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साबरकांठा में 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम: बैंककर्मी और पुलिस ने 75 वर्षीय दंपति को ₹2 लाख व 25 तोला सोना गँवाने से बचाया

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साबरकांठा में 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम: बैंककर्मी और पुलिस ने 75 वर्षीय दंपति को ₹2 लाख व 25 तोला सोना गँवाने से बचाया

सारांश

साबरकांठा में 75 वर्षीय दंपति को 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर 25 तोला सोना और ₹2 लाख ठगने की कोशिश हुई। एक्सिस बैंककर्मी की सतर्कता और साइबर पुलिस के त्वरित हस्तक्षेप ने यह ठगी नाकाम की — यह मामला बुजुर्गों को निशाना बनाने वाले इस बढ़ते खतरे की गंभीर चेतावनी है।

मुख्य बातें

साबरकांठा (गुजरात) में 75 वर्षीय बुजुर्ग दंपति को 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम से बचाया गया।
ठगों ने मुंबई पुलिस अधिकारी बनकर वीडियो कॉल के ज़रिए दंपति को 25 तोला सोना और ₹2 लाख देने के लिए मजबूर किया।
एक्सिस बैंक के एक कर्मचारी ने दंपति की परेशानी भाँपकर साबरकांठा साइबर क्राइम पुलिस को सूचित किया।
उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने पुलिस को साइबर पीड़ितों की तत्काल सहायता के निर्देश दिए हैं।
पुलिस ने स्पष्ट किया: कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर जाँच नहीं करती; संदिग्ध कॉल पर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।

साबरकांठा (गुजरात) में 75 वर्षीय एक बुजुर्ग दंपति को 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम का शिकार होने से बाल-बाल बचाया गया। साइबर ठग उनसे 25 तोला सोना और ₹2 लाख नकद ऐंठने ही वाले थे कि एक्सिस बैंक के एक सतर्क कर्मचारी ने संदेह होने पर पुलिस को सूचित किया और साबरकांठा साइबर क्राइम पुलिस ने समय रहते हस्तक्षेप कर दंपति को बड़े आर्थिक नुकसान से बचा लिया।

कैसे रचा गया जाल

साबरकांठा साइबर क्राइम पुलिस के अनुसार, ठगों ने मुंबई पुलिस के अधिकारी बनकर पीड़ित रसिकभाई मोदी से संपर्क किया। उन्होंने झूठा दावा किया कि रसिकभाई के आधार कार्ड से जुड़े एक सिम कार्ड का उपयोग 'नरेश गोयल' नाम के व्यक्ति से संबंधित वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में हुआ है। इसके बाद ठगों ने लगातार वीडियो कॉल के ज़रिए दंपति को 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा और कानूनी कार्रवाई की धमकी देते हुए मामले से नाम हटाने के बदले मोटी रकम की माँग की।

सोना पिघलाने और FD तुड़वाने का निर्देश

पुलिस के अनुसार, साइबर ठगों ने कथित तौर पर पीड़ित दंपति को निर्देश दिया कि वे 25 तोला सोना पिघलाकर सोने के बिस्कुट बनवाएँ और ₹2 लाख की फिक्स्ड डिपॉजिट तुड़वाएँ। यह रकम जुटाने के लिए जब दंपति एक्सिस बैंक की एक शाखा पहुँचे, तभी इस ठगी का पर्दाफाश हुआ।

बैंककर्मी की सतर्कता और पुलिस का त्वरित दखल

बैंक शाखा में मौजूद एक कर्मचारी ने देखा कि बुजुर्ग दंपति असामान्य रूप से परेशान और घबराए हुए हैं। कुछ गड़बड़ होने का अंदेशा होते ही उन्होंने तत्काल साबरकांठा साइबर क्राइम पुलिस को सूचना दी। कुछ ही देर में साइबर क्राइम टीम बैंक पहुँची, दंपति से बात की और उन्हें समझाया कि वे एक सुनियोजित साइबर धोखाधड़ी के जाल में फँसाए जा रहे थे। पुलिस के समय पर हस्तक्षेप से दंपति का सोना और नकदी — दोनों सुरक्षित रहे।

सरकार और पुलिस की प्रतिक्रिया

गुजरात के उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने पुलिस को निर्देश दिए हैं कि साइबर धोखाधड़ी के खतरे में पड़े नागरिकों को तत्काल सहायता मुहैया कराई जाए। उन्होंने हाल ही में वरिष्ठ पुलिस और बैंक अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की थी, जिसका उद्देश्य आपसी तालमेल मज़बूत करना और वित्तीय धोखाधड़ी रोकने के ठोस उपाय लागू करना था। पुलिस ने नागरिकों को स्पष्ट किया है कि कोई भी पुलिस बल या सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल के ज़रिए जाँच नहीं करती और न ही आपराधिक मामलों को निपटाने के लिए पैसे की माँग करती है।

बुजुर्गों को निशाना बनाता 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। इन स्कैम में ठग खुद को कानून-प्रवर्तन एजेंसियों या सरकारी अधिकारियों के रूप में पेश करते हैं और पीड़ितों पर झूठे आपराधिक आरोप लगाकर उन्हें डराते-धमकाते हैं। गौरतलब है कि बुजुर्ग नागरिक इस तरह के मनोवैज्ञानिक दबाव के सबसे आसान निशाने होते हैं। पुलिस ने अपील की है कि किसी भी संदिग्ध कॉल की स्थिति में नागरिक तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएँ।

संपादकीय दृष्टिकोण

तेज़ी से फैलता उद्योग बन चुका है जो बुजुर्गों की कानूनी प्रणाली से अनभिज्ञता और मनोवैज्ञानिक कमज़ोरी का फायदा उठाता है। साबरकांठा का यह मामला इसलिए उल्लेखनीय है क्योंकि इसे एक बैंककर्मी ने रोका — न कि किसी तकनीकी प्रणाली ने — जो दर्शाता है कि मानवीय सतर्कता अभी भी सबसे प्रभावी ढाल है। सरकार और बैंकों के बीच समन्वय की यह मिसाल सराहनीय है, लेकिन असली सवाल यह है कि जब तक ऐसी घटनाएँ बैंक तक नहीं पहुँचतीं — घर के भीतर ही निपट जाती हैं — तब क्या होगा? बुजुर्ग नागरिकों के लिए सक्रिय डिजिटल साक्षरता अभियान और सामुदायिक स्तर पर जागरूकता के बिना, ऐसे बचाव प्रयास सिर्फ संयोग पर निर्भर रहेंगे।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम क्या होता है?
'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम में ठग खुद को पुलिस, CBI या अन्य सरकारी अधिकारी बताकर वीडियो कॉल के ज़रिए पीड़ित को झूठे आपराधिक मामले में फँसाने की धमकी देते हैं और पैसे या कीमती सामान की माँग करते हैं। पीड़ित को मनोवैज्ञानिक दबाव में रखा जाता है ताकि वह किसी से मदद न माँग सके।
साबरकांठा में बुजुर्ग दंपति के साथ क्या हुआ?
ठगों ने मुंबई पुलिस अधिकारी बनकर 75 वर्षीय रसिकभाई मोदी को वीडियो कॉल किया और दावा किया कि उनके आधार से जुड़े सिम का उपयोग वित्तीय धोखाधड़ी में हुआ है। मामले से नाम हटाने के बदले 25 तोला सोना और ₹2 लाख नकद की माँग की गई, लेकिन एक्सिस बैंककर्मी की सतर्कता और साइबर पुलिस के हस्तक्षेप से ठगी नाकाम हो गई।
इस स्कैम में बैंककर्मी की क्या भूमिका रही?
जब दंपति रकम जुटाने के लिए एक्सिस बैंक शाखा पहुँचे तो एक कर्मचारी ने उनकी घबराहट देखकर संदेह किया और तुरंत साबरकांठा साइबर क्राइम पुलिस को सूचित किया। यह सतर्कता ठगी रोकने में निर्णायक साबित हुई।
डिजिटल अरेस्ट स्कैम का शिकार होने पर क्या करें?
साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत कॉल करें या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएँ। याद रखें — कोई भी असली पुलिस या सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर जाँच नहीं करती और न ही पैसे माँगती है।
सरकार ने इस तरह के स्कैम रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
गुजरात के उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने पुलिस को साइबर धोखाधड़ी के जोखिम में पड़े नागरिकों की तत्काल सहायता के निर्देश दिए हैं। उन्होंने वरिष्ठ पुलिस और बैंक अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी की है, जिसका उद्देश्य पुलिस-बैंक समन्वय को मज़बूत कर वित्तीय धोखाधड़ी रोकना है।
राष्ट्र प्रेस
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