अनुपालन और कर्तव्यों के उचित निर्वहन में विफल रहे। इसे घोर लापरवाही और गंभीर कर्तव्य-विमुखता बताया गया, जिससे सरकार की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँची और जनहित प्रभावित हुआ।
इसी प्रभाग के सहायक अभियंता अमित त्यागी और कनिष्ठ अभियंता नवीन गैरोला को भी इन्हीं आधारों पर निलंबित किया गया। इन दोनों पर तकनीकी निगरानी न करने, गुणवत्ता नियंत्रण लागू न करने और महत्वपूर्ण तकनीकी खामियों की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को न देने का आरोप है।
निलंबन की शर्तें
निलंबन अवधि के दौरान तीनों अधिकारी देहरादून स्थित PWD चीफ इंजीनियर कार्यालय से संलग्न रहेंगे। उन्हें नियमानुसार गुजारा भत्ता मिलता रहेगा, परंतु पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे।
आगे क्या होगा
डिज़ाइन और प्रूफ-चेकिंग कंसल्टेंट के विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब उत्तराखंड में मानसून के दौरान बुनियादी ढाँचे की गुणवत्ता पर सवाल उठना आम हो गया है। अब देखना यह होगा कि सरकार डिज़ाइन कंसल्टेंट पर कितनी त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करती है और क्षतिग्रस्त अप्रोच रोड को कब तक दुरुस्त किया जाता है।