ईडी ने बनीत सिंह तलवार को किया गिरफ्तार: ₹89 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग, अफगान आतंकी फंडिंग का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 24 अक्टूबर 2026 को बनीत सिंह तलवार को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग सिंडिकेट से जुड़ी है, जिसमें नशीले पदार्थों को टैल्क के भीतर छिपाकर दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में तस्करी की गई। जांच एजेंसी ने अब तक इस मामले में ₹89 करोड़ की अपराध से प्राप्त आय का पता लगाया है।
मुख्य घटनाक्रम
गिरफ्तारी के बाद बनीत सिंह तलवार को नई दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट (पश्चिम जिला) में विशेष न्यायाधीश (पीएमएलए) के समक्ष पेश किया गया। अदालत ने उन्हें 5 दिनों की ईडी हिरासत में भेजने का आदेश दिया।
ईडी की जांच की शुरुआत राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा हरप्रीत सिंह तलवार और अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर हुई। एनआईए इस मामले में अब तक छह आरोप-पत्र दाखिल कर चुकी है।
अंतरराष्ट्रीय तस्करी सिंडिकेट का स्वरूप
आरोप-पत्रों के अनुसार, इस सिंडिकेट का मास्टरमाइंड 'वितेश कोसर' उर्फ 'राजू दुबई' है, जो फिलहाल फरार है और वांछित आरोपी की सूची में है। यह नेटवर्क कथित तौर पर अफगानिस्तान, पाकिस्तान और दुबई से संचालित होता था, और इसमें पाकिस्तानी आईएसआई एजेंट तथा अफगान नागरिक भी शामिल बताए गए हैं।
जांच में सामने आया है कि नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री से प्राप्त ₹76 करोड़ की राशि हवाला के ज़रिए अफगानिस्तान भेजी गई और इसका उपयोग कथित तौर पर आतंकवादी गतिविधियों की फंडिंग के लिए किया गया।
बनीत सिंह की भूमिका और वित्तीय जाल
बनीत सिंह तलवार, अभियुक्त हरप्रीत सिंह तलवार का भाई है। हरप्रीत पर मास्टरमाइंड राजू दुबई के साथ मिलकर भारत में ड्रग तस्करी कराने का आरोप है। जांच के मुताबिक, हरप्रीत की गिरफ्तारी के बाद भी बनीत उनके नियंत्रण वाली व्यावसायिक इकाइयों को संचालित करता रहा।
वित्तीय विश्लेषण से पता चला कि बनीत ने 'मैजेंट इंडिया' नामक कंपनी को ₹55 लाख से अधिक की राशि दी — यह कंपनी हरप्रीत के नियंत्रण में थी और ड्रग तस्करी में लिप्त बताई गई है। अपराध से अर्जित राशि को अलग-अलग व्यावसायिक इकाइयों में डालकर 'राउंड-ट्रिपिंग' के ज़रिए बनीत तक पहुँचाया गया। विभिन्न कंपनियों के बीच मिलती-जुलती प्रविष्टियाँ मिली हैं, जो सोची-समझी योजना की ओर इशारा करती हैं।
इसके अलावा, बनीत ने बेनामी कंपनियों के नाम पर गाड़ियाँ खरीदने के लिए नकद जमा का उपयोग किया — इन गाड़ियों को ईडी पहले ही जब्त कर चुकी है। हरप्रीत से प्राप्त राशि से खरीदी गई अचल संपत्तियों का लाभ कथित तौर पर आज भी हरप्रीत और उनका परिवार उठा रहा है।
ईडी की कुल वित्तीय जांच
ईडी ने अब तक इस मामले में ₹89 करोड़ की 'अपराध से प्राप्त आय' चिह्नित की है। इसमें ड्रग तस्करी से अर्जित राशि, हवाला लेनदेन और अन्य माध्यमों से प्राप्त संपत्तियाँ शामिल हैं। एजेंसी के अनुसार अतिरिक्त अपराध से प्राप्त आय का पता लगाने के लिए जांच जारी है।
क्या होगा आगे
ईडी के अनुसार यह गिरफ्तारी ड्रग तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला नेटवर्क को तोड़ने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। गौरतलब है कि यह मामला सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है, क्योंकि इसमें आतंकी फंडिंग के आरोप भी हैं। फरार मास्टरमाइंड वितेश कोसर उर्फ राजू दुबई की गिरफ्तारी अभी बाकी है, और मामले की आगे की जांच जारी है।