डिजिटल इंडिया के 11 साल: मोदी ने 2003 में ही रखी थी ई-गवर्नेंस की नींव, आर्काइव में दुर्लभ वीडियो
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 जुलाई 2015 को लॉन्च हुई 'डिजिटल इंडिया' पहल की 11वीं वर्षगाँठ पर देशवासियों को बधाई दी और इस अभियान को 'विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव' बताया। इस अवसर पर मोदी आर्काइव ने वर्ष 2003 से लेकर बाद के वर्षों तक के दुर्लभ वीडियो सार्वजनिक किए, जो दर्शाते हैं कि राष्ट्रीय डिजिटल मिशन की शुरुआत से लगभग दो दशक पहले ही मोदी ने डिजिटल गवर्नेंस की अवधारणा को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया था।
आर्काइव में क्या है
मोदी आर्काइव ने सोशल मीडिया पर साझा की गई पोस्ट में दो दुर्लभ भाषणों की वीडियो क्लिप प्रस्तुत कीं — 2003 में निर्मा यूनिवर्सिटी में दिया गया संबोधन और 2011 के ई-इंडिया आईसीटी कॉन्फ्रेंस में दिया गया भाषण। इन क्लिप्स में मोदी ने ई-गवर्नेंस को 'प्रभावी, आसान और किफायती' बताया था। आर्काइव ने इसके साथ 1 जुलाई 2015 को डिजिटल इंडिया के शुभारंभ और उसी वर्ष सिलिकॉन वैली में दिए गए संबोधन की झलकियाँ भी शामिल कीं।
आर्काइव के अनुसार, गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए मोदी ने सूचना प्रौद्योगिकी पर जो विशेष ध्यान दिया, उसी ने आगे चलकर देश में डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और सरकारी सेवाओं के डिजिटलीकरण की नींव रखी।
प्रधानमंत्री की मूल सोच
आर्काइव पोस्ट में कहा गया कि मोदी की मान्यता रही है कि तकनीक 'कुछ चुनिंदा लोगों की विलासिता नहीं, बल्कि समाज के सबसे निचले स्तर तक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम' होनी चाहिए। यह दृष्टिकोण उनके 2003 के भाषणों से ही स्पष्ट था, जहाँ उन्होंने मोबाइल गवर्नेंस और जन-सशक्तिकरण को केंद्र में रखा था।
प्रधानमंत्री की वर्षगाँठ पर प्रतिक्रिया
मोदी ने 1 जुलाई 2025 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'डिजिटल इंडिया विकसित और आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव है। पिछले 11 वर्षों में इस पहल ने गरीबों और वंचितों को सशक्त बनाने के साथ-साथ नागरिकों का जीवन आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।' उन्होंने यह भी कहा, 'जब एक अरब से अधिक लोग तकनीक को अपनाते हैं, तो उसका प्रभाव परिवर्तनकारी होता है।'
आम जनता पर असर
मोदी ने रेखांकित किया कि सहज डिजिटल भुगतान व्यवस्था, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के ज़रिए पारदर्शी सहायता वितरण और डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर का लगातार विस्तार — ये तीनों मिलकर 'ईज़ ऑफ लिविंग' को बढ़ावा दे रहे हैं। उनके अनुसार, डिजिटल इंडिया ने देश के गाँवों तथा टियर-2 और टियर-3 शहरों तक नवाचार की नई लहर पहुँचाई है, जहाँ से युवा उद्यमी, स्टार्टअप और इनोवेटर वैश्विक चुनौतियों के समाधान विकसित कर रहे हैं।
आगे की दिशा
यह ऐसे समय में आया है जब भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और डिजिटल कॉमर्स जैसे अगली पीढ़ी के तकनीकी क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटा है। डिजिटल इंडिया की 11 साल की यात्रा को इस व्यापक तकनीकी महत्वाकांक्षा की बुनियाद के रूप में देखा जा रहा है।