25 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जाति जनगणना प्रक्रिया में गंभीर खामियां: अशोक गहलोत ने केंद्र पर साधा निशाना, OBC शब्द गायब होने पर जताई चिंता

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जाति जनगणना प्रक्रिया में गंभीर खामियां: अशोक गहलोत ने केंद्र पर साधा निशाना, OBC शब्द गायब होने पर जताई चिंता

सारांश

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जाति जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया को दोषपूर्ण करार दिया है — 'ओपन-एंडेड' प्रश्न पद्धति और OBC शब्द की अनुपस्थिति को सबसे बड़ी खामी बताया। उनका आरोप है कि यह केंद्र की सोची-समझी रणनीति है, न कि महज चूक।

मुख्य बातें

पूर्व CM अशोक गहलोत ने 25 अगस्त 2026 को जाति जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया को पूरी तरह दोषपूर्ण बताया।
जनगणना में 'ओपन-एंडेड सवाल' पद्धति से एक ही जाति हजारों अलग नामों में दर्ज होने का खतरा।
प्रश्नावली में 'अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)' शब्द शामिल न होने पर गंभीर चिंता जताई।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने PM मोदी को पत्र लिखकर पहले से जातियों की सूची बनाने की माँग की।
2024 तेलंगाना और 2022 बिहार जाति सर्वेक्षणों में भी इसी पद्धति का उपयोग हुआ था।
गहलोत ने केंद्र से माँग की कि प्रक्रिया वापस ली जाए और नई प्रश्नावली सर्वसम्मति से तैयार हो।

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 25 अगस्त 2026 को जयपुर में कहा कि देश में चल रही जाति जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया पूरी तरह दोषपूर्ण है और केंद्र सरकार को इसे तत्काल सुधारना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह महज लापरवाही नहीं, बल्कि जाति जनगणना के मूल उद्देश्य को कमज़ोर करने की सोची-समझी रणनीति प्रतीत होती है।

मुख्य आपत्तियां क्या हैं

गहलोत के अनुसार, सरकार ने जनगणना में 'ओपन-एंडेड सवाल' का तरीका अपनाया है, जिसके तहत हर व्यक्ति की जाति ठीक वैसी ही दर्ज की जाएगी जैसा वह स्वयं बताएगा। भारत में एक ही जाति को अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में अलग-अलग नामों, उप-जातियों और भाषाई रूपों से जाना जाता है। इसके चलते एक ही जाति हजारों भिन्न-भिन्न नामों में दर्ज हो सकती है, जिससे अंतिम डेटा व्यावहारिक रूप से बेकार हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि सबसे गंभीर खामी यह है कि जनगणना प्रश्नावली में 'अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)' शब्द को शामिल ही नहीं किया गया है, जिससे पिछड़े वर्गों की वास्तविक आबादी का सटीक अनुमान लगाना असंभव हो जाएगा।

कांग्रेस का रुख और पिछले सर्वेक्षणों का संदर्भ

गहलोत ने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर माँग की है कि जनगणना शुरू होने से पहले जातियों की एक व्यापक सूची तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि 2024 में तेलंगाना और 2022 में बिहार में हुए जाति सर्वेक्षणों में भी इसी तरह के तरीके अपनाए गए थे, जो एक स्थापित पद्धति का संकेत देता है।

यह ऐसे समय में आया है जब जाति जनगणना को लेकर देशभर में राजनीतिक बहस तेज़ है और विभिन्न दल इसे सामाजिक न्याय की कसौटी पर परख रहे हैं। गौरतलब है कि जब जाति जनगणना की घोषणा हुई थी, तब सभी प्रमुख दलों ने इसका स्वागत किया था।

सरकार से क्या मांग की गई

गहलोत ने केंद्र सरकार से माँग की कि वह तुरंत इस दोषपूर्ण प्रक्रिया को वापस ले और राजनीतिक दलों, सामाजिक विशेषज्ञों तथा आम जनता से व्यापक परामर्श करके एक नई, सुव्यवस्थित प्रश्नावली तैयार करे।

उन्होंने कहा कि जाति जनगणना तभी अपना उद्देश्य पूरा कर सकती है जब उससे देश की सामाजिक वास्तविकता को प्रतिबिंबित करने वाला सटीक और सार्थक डेटा मिले। सामाजिक न्याय, समान प्रतिनिधित्व और पिछड़े वर्गों के कल्याण के लिए प्रभावी नीतियां बनाने हेतु ऐसा डेटा अनिवार्य है।

आगे क्या

केंद्र सरकार की ओर से अभी तक इन आपत्तियों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रश्नावली में बदलाव नहीं किया गया, तो जनगणना के आंकड़े नीति-निर्माण में उपयोगी साबित नहीं होंगे और इस पूरी कवायद पर सवाल उठते रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो 2027 के चुनावी चक्र को देखते हुए स्वाभाविक है। असली सवाल यह है कि क्या केंद्र सरकार इन तकनीकी खामियों को स्वीकार कर प्रक्रिया में सुधार करेगी, या राजनीतिक दबाव में इसे नकार देगी — क्योंकि डेटा की विश्वसनीयता पर ही पूरी जनगणना की उपयोगिता टिकी है।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अशोक गहलोत ने जाति जनगणना प्रक्रिया में क्या खामियां बताई हैं?
गहलोत ने दो प्रमुख खामियां गिनाई हैं — पहली, 'ओपन-एंडेड' प्रश्न पद्धति जिससे एक ही जाति हजारों अलग नामों में दर्ज हो सकती है और डेटा बेकार हो जाएगा। दूसरी, प्रश्नावली में 'अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)' शब्द की अनुपस्थिति, जिससे पिछड़े वर्गों की सटीक गणना असंभव हो जाएगी।
'ओपन-एंडेड सवाल' पद्धति से जाति जनगणना को क्या नुकसान होगा?
इस पद्धति में हर व्यक्ति अपनी जाति जैसा चाहे वैसा दर्ज करा सकता है। भारत में एक ही जाति को अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नामों और उप-जातियों से जाना जाता है, इसलिए अंतिम डेटा में भारी बिखराव होगा और उसे नीति-निर्माण में उपयोग करना व्यावहारिक रूप से असंभव हो जाएगा।
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र में क्या माँग की है?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने PM नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर माँग की है कि जनगणना शुरू होने से पहले जातियों की एक व्यापक और पूर्व-निर्धारित सूची तैयार की जाए, ताकि डेटा सटीक और उपयोगी हो।
क्या पहले भी किसी राज्य ने इसी तरह का जाति सर्वेक्षण किया है?
हाँ, 2024 में तेलंगाना और 2022 में बिहार में हुए जाति सर्वेक्षणों में भी इसी तरह की पद्धति अपनाई गई थी। गहलोत ने इन उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि इन सर्वेक्षणों के अनुभव से सीखकर केंद्र को प्रक्रिया में सुधार करना चाहिए।
गहलोत ने केंद्र सरकार से क्या कार्रवाई की माँग की है?
गहलोत ने माँग की है कि केंद्र तुरंत मौजूदा दोषपूर्ण प्रक्रिया को वापस ले और राजनीतिक दलों, सामाजिक विशेषज्ञों तथा आम जनता से परामर्श कर एक नई, सुव्यवस्थित प्रश्नावली तैयार करे, जिससे सटीक और नीति-उपयोगी डेटा प्राप्त हो सके।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 घंटे पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले