हजारीबाग में बच्ची की हत्या का रहस्य उजागर, मां ने तांत्रिक के साथ मिलकर चढ़ाई नरबलि
सारांश
Key Takeaways
- मां ने तांत्रिक के कहने पर अपनी बेटी की बलि चढ़ाई।
- पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया।
- समाज में अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता की आवश्यकता।
- यह घटना झारखंड में आक्रोश फैलाने वाली बन गई।
- हाईकोर्ट ने मामले पर स्वतः संज्ञान लिया।
हजारीबाग, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड के हजारीबाग जिले की विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र में एक सप्ताह पहले 13 वर्षीय बच्ची के नृशंस हत्या का मामला अब सुलझ गया है। झारखंड की डीजीपी के निर्देश पर गठित विशेष जांच टीम (एसआईटी) की जांच में यह खुलासा हुआ है कि बच्ची की 'नरबलि' तांत्रिक क्रिया के दौरान दी गई थी, और इस भयानक साजिश में उसकी मां भी शामिल थी।
पुलिस ने इस मामले में मृतका की मां रेशमी देवी, महिला तांत्रिक (भगतिनी) शांति देवी, और उसके सहयोगी भीम राम को गिरफ्तार किया है। हजारीबाग के एसपी अंजनी अंजन ने बुधवार रात को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मामले का खुलासा किया।
पुलिस के अनुसार, मृतका की मां रेशमी देवी अपने बेटे की शारीरिक और मानसिक समस्याओं से चिंतित थी और पिछले करीब एक साल से गांव की तांत्रिक शांति देवी के संपर्क में थी। तांत्रिक ने उसे विश्वास दिलाया कि बेटे के ठीक होने के लिए 'कुंवारी कन्या' की बलि आवश्यक है। इसी अंधविश्वास के चलते मां ने अपनी ही बेटी की हत्या की योजना बनाई।
यह घटना 24 मार्च की रात की है, जब कुसुंबा गांव में रामनवमी से पहले 'मंगला जुलूस' निकाला जा रहा था। इस दौरान मां ने अपनी बेटी को बहला-फुसलाकर तांत्रिक के घर ले गई। वहां तांत्रिक क्रिया के बाद बच्ची को गांव के पास बांस की झाड़ियों में ले जाया गया।
पुलिस के अनुसार, तांत्रिक के आदेश पर उसके सहयोगी भीम राम ने बच्ची का गला घोंट दिया, जबकि मां ने उसके पैर पकड़े थे ताकि वह विरोध न कर सके। हत्या के बाद तांत्रिक क्रिया पूरी करने के नाम पर बच्ची के शव के साथ बर्बरता की गई, जिसमें बच्ची के निजी अंग से खून निकालकर पूजा की गई।
मामले को दूसरी दिशा देने के लिए मृतका की मां ने घटना के दूसरे दिन धनेश्वर पासवान नामक व्यक्ति के खिलाफ दुष्कर्म और हत्या का झूठा आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी। 25 मार्च को पुलिस ने बच्ची का शव बांस की झाड़ियों से बरामद किया। प्रारंभिक जांच में ही पुलिस को मामला संदिग्ध लगा, जिसके बाद डीजीपी के निर्देश पर एसआईटी का गठन किया गया।
टीम ने तकनीकी साक्ष्यों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और अन्य वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग करके पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में अपने अपराध को स्वीकार कर लिया है। घटना के बाद झारखंड में आक्रोश फैल गया था।
भारतीय जनता पार्टी ने इसे 'निर्भया-2' कांड बताते हुए 30 मार्च को हजारीबाग बंद बुलाया था, जिसका जिले में व्यापक असर पड़ा। इस वारदात पर झारखंड हाईकोर्ट ने भी स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य के गृह सचिव और जिले के एसपी से जवाब मांगा था।