मानसून सत्र हंगामे की भेंट चढ़ सकता है, केंद्र पर आरोपों की बौछार: हन्नान मोल्लाह
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के पूर्व सांसद हन्नान मोल्लाह ने 19 जुलाई को संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से पूर्व चेतावनी दी कि मौजूदा राजनीतिक माहौल को देखते हुए यह सत्र लंबे समय तक नहीं चल पाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पर भ्रष्टाचार, घोटालों, सांप्रदायिक राजनीति और लोकतंत्र-विरोधी गतिविधियों के एक के बाद एक आरोप लग रहे हैं, जो संसदीय कामकाज को बाधित कर सकते हैं।
मुख्य घटनाक्रम
मोल्लाह ने कहा कि सत्र शुरू होने से पहले ही जिस तरह के सवाल उठ रहे हैं, उससे साफ है कि सदन में चर्चा कम और हंगामा अधिक होगा। उनके अनुसार, विपक्ष के पास उठाने के लिए कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, लेकिन यह अस्पष्ट है कि सरकार उन्हें सुनने के लिए तैयार है या नहीं।
राम मंदिर विवाद पर विपक्ष की माँग
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता व कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा राम मंदिर मुद्दे पर प्रधानमंत्री को पत्र लिखे जाने के बारे में पूछे जाने पर मोल्लाह ने कहा कि यह कोई नई माँग नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष लंबे समय से इस मामले में पारदर्शिता और जाँच की माँग करता रहा है। मोल्लाह ने आरोप लगाया कि राम मंदिर से जुड़ी कथित अनियमितताओं में केवल निचले स्तर के कर्मचारियों की भूमिका नहीं हो सकती — इसमें प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता की भी जाँच होनी चाहिए।
विपक्षी दलों को कमज़ोर करने का आरोप
मोल्लाह ने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) विपक्षी दलों को कमज़ोर करने की सुनियोजित कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, बिहार और अन्य राज्यों में विपक्षी दलों को तोड़ने की कोशिशें हुई हैं और अब पश्चिम बंगाल में भी ऐसी गतिविधियाँ देखने को मिल रही हैं। उनके अनुसार, यह रणनीति इसलिए अपनाई जा रही है ताकि सरकार को संसद में जनविरोधी और मज़दूर-विरोधी विधेयक पारित कराने के लिए पर्याप्त बहुमत मिल सके।
वंदे मातरम विधेयक पर आपत्ति
वंदे मातरम से जुड़े प्रस्तावित विधेयक पर मोल्लाह ने कहा कि यह सरकार की नीति का हिस्सा है, लेकिन उन्होंने इसे सांप्रदायिक और विभाजनकारी करार दिया। उनका कहना था कि ऐसे कदम देश के संवैधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक परंपराओं के विरुद्ध हैं। मोल्लाह के अनुसार, सरकार विभिन्न विचारों को स्वीकार करने के बजाय अपनी विचारधारा थोपने की कोशिश कर रही है।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब मानसून सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने की सरकार की योजना है। आलोचकों का कहना है कि यदि विपक्ष के सवालों का समुचित जवाब नहीं दिया गया, तो सत्र में गतिरोध अपरिहार्य होगा। संसदीय कार्यवाही की दिशा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार और विपक्ष के बीच किसी सहमति की गुंजाइश बनती है या नहीं।