24 अक्टूबर 2026
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ईडी ने बनीत सिंह तलवार को किया गिरफ्तार: ₹89 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग, अफगान आतंकी फंडिंग का आरोप

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ईडी ने बनीत सिंह तलवार को किया गिरफ्तार: ₹89 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग, अफगान आतंकी फंडिंग का आरोप

सारांश

ईडी की यह गिरफ्तारी महज एक मनी लॉन्ड्रिंग केस नहीं — यह उस सिंडिकेट की कड़ी है जो भारत में ड्रग बेचकर अफगानिस्तान में आतंकी गतिविधियाँ फंड करता था। ₹89 करोड़ की अपराध आय, पाकिस्तानी आईएसआई एजेंट और फरार मास्टरमाइंड 'राजू दुबई' — यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीधी चुनौती है।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 24 अक्टूबर 2026 को बनीत सिंह तलवार को पीएमएलए के तहत गिरफ्तार किया।
तीस हजारी कोर्ट, नई दिल्ली ने आरोपी को 5 दिनों की ईडी हिरासत में भेजा।
ईडी ने अब तक ₹89 करोड़ की अपराध से प्राप्त आय चिह्नित की है; ₹76 करोड़ हवाला से अफगानिस्तान भेजे गए।
मास्टरमाइंड वितेश कोसर उर्फ राजू दुबई फरार है; सिंडिकेट में पाकिस्तानी आईएसआई एजेंट और अफगान नागरिक शामिल बताए गए हैं।
बनीत ने मैजेंट इंडिया कंपनी को ₹55 लाख से अधिक की राशि दी और बेनामी कंपनियों के नाम वाहन खरीदे।
एनआईए इस मामले में अब तक छह आरोप-पत्र दाखिल कर चुकी है; आगे की जांच जारी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 24 अक्टूबर 2026 को बनीत सिंह तलवार को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग सिंडिकेट से जुड़ी है, जिसमें नशीले पदार्थों को टैल्क के भीतर छिपाकर दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में तस्करी की गई। जांच एजेंसी ने अब तक इस मामले में ₹89 करोड़ की अपराध से प्राप्त आय का पता लगाया है।

मुख्य घटनाक्रम

गिरफ्तारी के बाद बनीत सिंह तलवार को नई दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट (पश्चिम जिला) में विशेष न्यायाधीश (पीएमएलए) के समक्ष पेश किया गया। अदालत ने उन्हें 5 दिनों की ईडी हिरासत में भेजने का आदेश दिया।

ईडी की जांच की शुरुआत राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा हरप्रीत सिंह तलवार और अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर हुई। एनआईए इस मामले में अब तक छह आरोप-पत्र दाखिल कर चुकी है।

अंतरराष्ट्रीय तस्करी सिंडिकेट का स्वरूप

आरोप-पत्रों के अनुसार, इस सिंडिकेट का मास्टरमाइंड 'वितेश कोसर' उर्फ 'राजू दुबई' है, जो फिलहाल फरार है और वांछित आरोपी की सूची में है। यह नेटवर्क कथित तौर पर अफगानिस्तान, पाकिस्तान और दुबई से संचालित होता था, और इसमें पाकिस्तानी आईएसआई एजेंट तथा अफगान नागरिक भी शामिल बताए गए हैं।

जांच में सामने आया है कि नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री से प्राप्त ₹76 करोड़ की राशि हवाला के ज़रिए अफगानिस्तान भेजी गई और इसका उपयोग कथित तौर पर आतंकवादी गतिविधियों की फंडिंग के लिए किया गया।

बनीत सिंह की भूमिका और वित्तीय जाल

बनीत सिंह तलवार, अभियुक्त हरप्रीत सिंह तलवार का भाई है। हरप्रीत पर मास्टरमाइंड राजू दुबई के साथ मिलकर भारत में ड्रग तस्करी कराने का आरोप है। जांच के मुताबिक, हरप्रीत की गिरफ्तारी के बाद भी बनीत उनके नियंत्रण वाली व्यावसायिक इकाइयों को संचालित करता रहा।

वित्तीय विश्लेषण से पता चला कि बनीत ने 'मैजेंट इंडिया' नामक कंपनी को ₹55 लाख से अधिक की राशि दी — यह कंपनी हरप्रीत के नियंत्रण में थी और ड्रग तस्करी में लिप्त बताई गई है। अपराध से अर्जित राशि को अलग-अलग व्यावसायिक इकाइयों में डालकर 'राउंड-ट्रिपिंग' के ज़रिए बनीत तक पहुँचाया गया। विभिन्न कंपनियों के बीच मिलती-जुलती प्रविष्टियाँ मिली हैं, जो सोची-समझी योजना की ओर इशारा करती हैं।

इसके अलावा, बनीत ने बेनामी कंपनियों के नाम पर गाड़ियाँ खरीदने के लिए नकद जमा का उपयोग किया — इन गाड़ियों को ईडी पहले ही जब्त कर चुकी है। हरप्रीत से प्राप्त राशि से खरीदी गई अचल संपत्तियों का लाभ कथित तौर पर आज भी हरप्रीत और उनका परिवार उठा रहा है।

ईडी की कुल वित्तीय जांच

ईडी ने अब तक इस मामले में ₹89 करोड़ की 'अपराध से प्राप्त आय' चिह्नित की है। इसमें ड्रग तस्करी से अर्जित राशि, हवाला लेनदेन और अन्य माध्यमों से प्राप्त संपत्तियाँ शामिल हैं। एजेंसी के अनुसार अतिरिक्त अपराध से प्राप्त आय का पता लगाने के लिए जांच जारी है।

क्या होगा आगे

ईडी के अनुसार यह गिरफ्तारी ड्रग तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला नेटवर्क को तोड़ने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। गौरतलब है कि यह मामला सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है, क्योंकि इसमें आतंकी फंडिंग के आरोप भी हैं। फरार मास्टरमाइंड वितेश कोसर उर्फ राजू दुबई की गिरफ्तारी अभी बाकी है, और मामले की आगे की जांच जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारत की आंतरिक सुरक्षा पर एक गहरे सवाल का है — क्या ड्रग नेटवर्क आतंकी फंडिंग के मार्ग बन चुके हैं? ₹76 करोड़ का हवाला अफगानिस्तान भेजा जाना और उसे आतंकी गतिविधियों से जोड़ना यह दर्शाता है कि ये रैकेट केवल आर्थिक अपराध नहीं हैं। हरप्रीत की गिरफ्तारी के बाद भी बनीत द्वारा कारोबार चलाते रहना यह सवाल उठाता है कि एनआईए की पहले की कार्रवाइयाँ वित्तीय जड़ों तक क्यों नहीं पहुँच सकीं। असली परीक्षा अब फरार मास्टरमाइंड 'राजू दुबई' की गिरफ्तारी और अंतरराष्ट्रीय कड़ियों को तोड़ने में है।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बनीत सिंह तलवार को किस आरोप में गिरफ्तार किया गया है?
बनीत सिंह तलवार को प्रवर्तन निदेशालय ने 24 अक्टूबर 2026 को पीएमएलए, 2002 के तहत अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया। ईडी के अनुसार उन्होंने अपने भाई हरप्रीत सिंह तलवार की गिरफ्तारी के बाद भी ड्रग तस्करी से जुड़ी व्यावसायिक इकाइयाँ संचालित कीं।
इस मामले में कितनी राशि की मनी लॉन्ड्रिंग का पता चला है?
ईडी की वित्तीय जांच में अब तक ₹89 करोड़ की अपराध से प्राप्त आय का पता चला है। इसमें से ₹76 करोड़ हवाला के ज़रिए अफगानिस्तान भेजे गए, जिनका उपयोग कथित तौर पर आतंकी गतिविधियों को फंड करने के लिए किया गया।
इस ड्रग सिंडिकेट का मास्टरमाइंड कौन है?
इस सिंडिकेट का मास्टरमाइंड 'वितेश कोसर' उर्फ 'राजू दुबई' बताया गया है, जो फिलहाल फरार है और वांछित आरोपी की सूची में है। यह नेटवर्क अफगानिस्तान, पाकिस्तान और दुबई से संचालित होता था और इसमें पाकिस्तानी आईएसआई एजेंट तथा अफगान नागरिक भी शामिल बताए गए हैं।
अदालत ने बनीत सिंह तलवार को कितने दिनों की हिरासत में भेजा?
नई दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट (पश्चिम जिला) में विशेष न्यायाधीश (पीएमएलए) ने बनीत सिंह तलवार को 5 दिनों की ईडी हिरासत में भेजने का आदेश दिया।
बनीत सिंह तलवार का इस मामले में क्या वित्तीय जुड़ाव पाया गया?
जांच के मुताबिक बनीत ने हरप्रीत के नियंत्रण वाली 'मैजेंट इंडिया' कंपनी को ₹55 लाख से अधिक की राशि दी। इसके अलावा उन्होंने बेनामी कंपनियों के नाम वाहन खरीदे और अपराध से अर्जित धन से अचल संपत्तियाँ खरीदीं, जिनका लाभ हरप्रीत का परिवार आज भी उठा रहा है।
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