धर्मस्थला खोपड़ी मामला: 'मास्क मैन' चिन्नैया का कर्नाटक हाईकोर्ट में दावा — साजिश में किया गया इस्तेमाल
सारांश
मुख्य बातें
धर्मस्थला खोपड़ी विवाद में 12 जून 2026 को एक बड़ा मोड़ आया, जब इस मामले में पहले 'मास्क मैन' के नाम से चर्चित चिन्नैया ने कर्नाटक हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कर दावा किया कि उन्हें कर्नाटक के प्रमुख हिंदू तीर्थ स्थल धर्मस्थला को बदनाम करने की सुनियोजित साजिश में एक मोहरे के रूप में इस्तेमाल किया गया। चिन्नैया ने विशेष जांच दल (SIT) से इस कथित षड्यंत्र में शामिल लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
याचिका में क्या है
याचिका में चिन्नैया ने आरोप लगाया कि कार्यकर्ता महेश शेट्टी तिमारोडी, गिरिश मट्टन्नावर, विट्ठल गौड़ा, जयंत और यूट्यूबर समीर एम.डी., अजय तथा दिनेश ने धर्मस्थला के विरुद्ध अभियान चलाया। उन्होंने दावा किया कि उन्हें बेंगलुरु में जयंत के घर ले जाया गया, जहाँ उन्हें एक मानव खोपड़ी थमाकर फोटो खिंचवाई गई, और इसके बाद एक वकील के दफ्तर में दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए गए।
याचिका के अनुसार, चिन्नैया को केरल और तमिलनाडु के कई स्थानों पर ले जाया गया और समय-समय पर ₹5,000 से ₹15,000 तक दिए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि यूट्यूब चैनलों पर उनसे निर्देशित बयान बुलवाए गए और घर बनाने के लिए ₹5 लाख का चेक देने का वादा भी किया गया।
प्रकाश राज का नाम और ₹200 करोड़ का कथित बजट
याचिका में अभिनेता प्रकाश राज का नाम भी शामिल है। चिन्नैया ने दावा किया कि खोपड़ी से जुड़ी शिकायत पुलिस में दर्ज कराने के बाद उन्हें केरल के एक रिसॉर्ट में ले जाया गया, जहाँ उन्हें कथित तौर पर एक फोन दिया गया और प्रकाश राज से बात कराई गई। याचिका के अनुसार, प्रकाश राज ने तमिल में बात की और कथित रूप से कहा कि वे गिरिश मट्टन्नावर के निर्देशों के अनुसार बयान दें।
चिन्नैया ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें बताया गया था कि धर्माधिकारी वीरेंद्र हेगड़े को जेल भेजने के लिए ₹200 करोड़ का बजट रखा गया था, और सहयोग करने पर उन्हें ₹50 लाख देने का वादा किया गया था।
धमकियों और दबाव के आरोप
चिन्नैया ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि तिमारोडी, मट्टन्नावर, विट्ठल गौड़ा, जयंत और यूट्यूबरों ने उन्हें SIT के सामने स्थान बताने के लिए कहा और धमकी दी कि यदि उन्होंने सहयोग नहीं किया तो उनकी पत्नी को नुकसान पहुँचाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर वे निर्देशों के अनुसार अदालत में बयान नहीं देते तो उन्हें मारने और दफनाने की धमकी दी गई।
गौरतलब है कि चिन्नैया ने स्वयं स्वीकार किया कि उन स्थानों पर कोई मानव अवशेष नहीं मिले, जहाँ उन्हें खुदाई के लिए निर्देशित किया गया था। याचिका के अनुसार, महेश शेट्टी तिमारोडी और गिरिश मट्टन्नावर ने उन्हें बंगलगुड्डा में खुदाई के लिए स्थान पहचानने के निर्देश इसलिए दिए ताकि सरकारी धन खर्च कराया जा सके।
हाईकोर्ट का नोटिस और SIT को निर्देश
न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले में गृह विभाग, मंगलुरु के पुलिस अधीक्षक, SIT और धर्मस्थला पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर को नोटिस जारी किया। अदालत ने सभी को 29 जून तक जांच की स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, चिन्नैया के इन आरोपों के बाद उन कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की संभावना है जिन्होंने धर्मस्थला प्रबंधन के विरुद्ध आंदोलन और कानूनी लड़ाई का नेतृत्व किया था। यह मामला अब राज्य की राजनीति और न्यायिक प्रक्रिया दोनों पर गहरा असर डाल सकता है।
आगे क्या होगा
चिन्नैया ने कहा कि इस कथित साजिश से डरकर उन्होंने सच्चाई सामने लाने का फैसला किया और SIT के सामने बयान दिया। उन्होंने अदालत से माँग की है कि उनके आरोपों पर कार्रवाई की जाए और राज्य सरकार तथा SIT को आवश्यक निर्देश दिए जाएँ। अब 29 जून की सुनवाई तय करेगी कि इस पूरे प्रकरण में जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।