4 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

ग्वालियर में एचपीवी वैक्सीन से बच्चियों की तबीयत खराब होने का दावा निराधार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ग्वालियर में एचपीवी वैक्सीन से बच्चियों की तबीयत खराब होने का दावा निराधार

सारांश

ग्वालियर में एचपीवी वैक्सीन से बच्चियों की तबीयत खराब होने का दावा पूरी तरह निराधार है। पीआईबी फैक्ट चेक ने इस पर सफाई दी है कि टीकाकरण की सभी प्रक्रियाएं सही तरीके से की गई थीं। जानें और क्या कहा गया है।

मुख्य बातें

बालिकाओं को एचपीवी वैक्सीन लगने से कोई समस्या नहीं हुई।
टीकाकरण प्रक्रिया में सभी सुरक्षा उपायों का पालन किया गया।
जिस कारण से तबीयत बिगड़ी, वह बाहर का खाना था।
सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों पर ध्यान न दें।
सरकारी स्रोतों पर भरोसा करें।

नई दिल्ली, 12 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मध्यप्रदेश के ग्वालियर से एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में कहा जा रहा है कि ग्वालियर में बालिकाओं को उनके माता-पिता की अनुमति के बिना एचपीवी वैक्सीन दी गई, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। लेकिन पीआईबी फैक्ट चेक ने इस दावे को पूरी तरह से गलत और भ्रामक बताया है।

पीआईबी फैक्ट चेक ने अपने आधिकारिक एक्स खाते पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर फैल रहा यह दावा तथ्यहीन है। एजेंसी का कहना है कि बालिकाओं को टीका लगाने से पहले सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया गया था और अभिभावकों से सहमति भी ली गई थी।

वास्तव में, 8 मार्च 2026 को ग्वालियर जिले के डबरा विकासखंड के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पिछौर में एचपीवी वैक्सीनेशन सत्र आयोजित किया गया था। इस सत्र में चारकरी गांव और आसपास के क्षेत्रों की किशोरी बालिकाओं को वैक्सीन लगाई गई। टीकाकरण से पूर्व आशा कार्यकर्ता ने माता-पिता को वैक्सीन के बारे में विस्तार से जानकारी दी थी। इसके बाद ही नौ किशोरियों को टीकाकरण के लिए स्वास्थ्य केन्द्र लाया गया।

जानकारी के अनुसार, बालिकाओं को उनके अभिभावकों के साथ वाहन द्वारा स्वास्थ्य केन्द्र लाया गया था। टीकाकरण से पहले सभी बालिकाओं का पंजीकरण यू-विन पोर्टल पर किया गया। इसके बाद वैक्सीन लगाई गई और फिर करीब आधे घंटे तक सभी को निगरानी में रखा गया ताकि किसी भी समस्या का तुरंत समाधान किया जा सके।

जब यह प्रक्रिया पूरी हुई, तो बालिकाओं को उसी वाहन से वापस गांव भेज दिया गया। रास्ते में गिजौरी तिराहे के पास कुछ बालिकाओं ने खाने की इच्छा जताई। वाहन रोककर उन्होंने बाहर से स्नैक्स खाया और फिर अपने गांव लौट गईं। आशा कार्यकर्ता के अनुसार उस समय सभी बालिकाएं पूरी तरह से स्वस्थ थीं।

दो दिन बाद यानी 10 मार्च की शाम को चार बच्चियां पूनम, अंजली, रेखा और रजनी पेट दर्द और उल्टी की शिकायत लेकर पुनः प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पहुंचीं। वहां डॉक्टरों ने उनका तुरंत इलाज किया और उन्हें बाहर का खाना न खाने और आराम करने की सलाह दी। प्राथमिक उपचार के बाद सभी बच्चियों की हालत बेहतर हो गई और वे अब पूरी तरह स्वस्थ हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि बालिकाओं की तबीयत खराब होने का कारण वैक्सीन नहीं बल्कि बाहर का खाना हो सकता है। इसलिए यह कहना कि एचपीवी वैक्सीन की वजह से उनकी स्थिति बिगड़ी, पूरी तरह से गलत और भ्रामक है।

पीआईबी फैक्ट चेक ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली किसी भी जानकारी पर तुरंत भरोसा न करें। सही जानकारी के लिए हमेशा सरकारी या आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करना चाहिए, ताकि अफवाहों से बचा जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

और हमें अफवाहों से बचना होगा।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या एचपीवी वैक्सीन लगने से बच्चियों की तबीयत खराब हुई?
नहीं, स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि बच्चियों की तबीयत खराब होने का कारण वैक्सीन नहीं बल्कि बाहर का खाना हो सकता है।
क्या माता-पिता की अनुमति के बिना वैक्सीन दी गई?
पीआईबी फैक्ट चेक के अनुसार, वैक्सीनेशन से पहले माता-पिता से सहमति ली गई थी।
क्या टीकाकरण प्रक्रिया में कोई कमी थी?
टीकाकरण प्रक्रिया में सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया गया था।
बालिकाओं को कब वैक्सीन लगाई गई?
बालिकाओं को 8 मार्च 2026 को वैक्सीन लगाई गई।
सोशल मीडिया पर फैली जानकारी पर भरोसा करना चाहिए?
नहीं, हमेशा सरकारी या आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 5 महीने पहले