हरियाणा कैबिनेट का बड़ा फैसला: EWS घरों पर स्टाम्प ड्यूटी घटाकर ₹500 प्रति डीड, MSME नीति से ₹55,000 करोड़ निवेश का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हरियाणा कैबिनेट ने मंगलवार, 28 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री आवास योजना-अर्बन 2.0 (PMAY-U 2.0) के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) के लिए 60 वर्ग मीटर तक के आवासीय घरों की रजिस्ट्री पर स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस को घटाकर प्रति डीड ₹500 करने का निर्णय लिया। इसी बैठक में कैबिनेट ने हरियाणा प्रोग्रेसिव MSME और एक्सपोर्ट प्रमोशन पॉलिसी 2026 को भी मंजूरी दी, जिसका लक्ष्य राज्य में ₹55,000 करोड़ का निवेश आकर्षित करना है।
स्टाम्प ड्यूटी में कटौती: क्या बदला
सरकारी बयान के अनुसार, यह समय-सीमाबद्ध विशेष योजना EWS लाभार्थियों पर लेन-देन की लागत और आर्थिक बोझ कम करने के लिए लागू की गई है। अब तक राज्य में कन्वेयंस डीड पर इंडियन स्टाम्प एक्ट, 1899 की अनुसूची 1-'ए' के आर्टिकल 23-ए के तहत 5% स्टाम्प ड्यूटी के साथ 2% अतिरिक्त ड्यूटी भी लागू थी। महिलाओं के नाम पर संपत्ति हस्तांतरण पर 2% की छूट मिलती थी। रजिस्ट्रेशन फीस स्लैब-आधारित थी, जिसकी अधिकतम सीमा ₹50,000 थी।
नई व्यवस्था के तहत पात्र EWS घरों की कन्वेयंस डीड पर स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस दोनों को घटाकर प्रति डीड ₹500 कर दिया गया है। यह कदम 'सभी के लिए आवास' के केंद्रीय लक्ष्य को ज़मीन पर उतारने की दिशा में राज्य का सीधा हस्तक्षेप है।
MSME और एक्सपोर्ट नीति: छह रणनीतिक स्तंभ
हरियाणा प्रोग्रेसिव MSME और एक्सपोर्ट प्रमोशन पॉलिसी 2026 को 'संकल्प पत्र' के वादों को 'विजन 2047' से जोड़ने और केंद्र सरकार के RAMP (Raising and Accelerating MSME Performance) कार्यक्रम के साथ तालमेल बिठाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इस नीति में 60 परिवर्तनकारी पहलें शामिल हैं, जो छह रणनीतिक स्तंभों पर आधारित हैं: वित्त, अवसंरचना, प्रौद्योगिकी, निर्यात, सस्टेनेबिलिटी और कौशल विकास।
यह नीति हरियाणा के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के उद्यमों को लाभ पहुँचाने के लिए डिज़ाइन की गई है। इसमें जिन प्रमुख क्षेत्रों को लक्षित किया गया है, उनमें ऑटोमोटिव और ऑटो कंपोनेंट्स, इलेक्ट्रिक वाहन, एयरोस्पेस और डिफेंस, जनरल इंजीनियरिंग, मेटल प्रोडक्ट्स और स्टील फैब्रिकेशन, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट्स, फार्मास्यूटिकल्स और मेडिकल डिवाइसेज, रबर और प्लास्टिक (खिलौने और स्पोर्ट्स सामान सहित), फुटवियर और लेदर, रिन्यूएबल एनर्जी, सर्कुलर इकोनॉमी, टेक्सटाइल्स और अपैरल, तथा कृषि-आधारित एवं फूड प्रोसेसिंग उद्योग शामिल हैं।
हरियाणा लोकल ऑडिट बिल 2026 को भी मंजूरी
कैबिनेट ने हरियाणा लोकल ऑडिट बिल, 2026 के मसौदे को भी स्वीकृति दी। इस विधेयक का उद्देश्य राज्य की सभी स्थानीय निकायों, संस्थाओं, संस्थानों और सार्वजनिक निधियों के लिए एक सक्षम और कुशल ऑडिट प्रणाली स्थापित करना है। इससे स्थानीय निधियों के व्यय पर बेहतर जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
आम जनता पर असर
स्टाम्प ड्यूटी में यह कटौती उन EWS परिवारों के लिए सीधी राहत है, जो PMAY-U 2.0 के तहत सब्सिडी वाले घर खरीद रहे हैं। पहले एक घर की रजिस्ट्री पर हज़ारों रुपये का अतिरिक्त खर्च आता था; अब यह बोझ नाममात्र का रह जाएगा। MSME नीति के तहत यदि ₹55,000 करोड़ का निवेश लक्ष्य हासिल होता है, तो यह राज्य में रोज़गार और निर्यात दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
गौरतलब है कि हरियाणा पहले से ही ऑटोमोटिव और मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित है, और यह नई नीति उस आधार को और मज़बूत करने की कोशिश है। आने वाले महीनों में इन निर्णयों के क्रियान्वयन की दिशा तय होगी।