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शिमला में दृष्टिहीन संघ का चक्का जाम, 976 दिनों से जारी आंदोलन — बैकलॉग पद भरने और सहारा योजना बहाली की मांग

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शिमला में दृष्टिहीन संघ का चक्का जाम, 976 दिनों से जारी आंदोलन — बैकलॉग पद भरने और सहारा योजना बहाली की मांग

सारांश

976 दिनों से जारी इस आंदोलन ने शिमला सचिवालय के बाहर एक बार फिर यातायात ठप किया। दृष्टिबाधित समुदाय की माँग साफ है — बैकलॉग पदों की भर्ती हो और 12 महीने से बंद सहारा योजना तत्काल बहाल हो। 1 लाख 55 हजार दिव्यांगजनों की आवाज़ अब तक अनसुनी है।

मुख्य बातें

ब्लाइंड पीपुल्स एसोसिएशन ने 16 जून 2026 को शिमला सचिवालय के पास चक्का जाम कर यातायात बाधित किया।
दृष्टिबाधित समुदाय का यह आंदोलन 976 दिनों से अधिक समय से जारी है।
एसोसिएशन अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कई विभागों में चतुर्थ श्रेणी के बैकलॉग पद वर्षों से रिक्त रहने का आरोप लगाया।
पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के कार्यकाल में शुरू 'सहारा योजना' पिछले 12 महीनों से बंद है।
हिमाचल प्रदेश में दिव्यांगजनों की कुल जनसंख्या 1 लाख 55 हजार बताई गई है।

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में मंगलवार, 16 जून 2026 को ब्लाइंड पीपुल्स एसोसिएशन के सदस्यों ने सचिवालय के निकट चक्का जाम कर यातायात ठप कर दिया। प्रदर्शनकारी 976 दिनों से अधिक समय से बैकलॉग पदों की भर्ती और दिव्यांगजनों के लिए कल्याणकारी योजनाओं की बहाली की माँग कर रहे हैं। इस विरोध प्रदर्शन ने एक बार फिर राज्य सरकार की दिव्यांग नीति को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

मुख्य घटनाक्रम

ब्लाइंड पीपुल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने बताया कि दृष्टिबाधित समुदाय का यह आंदोलन 976 दिनों से निरंतर जारी है। उनके अनुसार, प्रदेश सरकार की ओर से दिव्यांगजनों के साथ 'सौतेला व्यवहार' किया जा रहा है। चक्का जाम के कारण सचिवालय के आसपास के इलाकों में यातायात बाधित रहा।

बैकलॉग पदों पर सरकार की उदासीनता

राजेश ठाकुर ने कहा कि प्रदेश के कई बड़े विभागों में चतुर्थ श्रेणी के बैकलॉग पद वर्षों से रिक्त पड़े हैं और एक भी पद नहीं भरा गया है। उन्होंने कहा, 'बैकलॉग पदों को भरा जाए, जिससे कि हम अपनी रोजी-रोटी चला पाएँ।' हिमाचल प्रदेश में दिव्यांगजनों की कुल जनसंख्या 1 लाख 55 हजार बताई जाती है, जो इस मुद्दे की व्यापकता को रेखांकित करती है।

सहारा योजना बंद होने का विवाद

पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के कार्यकाल में दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण के लिए शुरू की गई 'सहारा योजना' पिछले 12 महीनों से बंद है। एसोसिएशन की माँग है कि इस योजना को तत्काल प्रभाव से पुनः लागू किया जाए। राजेश ठाकुर के अनुसार, वर्तमान सरकार द्वारा 'तरह-तरह की योजनाएँ बनाकर दिव्यांग समाज को कमजोर किया जा रहा है।'

सरकार पर आरोप और भावनात्मक अपील

एसोसिएशन अध्यक्ष ने अधिकारियों और कैबिनेट मंत्रियों से सवाल किया कि यदि उनके अपने परिवार में कोई दिव्यांग सदस्य होता, तो क्या वे भी यही रवैया अपनाते? उन्होंने सरकार को 'संवेदनहीन' करार देते हुए कहा कि दिव्यांगजनों के लिए कोई नई योजना नहीं बनाई जा रही।

आगे क्या होगा

आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक बैकलॉग पदों की भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं होती और सहारा योजना बहाल नहीं होती, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। यह देखना होगा कि हिमाचल प्रदेश सरकार इस बढ़ते दबाव के बीच दिव्यांग समुदाय की माँगों पर कोई ठोस कदम उठाती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो 1 लाख 55 हजार दिव्यांगजन दोहरी मार झेलते हैं। सरकार को यह समझना होगा कि संवेदनशीलता केवल घोषणाओं से नहीं, क्रियान्वयन से साबित होती है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिमला में दृष्टिहीन संघ ने चक्का जाम क्यों किया?
ब्लाइंड पीपुल्स एसोसिएशन ने 16 जून 2026 को शिमला सचिवालय के पास चक्का जाम किया क्योंकि सरकार ने 976 दिनों से अधिक समय से उनकी माँगें नहीं मानी हैं। इनमें मुख्यतः बैकलॉग पदों पर भर्ती और 12 महीने से बंद सहारा योजना की बहाली शामिल है।
सहारा योजना क्या है और यह क्यों बंद है?
सहारा योजना हिमाचल प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के कार्यकाल में दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण के लिए शुरू की गई थी। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में यह योजना पिछले 12 महीनों से बंद है और इसे पुनः लागू करने की कोई घोषणा नहीं हुई है।
हिमाचल प्रदेश में दिव्यांगजनों की स्थिति क्या है?
हिमाचल प्रदेश में दिव्यांगजनों की कुल जनसंख्या लगभग 1 लाख 55 हजार बताई गई है। एसोसिएशन के अनुसार, कई बड़े सरकारी विभागों में चतुर्थ श्रेणी के बैकलॉग पद वर्षों से रिक्त हैं और एक भी पद नहीं भरा गया है।
बैकलॉग पद क्या होते हैं और इनकी माँग क्यों हो रही है?
बैकलॉग पद वे सरकारी पद होते हैं जो दिव्यांगजनों के लिए आरक्षित होते हैं लेकिन पिछली भर्तियों में नहीं भरे जा सके। ब्लाइंड पीपुल्स एसोसिएशन की माँग है कि इन पदों को तत्काल भरा जाए ताकि दृष्टिबाधित व्यक्ति अपनी आजीविका चला सकें।
क्या राज्य सरकार ने प्रदर्शनकारियों की माँगों पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। एसोसिएशन अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने सरकार को 'संवेदनहीन' बताते हुए कहा है कि जब तक माँगें नहीं मानी जातीं, आंदोलन जारी रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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