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क्या लखनऊ में ईडी ने रोहतास ग्रुप से जुड़ी 350 करोड़ की संपत्तियों को अटैच किया?

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क्या लखनऊ में ईडी ने रोहतास ग्रुप से जुड़ी 350 करोड़ की संपत्तियों को अटैच किया?

सारांश

लखनऊ में प्रवर्तन निदेशालय ने रोहतास ग्रुप के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में 350 करोड़ से ज्यादा की संपत्तियों को अटैच किया। यह कार्रवाई महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें ग्राहकों के पैसे के दुरुपयोग का मामला सामने आया है।

मुख्य बातें

ईडी ने 350 करोड़ से अधिक की संपत्तियों को अटैच किया।
ग्राहकों के पैसे का दुरुपयोग किया गया।
लखनऊ में संपत्तियां स्थित हैं।
मामले में सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है।
ईडी की जांच जारी है।

लखनऊ, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), लखनऊ जोनल ऑफिस ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत रोहतास प्रोजेक्ट लिमिटेड और अन्य से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। ईडी ने 158.85 करोड़ रुपए की 75 अचल और 2 चल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है।

इन संपत्तियों की वर्तमान बाजार कीमत 350 करोड़ रुपए से अधिक आंकी गई है।

ईडी द्वारा अटैच की गई 141.21 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियां रोहतास ग्रुप ऑफ कंपनियों के प्रमोटर दीपक रस्तोगी, रोहतास ग्रुप की एसोसिएट कंपनियों, वरदान टाउनशिप प्राइवेट लिमिटेड, ग्रुप के कई बेनामीदारों और मेसर्स अध्याय रियल्टी इंफ्रास्ट्रक्चर एलएलपी के नाम पर पंजीकृत हैं। वहीं, 17.64 करोड़ रुपए की चल संपत्तियां हाईनेस इंफ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर दर्ज पाई गई हैं। सभी अचल संपत्तियां लखनऊ में स्थित हैं।

ईडी ने यह जांच उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा भारतीय दंड संहिता, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज 83 एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। जांच में सामने आया कि रोहतास प्रोजेक्ट लिमिटेड ने ‘सुल्तानपुर रोड प्रोजेक्ट’, ‘रायबरेली रोड प्रोजेक्ट’ और ‘रोहतास प्लुमेरिया’ नाम से कई टाउनशिप योजनाएं शुरू की थीं।

इन योजनाओं के तहत ग्राहकों को अलग-अलग आकार के प्लॉट, जमीन या फ्लैट बुक करने का विकल्प दिया गया था, जिसमें यह वादा किया गया था कि बुकिंग की तारीख से 30 महीने के भीतर या तो संपत्ति का कब्जा दिया जाएगा या फिर बुकिंग राशि का एकमुश्त 150 प्रतिशत भुगतान किया जाएगा। हालांकि, न तो किसी भी परियोजना का विकास किया गया और न ही ग्राहकों को उनकी राशि वापस की गई।

जांच के दौरान यह भी खुलासा हुआ कि रोहतास ग्रुप के प्रमोटरों ने ग्राहकों से एकत्र की गई राशि को अपनी सहयोगी कंपनियों और बेनामीदारों के नाम पर जमीन खरीदने में डायवर्ट किया। जमीन से जुड़ी संपत्तियों को छिपाने के उद्देश्य से रोहतास ग्रुप की एसोसिएट कंपनी के पास मौजूद जमीन को बाद में वरदान टाउनशिप प्राइवेट लिमिटेड को ट्रांसफर कर दिया गया।

इसी तरह, रोहतास ग्रुप की बेनामी जमीनों को आगे चलकर मेसर्स अध्याय रियल्टी इंफ्रास्ट्रक्चर एलएलपी को ट्रांसफर किया गया। इसके अलावा, प्रमोटर दीपक रस्तोगी ने इन बेनामीदारों से कुछ जमीन के टुकड़े हासिल कर उन्हें बैंकों के पास गिरवी रखा, ताकि अपराध से अर्जित धन को एक साथ किया जा सके और उसके जरिए वैध बैंकिंग फंड प्राप्त किए जा सकें।

इस मामले में ईडी ने इससे पहले अक्टूबर 2025 में भी 110.05 करोड़ रुपए की 68 अचल संपत्तियों को प्रोविजनली अटैच किया था। इस प्रकार अब तक इस मामले में कुल 268.9 करोड़ रुपए की संपत्तियां प्रोविजनल अटैच की जा चुकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह जरूरी है कि हम इस मामले की गंभीरता को समझें। मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में ग्राहकों का विश्वास डगमगाता है। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाए ताकि आम जनता का विश्वास बना रहे।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रोहतास ग्रुप के खिलाफ ईडी ने क्यों कार्रवाई की?
ईडी ने रोहतास ग्रुप के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के तहत कार्रवाई की है।
ईडी ने कितनी संपत्तियां अटैच की हैं?
ईडी ने 158.85 करोड़ रुपए की 75 अचल और 2 चल संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की हैं।
इन संपत्तियों की कुल मूल्य कितनी है?
इन संपत्तियों की कुल मूल्य 350 करोड़ रुपए से अधिक आंकी गई है।
क्या ग्राहकों को उनकी राशि वापस मिलेगी?
जांच के अनुसार, ग्राहकों को न तो संपत्तियां दी गईं और न ही उनकी राशि वापस की गई।
ईडी की जांच कैसे शुरू हुई?
ईडी की जांच उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज 83 एफआईआर के आधार पर शुरू हुई।
राष्ट्र प्रेस
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