धीरेंद्र शास्त्री का जापान से बड़ा बयान: हिंदू राष्ट्र कागजों पर नहीं, विचारों में चाहिए
सारांश
मुख्य बातें
बागेश्वर धाम के प्रमुख पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने जापान दौरे के दौरान 24 अगस्त 2026 को एक विशेष बातचीत में स्पष्ट किया कि भारत में हिंदू राष्ट्र की उनकी परिकल्पना संवैधानिक दस्तावेज़ों में नहीं, बल्कि नागरिकों के विचारों और संस्कारों में निहित है। उन्होंने कहा कि विचार परिवर्तन से ही राष्ट्र परिवर्तन संभव है।
हिंदू राष्ट्र की वैचारिक परिकल्पना
जब उनसे पूछा गया कि क्या हिंदू राष्ट्र की माँग संविधान के विरुद्ध है, तो धीरेंद्र शास्त्री ने कहा — 'हम भारत में हिंदू राष्ट्र कागजों पर नहीं, विचारों में चाहते हैं। विचार परिवर्तन से कार्य परिवर्तन होगा, विचार परिवर्तन से राष्ट्र परिवर्तन होगा। हमारी हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना वैचारिक है, कागजी नहीं।' उन्होंने यह भी कहा कि इस दिशा में सबसे बड़ी चुनौती प्रत्येक भारतीय के मन में सनातन संस्कृति और भारतीय परंपरा को स्थापित करना है।
हिंदू समाज की प्रमुख समस्याएँ
शास्त्री ने हिंदू समाज की सबसे बड़ी समस्या के रूप में क्षेत्रवाद, जातिवाद और प्रदेशवाद को रेखांकित किया। उनके अनुसार, जब तक ये विभाजनकारी प्रवृत्तियाँ समाज में बनी रहेंगी, तब तक एकजुट राष्ट्रीय चेतना का निर्माण कठिन रहेगा। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब देश में सामाजिक एकता को लेकर बहस तेज़ हो रही है।
युवा पीढ़ी और सोशल मीडिया
जेन-ज़ी पीढ़ी के इंस्टाग्राम और रील्स के प्रति बढ़ते झुकाव पर शास्त्री ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाया। उन्होंने कहा कि 'सोशल मीडिया का सदुपयोग ठीक है, दुरुपयोग बुरा।' उनका सुझाव था कि युवा स्क्रीन टाइम घटाएँ, रील से ज़्यादा रियल पर भरोसा करें और केवल वायरल होने की होड़ में न पड़ें। उन्होंने धैर्य और आंतरिक खुशी को जीवन के लिए अनिवार्य बताया।
भारत-जापान तुलना: आपसी सीख
जापान की यात्रा से प्रभावित शास्त्री ने कहा कि भारत को जापान की नियम-पद्धति, इन्फ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य के प्रति सजगता और राष्ट्रवाद की भावना से सीखना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से यह रेखांकित किया कि जापान में क्षेत्रवाद और जातिवाद नहीं है। दूसरी ओर, उनका मानना है कि जापान को भारत से अनेकता में एकता और आध्यात्मिकता की सीख लेनी चाहिए।
ईश्वर के अस्तित्व पर तर्क
युवाओं के 'प्रूफ के बिना विश्वास नहीं' वाले तर्क पर शास्त्री ने कहा कि 'दुनिया में बहुत-सी चीज़ें बिना प्रूफ के होती हैं — हवा दिखती नहीं, पर है। वैसे ही परमात्मा दिखता नहीं, पर है।' उनके अनुसार, ईश्वर देखने का नहीं बल्कि अपने भीतर अनुभव करने का विषय है। अंत में जब उनसे पूछा गया कि भारत को बदलने के लिए वे क्या माँगेंगे, तो उनका एक-शब्दीय उत्तर था — शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार।