27 जून 2026
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दिल्ली एयरपोर्ट पर आतंकवाद-रोधी मॉक ड्रिल: CISF समेत 183 कर्मियों ने लिया हिस्सा

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दिल्ली एयरपोर्ट पर आतंकवाद-रोधी मॉक ड्रिल: CISF समेत 183 कर्मियों ने लिया हिस्सा

सारांश

दिल्ली एयरपोर्ट पर आयोजित बहु-एजेंसी आतंकवाद-रोधी मॉक ड्रिल में CISF, NSG, दिल्ली पुलिस और DGCA सहित 183 कर्मियों ने भाग लिया। डिप्टी कमांडेंट पी.एस. राठौर और धर्मवीर साई के नेतृत्व में हुए इस अभ्यास ने एजेंसियों के बीच समन्वय और संकट प्रबंधन क्षमता को परखा।

मुख्य बातें

27 जून 2026 को बीएसएफ हैंगर, दिल्ली एयरपोर्ट पर व्यापक आतंकवाद-रोधी मॉक ड्रिल आयोजित की गई।
अभ्यास में CISF, NSG, दिल्ली पुलिस, BDDS, DGCA, दिल्ली अग्निशमन सेवा और मेदांता समेत कुल 183 कर्मियों ने भाग लिया।
संभावित आतंकवादी हमले के परिदृश्यों में त्वरित प्रतिक्रिया, घेराबंदी, बम निरोधक कार्रवाई और आपातकालीन चिकित्सा सहायता का परीक्षण किया गया।
ड्रिल का नेतृत्व डिप्टी कमांडेंट पी.एस.
राठौर और डिप्टी कमांडेंट धर्मवीर साई ने किया।
CISF ने एक्स पर पोस्ट कर एजेंसियों के बीच मजबूत तालमेल और सुरक्षा प्रोटोकॉल की सफल पुष्टि की जानकारी दी।

नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 27 जून 2026 को एक व्यापक बहु-एजेंसी आतंकवाद-रोधी मॉक ड्रिल आयोजित की गई, जिसमें केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के नेतृत्व में 183 कर्मियों ने संयुक्त रूप से भाग लिया। बीएसएफ हैंगर, दिल्ली एयरपोर्ट पर आयोजित इस अभ्यास का उद्देश्य विमानन सुरक्षा प्रोटोकॉल की प्रभावशीलता परखना और किसी भी संभावित आतंकवादी खतरे से निपटने की सामूहिक तैयारी को सुदृढ़ करना था।

मॉक ड्रिल के मुख्य उद्देश्य

इस अभ्यास के तहत चार प्रमुख लक्ष्य निर्धारित किए गए थे — पूर्व-निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल की प्रभावशीलता का परीक्षण, एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना, वास्तविक समय में संकट प्रबंधन क्षमता को मजबूत करना, और विमानन क्षेत्र में उभरते खतरों का मुकाबला करने की तैयारी सुनिश्चित करना। गौरतलब है कि देशभर के प्रमुख हवाई अड्डों पर इस तरह के संयुक्त अभ्यास समय-समय पर आयोजित किए जाते हैं, लेकिन दिल्ली जैसे अति-संवेदनशील हवाई अड्डे पर इतनी बड़ी संख्या में एजेंसियों की भागीदारी उल्लेखनीय है।

अभ्यास में शामिल एजेंसियाँ और परिदृश्य

इस संयुक्त ड्रिल में CISF, दिल्ली पुलिस, राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG), बम निरोधक एवं निपटान दस्ता (BDDS), नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA), दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS), मेदांता के चिकित्सा प्रतिनिधि तथा एयरपोर्ट से जुड़े अन्य हितधारकों ने सक्रिय भूमिका निभाई।

अभ्यास के दौरान संभावित आतंकवादी हमले और उससे उत्पन्न आपात स्थितियों से जुड़े कई परिदृश्यों का अनुकरण किया गया। इनमें सुरक्षा बलों की त्वरित प्रतिक्रिया, यात्रियों की सुरक्षित निकासी, क्षेत्र की घेराबंदी, संदिग्ध वस्तुओं की जाँच, बम निरोधक कार्रवाई और आपातकालीन चिकित्सा सहायता जैसी प्रक्रियाओं का व्यापक परीक्षण शामिल था।

CISF की आधिकारिक प्रतिक्रिया

CISF ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर पोस्ट कर बताया, 'समन्वित प्रतिक्रिया तंत्र और ऑपरेशनल तैयारी का आकलन करने के लिए CISF यूनिट दिल्ली एयरपोर्ट पर एक संयुक्त आतंकवाद-रोधी मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इस ड्रिल में CISF, दिल्ली पुलिस, NSG, BDDS, DFS, DGCA, मेदांता और एयरपोर्ट से जुड़े अन्य लोगों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और तय आपातकालीन प्रक्रियाओं के अनुसार समन्वित तरीके से प्रतिक्रिया दी।' बल ने यह भी कहा कि इससे एजेंसियों के बीच तालमेल मजबूत हुआ, सुरक्षा प्रोटोकॉल की पुष्टि हुई और संकट से प्रभावी ढंग से निपटने की तैयारी और बेहतर हुई।

नेतृत्व और समन्वय

पूरे अभ्यास का संचालन और निगरानी डिप्टी कमांडेंट पी.एस. राठौर और डिप्टी कमांडेंट धर्मवीर साई के नेतृत्व में की गई। CISF ने कहा कि सभी एजेंसियों के बीच उत्कृष्ट तालमेल देखने को मिला, जिसने किसी भी आपात स्थिति से निपटने की संयुक्त क्षमता को प्रदर्शित किया। बल ने पुनः स्पष्ट किया कि वह 'सतर्कता, सटीकता और बेहतर तालमेल के साथ एविएशन के अहम इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।'

आगे की राह

यह अभ्यास ऐसे समय में आया है जब देशभर के प्रमुख हवाई अड्डों पर सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार की सतर्कता बढ़ी हुई है। इस तरह के नियमित बहु-एजेंसी अभ्यास न केवल वास्तविक खतरों के प्रति तैयारी सुनिश्चित करते हैं, बल्कि विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों की परिचालन दक्षता को भी परखते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के संयुक्त अभ्यासों की नियमितता ही किसी भी आतंकवादी घटना के प्रति त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया की कुंजी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 183 कर्मियों और आठ से अधिक एजेंसियों की एक साथ भागीदारी यह दर्शाती है कि विमानन सुरक्षा को लेकर केंद्रीय एजेंसियाँ किसी भी ढिलाई की गुंजाइश नहीं छोड़ रहीं। असली कसौटी यह है कि ये अभ्यास कागज़ी खानापूर्ति न बनकर वास्तविक खतरों की नकल करें — जो परिदृश्य चुने जाएँ, वे मौजूदा वैश्विक आतंकवादी रणनीति के अनुरूप हों। DGCA और मेदांता जैसी नागरिक संस्थाओं की भागीदारी एक स्वागतयोग्य कदम है, क्योंकि वास्तविक संकट में सुरक्षा बल अकेले पर्याप्त नहीं होते।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली एयरपोर्ट पर मॉक ड्रिल क्यों आयोजित की गई?
यह अभ्यास विमानन सुरक्षा प्रोटोकॉल की प्रभावशीलता परखने, एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत करने और किसी संभावित आतंकवादी खतरे से निपटने की सामूहिक तैयारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। इस तरह के अभ्यास देशभर के संवेदनशील हवाई अड्डों पर नियमित रूप से होते हैं।
इस मॉक ड्रिल में कौन-कौन सी एजेंसियाँ शामिल थीं?
ड्रिल में CISF, दिल्ली पुलिस, NSG, BDDS, DGCA, दिल्ली अग्निशमन सेवा और मेदांता के चिकित्सा प्रतिनिधि सहित कुल 183 कर्मियों ने भाग लिया। यह एक व्यापक बहु-एजेंसी अभ्यास था जिसमें सुरक्षा, चिकित्सा और नागरिक उड्डयन — तीनों पक्ष शामिल थे।
मॉक ड्रिल के दौरान किन परिदृश्यों का अभ्यास किया गया?
अभ्यास में संभावित आतंकवादी हमले के परिदृश्यों के तहत सुरक्षा बलों की त्वरित प्रतिक्रिया, यात्रियों की सुरक्षित निकासी, क्षेत्र की घेराबंदी, संदिग्ध वस्तुओं की जाँच, बम निरोधक कार्रवाई और आपातकालीन चिकित्सा सहायता का परीक्षण किया गया।
इस अभ्यास का नेतृत्व किसने किया?
पूरे अभ्यास का संचालन और निगरानी CISF के डिप्टी कमांडेंट पी.एस. राठौर और डिप्टी कमांडेंट धर्मवीर साई के नेतृत्व में की गई। उनके मार्गदर्शन में सभी एजेंसियों ने समन्वित तरीके से प्रतिक्रिया दी।
CISF ने इस ड्रिल के परिणाम के बारे में क्या कहा?
CISF ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर बताया कि इस अभ्यास से एजेंसियों के बीच तालमेल मजबूत हुआ, सुरक्षा प्रोटोकॉल की पुष्टि हुई और संकट से तेज़ी से निपटने की क्षमता बेहतर हुई। बल ने एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई।
राष्ट्र प्रेस
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