3 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

ग्रैंड मुफ्ती के 'महिलाएं गहनों जैसी' बयान पर डॉ. शालिनी अली की कड़ी आलोचना

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ग्रैंड मुफ्ती के 'महिलाएं गहनों जैसी' बयान पर डॉ. शालिनी अली की कड़ी आलोचना

सारांश

ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबकर अहमद के 'महिलाएं गहनों जैसी हैं' वाले बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. शालिनी अली ने इसे धार्मिक और सामाजिक दोनों दृष्टियों से गलत बताते हुए महिलाओं की आत्मनिर्भरता की पैरवी की।

मुख्य बातें

ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबकर अहमद ने महिलाओं की तुलना घर में रखे गहनों से करते हुए उनकी 'सुरक्षा' की बात कही थी।
सामाजिक कार्यकर्ता डॉ.
शालिनी अली ने 2 सितंबर को इस बयान की कड़ी आलोचना की।
अली ने कहा कि कुरान और किसी हदीस में महिलाओं की स्वतंत्रता सीमित करने का उल्लेख नहीं है।
उन्होंने महिलाओं को शिक्षा और प्रेरणा देने की वकालत की, न कि उन्हें 'सुरक्षा' के नाम पर रोकने की।
दिशा सालियान रेप केस की सीबीआई जांच के उच्च न्यायालय के आदेश का डॉ.

सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. शालिनी अली ने 2 सितंबर को ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबकर अहमद के उस बयान की तीखी आलोचना की, जिसमें उन्होंने महिलाओं की तुलना घर में रखे जाने वाले गहनों से की थी। डॉ. अली ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि महिलाएं युद्धभूमि से लेकर अंतरिक्ष तक हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी हैं और इस तरह के बयान न केवल गलत हैं, बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी निराधार हैं।

विवाद की जड़: क्या कहा था ग्रैंड मुफ्ती ने

ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबकर अहमद ने अपने बयान में महिलाओं की तुलना घर में संरक्षित रखे जाने वाले गहनों से करते हुए उनकी 'सुरक्षा' की आवश्यकता पर जोर दिया था। इस बयान के सार्वजनिक होते ही व्यापक विरोध शुरू हो गया। आलोचकों का कहना है कि इस प्रकार की भाषा महिलाओं की स्वायत्तता और आत्मनिर्भरता को सीमित करने का प्रयास है।

डॉ. शालिनी अली की प्रतिक्रिया

डॉ. अली ने कहा, 'सबसे पहले तो हम इस बात पर आपत्ति जताते हैं कि ग्रैंड मुफ्ती साहब ने बहुत गलत बयान दिया है। उनका यह कहना कि महिलाएं गहनों की तरह होती हैं और उनकी सुरक्षा की जानी चाहिए, यह भूल जाता है कि महिलाएं हमेशा से आगे बढ़ती रही हैं और कामयाबी हासिल करती रही हैं — चाहे वह युद्ध का मैदान हो, डॉक्टर के तौर पर इलाज करना हो, चांद-तारों तक पहुंचना हो या अंतरिक्ष यान में सफर करना हो।'

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस तरह के बयान धार्मिक आधार पर भी टिकाऊ नहीं हैं। डॉ. अली के अनुसार, 'यह कहना गलत है कि महिलाएं गहनों की तरह हैं और उन्हें सुरक्षा की जरूरत है। न तो कुरान में इसका जिक्र है और न ही कोई ऐसी हदीस है, जिसमें कहा गया हो कि सुरक्षा के बहाने हमें उनकी आत्मनिर्भर जिंदगी को सीमित करना चाहिए। जो लोग उनका समर्थन कर रहे हैं, वह भी गलत है।'

महिला सशक्तिकरण पर डॉ. अली का स्पष्ट संदेश

डॉ. अली ने कहा कि यदि किसी को वास्तव में महिलाओं की चिंता है, तो उन्हें आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'अगर किसी को लगता है कि औरतों को सुरक्षा की जरूरत है तो वह उनको प्रोवाइड कर सकते हैं। औरतों को आगे का रास्ता दिखा सकते हैं ताकि वह पढ़ाई करके अपने पैरों पर खड़ी हो सकें। उन्हें प्रेरणा दे सकते हैं, लेकिन यह कहना कि औरतों को पढ़ना नहीं चाहिए और तीन बच्चे पैदा करने से वह जन्नत चली जाएंगी — ऐसे बयान बहुत ही बेतुके हैं और गलत हैं।'

दिशा सालियान केस: सीबीआई जांच के आदेश का स्वागत

इसी अवसर पर डॉ. शालिनी अली ने दिशा सालियान रेप केस की जांच सीबीआई को सौंपे जाने के उच्च न्यायालय के निर्देश का स्वागत किया। उन्होंने कहा, 'जांच जिस तरह से शुरू हुई थी, उसमें विवाद देखने को मिला था। कई बार स्टेटमेंट बदले गए थे और उनके पिता ने भी अपने बयान वापस लिए थे। मुझे लगता है कि क्लैरिटी की बहुत ज्यादा जरूरत है। अगर आज हाई कोर्ट ने ऐसा बोला है कि सीबीआई को यह जांच सौंप देनी चाहिए तो यह बहुत अच्छी बात है।'

डॉ. अली ने सभी पक्षों से इस आदेश में सहयोग करने की अपील की, ताकि मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब महिला अधिकारों और धार्मिक बयानों को लेकर सार्वजनिक बहस तेज हो रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या वे महज मीडिया विवाद बनकर रह जाते हैं। डॉ. अली की आलोचना धार्मिक आधार पर टिकी है, जो इसे और प्रभावशाली बनाती है — लेकिन मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस धार्मिक तर्क की गहराई को नजरअंदाज कर देती है। दिशा सालियान केस का इसी संदर्भ में उठाया जाना यह दर्शाता है कि महिलाओं के प्रति न्याय और सम्मान की माँग एक ही सामाजिक धारा में बह रही है।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबकर अहमद ने महिलाओं के बारे में क्या कहा था?
ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबकर अहमद ने महिलाओं की तुलना घर में रखे जाने वाले गहनों से की थी और उनकी सुरक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया था। इस बयान को लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं और आलोचकों में व्यापक नाराजगी देखी जा रही है।
डॉ. शालिनी अली ने ग्रैंड मुफ्ती के बयान पर क्या आपत्ति जताई?
डॉ. शालिनी अली ने कहा कि यह बयान धार्मिक रूप से भी गलत है — न कुरान में और न किसी हदीस में महिलाओं की आत्मनिर्भर जिंदगी को सीमित करने का उल्लेख है। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाएं युद्धभूमि से लेकर अंतरिक्ष तक हर क्षेत्र में सफलता हासिल कर चुकी हैं।
क्या महिलाओं को 'गहनों जैसा' बताना इस्लाम में उचित है?
डॉ. शालिनी अली के अनुसार, कुरान या किसी हदीस में ऐसा कोई उल्लेख नहीं है जो सुरक्षा के नाम पर महिलाओं की स्वायत्तता को सीमित करने की बात करे। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे बयान धर्म के नाम पर गलत व्याख्या हैं।
दिशा सालियान केस में सीबीआई जांच पर डॉ. अली ने क्या कहा?
डॉ. शालिनी अली ने उच्च न्यायालय के उस आदेश का स्वागत किया जिसमें दिशा सालियान रेप केस की जांच सीबीआई को सौंपने का निर्देश दिया गया। उन्होंने कहा कि इस मामले में पहले से बयान बदले जाते रहे हैं, इसलिए स्वतंत्र जांच जरूरी है।
महिलाओं की सुरक्षा पर डॉ. शालिनी अली का क्या सुझाव है?
डॉ. अली का कहना है कि यदि महिलाओं की सुरक्षा की वास्तविक चिंता है, तो उन्हें शिक्षा और आत्मनिर्भरता के अवसर दिए जाने चाहिए। 'सुरक्षा' के नाम पर उनकी पढ़ाई या स्वतंत्रता को सीमित करना सर्वथा अनुचित है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 दिन पहले
  2. 2 दिन पहले
  3. 2 दिन पहले
  4. 2 दिन पहले
  5. 2 दिन पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले