पुरी बहुदा यात्रा 2025: भीड़ में दम घुटने से 57 वर्षीय श्रद्धालु की मौत, रथ यात्रा के बाद तीसरी मृत्यु
सारांश
मुख्य बातें
पुरी में बहुदा यात्रा के दौरान शुक्रवार, 24 जुलाई को एक और श्रद्धालु की जान चली गई — भारी भीड़ के बीच दम घुटने से कटक जिले के 57 वर्षीय अभिराम दास की मृत्यु हो गई। यह मौत 16 जुलाई की रथ यात्रा में दो श्रद्धालुओं की मृत्यु के दो सप्ताह से भी कम समय बाद हुई है, जिससे इस वर्ष पुरी के धार्मिक उत्सवों में मरने वालों की कुल संख्या तीन हो गई है। हालांकि, राज्य सरकार ने अभी तक इस मौत की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
घटनाक्रम: कैसे हुई मौत
सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार शाम पुरी के बगला धर्मशाला के निकट देवी सुभद्रा के रथ 'दर्पदलना' को खींचने के दौरान अभिराम दास अचानक भारी भीड़ के बीच अस्वस्थ हो गए। उन्हें तत्काल पुरी जिला मुख्यालय अस्पताल ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
इस वर्ष बहुदा यात्रा में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और चक्रराज सुदर्शन की वापसी यात्रा के लिए लाखों श्रद्धालु पुरी पहुँचे थे। यह यात्रा देवताओं की नौ दिवसीय गुंडिचा मंदिर प्रवास की समाप्ति का प्रतीक है, जिसके बाद तीनों रथ 12वीं शताब्दी के श्री जगन्नाथ मंदिर की ओर लौटते हैं।
रथ यात्रा में पहले भी हुई थीं मौतें
16 जुलाई को हुई रथ यात्रा के दौरान भी दो श्रद्धालुओं की जान गई थी। अधिकारियों के अनुसार, एक बुजुर्ग श्रद्धालु की भारी भीड़ में दम घुटने से इलाज के दौरान मृत्यु हुई, जबकि दूसरे श्रद्धालु की एक अलग घटना में हृदयाघात से मृत्यु हुई। राज्य सरकार ने इन दोनों मौतों की पुष्टि की थी, लेकिन उत्सव के दौरान किसी भी प्रकार की भगदड़ की बात से इनकार किया था।
20 जुलाई को ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने रथ यात्रा में जान गँवाने वाले कटक के अनिल दास और मुंबई के अशोक सुबारे रायकर के परिजनों को ₹10-10 लाख की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की थी।
विपक्ष के आरोप और सरकार की स्थिति
विपक्षी बीजू जनता दल (BJD) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने राज्य सरकार पर व्यापक कुप्रबंधन के आरोप लगाए हैं। दोनों दलों का कहना है कि भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था नाकाफी रही और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में प्रशासन विफल रहा। सरकार ने अब तक बहुदा यात्रा में हुई ताज़ा मौत पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
आगे क्या
यह घटना ओडिशा सरकार पर पुरी के वार्षिक धार्मिक उत्सवों में भीड़ प्रबंधन और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को लेकर नए सवाल खड़े करती है। आलोचकों का कहना है कि लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति और सीमित चिकित्सा अवसंरचना के बीच बड़ा अंतर है, जिसे भविष्य के उत्सवों से पहले दूर किया जाना चाहिए।