26 जुलाई 2026
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जीएम और जीई फसलों के नियामक सुधार पर नई दिल्ली में उच्च स्तरीय गोलमेज, 80 से अधिक विशेषज्ञ एकजुट

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जीएम और जीई फसलों के नियामक सुधार पर नई दिल्ली में उच्च स्तरीय गोलमेज, 80 से अधिक विशेषज्ञ एकजुट

सारांश

नई दिल्ली में आयोजित उच्च स्तरीय गोलमेज सम्मेलन में 80 से अधिक विशेषज्ञों ने एकमत होकर जीएम और जीई फसलों के लिए पारदर्शी, समयबद्ध और जोखिम-अनुरूप नियामक ढाँचे की माँग की — जो किसानों की आय, पोषण सुरक्षा और जलवायु लचीलेपन के लिए ज़रूरी बताया गया।

मुख्य बातें

26 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में जीएम और जीई फसलों पर उच्च स्तरीय गोलमेज सम्मेलन आयोजित हुआ।
80 से अधिक नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों, नियामकों और उद्योग विशेषज्ञों ने भाग लिया।
विज्ञान-आधारित, पारदर्शी और जोखिम-अनुरूप नियामक ढाँचे की माँग की गई।
एमएल जाट (महानिदेशक, आईसीएआर) ने संतुलित नियामक प्रणाली की आवश्यकता पर बल दिया।
टीएएएस अध्यक्ष आरएस परोदा ने मौजूदा दिशा-निर्देशों की समीक्षा और परीक्षण प्रक्रियाओं को सरल बनाने की पैरवी की।
सिफारिशें एक व्यापक नीति दस्तावेज में संकलित होंगी और संबंधित मंत्रालयों को सौंपी जाएँगी।

नई दिल्ली में 26 जुलाई 2026 को आयोजित एक उच्च स्तरीय गोलमेज सम्मेलन में कृषि विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं और उद्योग प्रतिनिधियों ने भारत में आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) और जीनोम-संपादित (जीई) फसलों को सुरक्षित रूप से अपनाने में तेज़ी लाने के लिए विज्ञान-आधारित नियामक सुधारों की एकजुट माँग रखी। कृषि मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, इस बैठक में 80 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

गोलमेज सम्मेलन की पृष्ठभूमि

यह सम्मेलन 'जीएम और जीई फसल पौधों के नियमों और अनुमोदन में सुधार' विषय पर कृषि विज्ञान संवर्धन ट्रस्ट (टीएएएस) द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और फेडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एफएसआईआई) के सहयोग से आयोजित किया गया था। इसमें नीति निर्माताओं, कृषि वैज्ञानिकों, नियामकों, उद्योगपतियों, अर्थशास्त्रियों और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने भारत के कृषि जैव प्रौद्योगिकी नियामक ढाँचे के आधुनिकीकरण पर विचार-विमर्श किया।

मुख्य माँगें और सिफारिशें

प्रतिभागियों ने एक विज्ञान-आधारित, पारदर्शी, कुशल और जोखिम-अनुरूप नियामक ढाँचे की माँग की, जिसमें सुव्यवस्थित और समयबद्ध अनुमोदन प्रक्रियाएँ हों और जो सार्वजनिक तथा निजी दोनों नवोन्मेषकों के लिए सुलभ हो। बयान में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन, उत्पादकता, पोषण सुरक्षा, किसानों की आय और भारतीय कृषि की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने के लिए सुरक्षित जीएम और जीई फसलों को समय पर अपनाना आवश्यक है।

प्रतिभागियों ने यह भी रेखांकित किया कि यद्यपि भारत ने जैव सुरक्षा विनियमन में तीन दशकों से अधिक का अनुभव और मज़बूत वैज्ञानिक क्षमताएँ अर्जित की हैं, फिर भी जैव प्रौद्योगिकी — विशेष रूप से जीनोम संपादन — में हो रही प्रगति के साथ तालमेल बिठाने के लिए नियामक ढाँचे को अद्यतन करना ज़रूरी है।

विशेषज्ञों की राय

कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) के सचिव और आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एमएल जाट ने खाद्य एवं पोषण सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन और सतत कृषि विकास के लिए आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी के सुरक्षित उपयोग को सुगम बनाने वाली संतुलित नियामक प्रणाली की आवश्यकता पर बल दिया।

टीएएएस के अध्यक्ष आरएस परोदा ने कहा कि इस गोलमेज सम्मेलन की सिफारिशें भारत के नियामक ढाँचे के आधुनिकीकरण और मानव स्वास्थ्य, जैव विविधता तथा पर्यावरण की रक्षा करते हुए जिम्मेदार नवाचार को बढ़ावा देने वाले अनुकूल नीतिगत वातावरण के निर्माण का आधार बननी चाहिए। उन्होंने परीक्षण प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए मौजूदा दिशा-निर्देशों की समीक्षा की भी पैरवी की।

आगे की राह

गोलमेज बैठक से प्राप्त सिफारिशों को एक व्यापक नीति दस्तावेज में संकलित किया जाएगा, जिसे संबंधित मंत्रालयों और नियामक प्राधिकरणों को प्रस्तुत किया जाएगा। इसका उद्देश्य भारत में जीएम और जीनोम-संपादित फसल पौधों के विनियमन और अनुमोदन में साक्ष्य-आधारित सुधारों को समर्थन देना है। यह नीति दस्तावेज कृषि जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो नीतिगत सहमति की दिशा में संकेत देता है। लेकिन असली परीक्षा यह है कि नीति दस्तावेज मंत्रालयों की मेज पर पहुँचने के बाद कितनी तेज़ी से क्रियान्वित होता है — क्योंकि इससे पहले भी ऐसी सिफारिशें फाइलों में दबकर रह गई हैं। जब तक जैव सुरक्षा मानकों के साथ-साथ अनुमोदन की समयसीमा कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होती, सुधार की यह माँग महज़ एक और सम्मेलन की घोषणा बनकर रह सकती है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जीएम और जीई फसलों पर नई दिल्ली गोलमेज सम्मेलन में क्या माँग की गई?
26 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित इस गोलमेज में विशेषज्ञों ने भारत में जीएम और जीई फसलों के लिए विज्ञान-आधारित, पारदर्शी और समयबद्ध नियामक ढाँचे की माँग की। साथ ही सार्वजनिक और निजी दोनों नवोन्मेषकों के लिए सुलभ अनुमोदन प्रक्रिया की भी पैरवी की गई।
इस गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किसने किया और इसमें कौन शामिल हुए?
यह सम्मेलन कृषि विज्ञान संवर्धन ट्रस्ट (टीएएएस) ने आईसीएआर और एफएसआईआई के सहयोग से आयोजित किया। इसमें 80 से अधिक नीति निर्माताओं, कृषि वैज्ञानिकों, नियामकों, उद्योगपतियों, अर्थशास्त्रियों और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
जीई और जीएम फसलों को अपनाना भारत के लिए क्यों ज़रूरी बताया गया?
विशेषज्ञों के अनुसार, सुरक्षित जीएम और जीई फसलों को समय पर अपनाना जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन, कृषि उत्पादकता, पोषण सुरक्षा, किसानों की आय और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए महत्वपूर्ण है। भारत के पास तीन दशकों से अधिक का जैव सुरक्षा अनुभव है, लेकिन नियामक ढाँचा नई तकनीकों के साथ तालमेल में पिछड़ रहा है।
गोलमेज की सिफारिशों का आगे क्या होगा?
सम्मेलन की सिफारिशों को एक व्यापक नीति दस्तावेज में संकलित किया जाएगा और संबंधित मंत्रालयों तथा नियामक प्राधिकरणों को सौंपा जाएगा। इसका उद्देश्य भारत में जीएम और जीनोम-संपादित फसलों के विनियमन में साक्ष्य-आधारित सुधारों को समर्थन देना है।
डॉ. एमएल जाट और आरएस परोदा ने गोलमेज में क्या कहा?
आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एमएल जाट ने खाद्य सुरक्षा और जलवायु लचीलेपन के लिए संतुलित नियामक प्रणाली की ज़रूरत पर बल दिया। टीएएएस अध्यक्ष आरएस परोदा ने मौजूदा दिशा-निर्देशों की समीक्षा और परीक्षण प्रक्रियाओं को सरल बनाने की माँग की, ताकि जिम्मेदार नवाचार को बढ़ावा मिल सके।
राष्ट्र प्रेस
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