गुजरात में खुरपका-मुंहपका रोग का प्रसार 3 प्रतिशत तक घटा, टीकाकरण से बढ़ी ‘हर्ड इम्युनिटी’

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गुजरात में खुरपका-मुंहपका रोग का प्रसार 3 प्रतिशत तक घटा, टीकाकरण से बढ़ी ‘हर्ड इम्युनिटी’

सारांश

गुजरात ने खुरपका-मुंहपका रोग के प्रसार को 3 प्रतिशत तक घटा दिया है। इस सफलता का श्रेय व्यापक टीकाकरण अभियान को दिया गया है, जो किसानों की आय और पशु स्वास्थ्य में सुधार कर रहा है।

Key Takeaways

  • गुजरात में खुरपका-मुंहपका रोग का प्रसार 3 प्रतिशत तक घटा है।
  • टीकाकरण अभियान ने ‘हर्ड इम्युनिटी’ में सुधार किया है।
  • किसानों की आय में वृद्धि हो रही है।
  • पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है।
  • रोग नियंत्रण के लिए बायो-सिक्योरिटी उपायों का पालन किया जा रहा है।

गांधीनगर, 18 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। गुजरात में पशुओं में फैलने वाले खुरपका-मुंहपका रोग (एफएमडी) के प्रसार को अब केवल 3 प्रतिशत तक सीमित किया गया है, जबकि 2025 तक लगभग 80 प्रतिशत ‘हर्ड इम्युनिटी’ हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों ने इस सफलता का श्रेय व्यापक स्तर पर चलाए जा रहे टीकाकरण अभियान को दिया है।

यह सफलता ऐसे समय में आई है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत 2030 तक एफएमडी-मुक्त बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में चलाए जा रहे इस अभियान का मुख्य उद्देश्य पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार करना और किसानों की आय को बढ़ाना है।

अधिकारियों के मुताबिक, राज्य में दूध उत्पादन में सुधार का एक बड़ा कारण बेहतर पशु चिकित्सा सेवाएं और रोग नियंत्रण उपाय हैं। गांधीनगर जिले के लोद्रा गांव के किसान जिगर पटेल ने कहा कि उनके 32 पशुओं का हर छह महीने में मुफ्त टीकाकरण किया जाता है, जिससे दूध उत्पादन में वृद्धि होती है।

लोद्रा दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति के सचिव महेंद्र पटेल के अनुसार, गांव में 1,700 से अधिक पशुओं में से लगभग 50 प्रतिशत का टीकाकरण हो चुका है और यह प्रयास जारी है।

राज्यभर में पशुपालन विभाग और डेयरी सहकारी समितियों के हजारों कर्मचारी गांवों, खेतों और गौशालाओं में टीकाकरण कार्य कर रहे हैं। यह अभियान केंद्र सरकार के राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत चलाया जा रहा है, जिसकी शुरुआत 11 सितंबर 2019 को हुई थी।

गुजरात पशुपालन विभाग की निदेशक डॉ. फाल्गुनी ठाकर ने बताया कि 1 मार्च से नया टीकाकरण अभियान शुरू हुआ है, जो साल में दो बार आयोजित किया जाता है। उन्होंने कहा कि मामलों की लगातार गिरावट और वायरस के कम प्रसार से इस अभियान की सफलता स्पष्ट है।

उन्होंने यह भी बताया कि हाल के वर्षों में राज्य में केवल कुछ ही मामलों की पहचान की गई है और उनकी गंभीरता भी कम रही है। टीकाकरण और बायो-सिक्योरिटी उपायों के चलते 2025 में वायरस का प्रसार केवल 3 प्रतिशत तक सीमित रहा।

खुरपका-मुंहपका एक अत्यधिक संक्रामक वायरल रोग है, जो पशुओं में बुखार, मुंह और पैरों में छाले उत्पन्न करता है। इससे भूख कम, वजन घटने और दूध उत्पादन में कमी आती है, जिससे किसानों को आर्थिक हानि होती है।

गुजरात में लगभग 2 करोड़ गाय-भैंसें हैं, जिनमें से 1.71 करोड़ टीकाकरण के लिए योग्य हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में राज्य में 337.52 लाख पशुओं का टीकाकरण किया जाएगा।

इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन के तहत पशुओं को 12 अंकों के यूनिक ईयर टैग देकर ‘भारत पशुधन’ पोर्टल पर पंजीकरण किया जा रहा है, जिससे उनके स्वास्थ्य और टीकाकरण की निगरानी सरल हो गई है।

अधिकारियों के अनुसार, देश में एफएमडी से हर साल लगभग 24,000 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होता है। इस प्रकार, निरंतर टीकाकरण और सुरक्षा उपायों से न केवल बीमारी पर नियंत्रण मिलेगा, बल्कि दूध उत्पादन में वृद्धि होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

Point of View

बल्कि पूरे ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए सभी संबंधित अधिकारियों का प्रयास सराहनीय है।
NationPress
19/03/2026

Frequently Asked Questions

खुरपका-मुंहपका रोग क्या है?
खुरपका-मुंहपका एक अत्यधिक संक्रामक वायरल रोग है, जिससे पशुओं में बुखार, मुंह और पैरों में छाले पड़ते हैं।
गुजरात में टीकाकरण अभियान कब शुरू हुआ?
गुजरात में टीकाकरण अभियान 1 मार्च से शुरू हुआ है, जो साल में दो बार होता है।
इस अभियान के अंतर्गत कितने पशुओं को टीका लगाया गया है?
अभियान के तहत राज्य में 337.52 लाख पशुओं को कवर किया जाएगा।
टीकाकरण से क्या लाभ होता है?
टीकाकरण से वायरस का प्रसार कम होता है और दूध उत्पादन में वृद्धि होती है।
क्या खुरपका-मुंहपका रोग से आर्थिक नुकसान होता है?
जी हां, इस रोग से देश में हर साल लगभग 24,000 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होता है।
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