गांधीनगर में PCPNDT एक्ट पर सख्ती: 6 अस्पतालों में डिकॉय ऑपरेशन, एक अस्पताल सील करने के आदेश
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के गांधीनगर जिले में स्वास्थ्य विभाग ने पीसी-पीएनडीटी अधिनियम-1994 (PCPNDT Act) के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई शुरू की है। 29 मई 2026 को जिला पंचायत गांधीनगर के सेक्टर-17 स्थित हेल्थ ब्रांच कार्यालय में वर्ष 2026 की पहली पीसीपीएनडीटी एडवाइजरी कमेटी की बैठक आयोजित की गई, जिसमें जिले के छह अस्पतालों में सफलतापूर्वक डिकॉय ऑपरेशन किए जाने और एक अस्पताल को सील करने के आदेश दिए जाने की जानकारी सामने आई।
बैठक की अध्यक्षता और मुख्य एजेंडा
बैठक की अध्यक्षता एडवाइजरी कमेटी की चेयरपर्सन मीनाक्षी जयसिंधानी और मुख्य जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. ए. जे. वैष्णव ने संयुक्त रूप से की। बैठक में जिले के सोनोग्राफी क्लीनिकों के गहन सत्यापन और अधिनियम के कड़े पालन पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
डॉ. वैष्णव ने रिन्यूअल रजिस्ट्रेशन की समयबद्धता, पंजीकृत अस्पतालों के नियमित निरीक्षण और बिना पंजीकरण के संचालित क्लीनिकों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई पर विशेष ज़ोर दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सोनोग्राफी के माध्यम से किसी भी प्रकार की भ्रूण लिंग जांच (सेक्स डिटरमिनेशन) को किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसी गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
डिकॉय ऑपरेशन और कार्रवाई का ब्यौरा
बैठक में सब-अप्रोप्रिएट अथॉरिटी द्वारा की गई कार्रवाइयों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया। अधिकारियों के अनुसार, अब तक जिले के कुल छह अस्पतालों में डमी मरीज भेजकर डिकॉय ऑपरेशन सफलतापूर्वक संपन्न किए गए हैं। यह ऑपरेशन संदिग्ध लिंग-चयन गतिविधियों की पहचान के लिए किए जाते हैं।
इसके अतिरिक्त, तीन अस्पतालों में कुल छह सोनोग्राफी मशीनों को नियमानुसार स्वेच्छा से सील किया गया है। कानून उल्लंघन के आरोप में तीन अन्य अस्पतालों को आधिकारिक नोटिस जारी कर तत्काल जवाब माँगा गया है।
एक अस्पताल सील करने के आदेश
एक अस्पताल का पीसीपीएनडीटी पंजीकरण समाप्त होने के बावजूद समय पर नवीनीकरण नहीं कराया गया। इस चूक को गंभीरता से लेते हुए एडवाइजरी कमेटी ने संबंधित अस्पताल को सील करने के आदेश दिए हैं। यह कदम उन संस्थानों के लिए एक स्पष्ट संदेश है जो पंजीकरण नियमों की अनदेखी करते हैं।
अभियान का उद्देश्य और आगे की राह
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, यह पूरा अभियान PCPNDT अधिनियम-1994 के प्रभावी क्रियान्वयन और भ्रूण लिंग जांच जैसी गैरकानूनी गतिविधियों पर पूर्ण रोक लगाने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है। गौरतलब है कि यह कानून कन्या भ्रूण हत्या की रोकथाम के लिए लागू किया गया था और इसके उल्लंघन पर कठोर दंड का प्रावधान है।
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों और संस्थानों के विरुद्ध आगे भी कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के नियमित डिकॉय ऑपरेशन और सख्त निगरानी से ही कानून का वास्तविक अनुपालन सुनिश्चित किया जा सकता है।