बड़वानी में 'ऑपरेशन ग्रीन स्ट्राइक': 26,000 से अधिक गांजा पौधे जब्त, ₹1.15 करोड़ की खेप नष्ट
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के सुदूर वन और पहाड़ी क्षेत्रों में 14 सितंबर 2026 को पुलिस ने पाँच अवैध खेतों से 26,000 से अधिक गांजा के पौधे जब्त किए, जिनका वजन 27 क्विंटल से अधिक और अनुमानित बाज़ार मूल्य ₹1.15 करोड़ से अधिक बताया गया है। यह कार्रवाई 'ऑपरेशन ग्रीन स्ट्राइक' के तहत की गई, जिसमें तीन जिलों के 400 से अधिक पुलिसकर्मियों की 12 टीमें एक साथ मैदान में उतरीं।
ऑपरेशन ग्रीन स्ट्राइक: मुख्य घटनाक्रम
बरवानी, खरगोन और खंडवा जिलों के पुलिसकर्मियों ने वर्ला पुलिस स्टेशन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 19 गांवों में एक साथ तलाशी अभियान चलाया। पुलिस ने पहले ड्रोन निगरानी के ज़रिए संदिग्ध खेती स्थलों की पहचान की और उसके बाद पैदल दस्ते उन दुर्गम स्थानों तक पहुँचे।
जब्त किए गए पाँचों खेत डोकालियापानी, धवलियागिर, बागदारी, तकियापानी और अदनादी गांवों के सुदूर इलाकों में पाए गए। दुर्गम भूभाग और खेतों के व्यापक फैलाव को देखते हुए कई टीमों को एक साथ तैनात करना आवश्यक हो गया था।
पुलिस अधीक्षक की प्रतिक्रिया
बड़वानी के पुलिस अधीक्षक पद्मविलोचन शुक्ला ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया, 'ड्रोन निगरानी की मदद से हमने दूरदराज के पहाड़ी और वन क्षेत्रों में संदिग्ध खेती स्थलों की पहचान की, जिसके बाद पुलिस टीमें उन स्थानों पर पहुँचीं और तलाशी अभियान चलाया।'
शुक्ला ने यह भी स्पष्ट किया कि ये खेत वन भूमि पर स्थित थे, जिसके चलते पुलिस ने वन विभाग से भूमि के पट्टेदारों अथवा कब्जेदारों की जानकारी माँगी है। उन्होंने कहा, 'एक बार उनकी भूमिका स्थापित हो जाने पर, कानून के संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।'
जाँच की दिशा और आगामी कदम
पुलिस अधीक्षक के अनुसार, जाँच का मुख्य उद्देश्य गांजा की खेती में शामिल व्यक्तियों की पहचान करना और भूमि से उनके संबंध का पता लगाना है। अभी तक किसी की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश पुलिस नशीले पदार्थों की अवैध खेती, परिवहन और तस्करी के विरुद्ध लगातार गहन अभियान चला रही है। यह ऑपरेशन ऐसे समय में आया है जब वन और दुर्गम क्षेत्रों में अवैध खेती की पहचान के लिए ड्रोन और आधुनिक निगरानी तकनीक का व्यापक उपयोग बढ़ता जा रहा है।
आम जनता और वन क्षेत्र पर असर
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि खेती वन भूमि पर की गई थी, जो न केवल नशे की तस्करी बल्कि वन अतिक्रमण का भी मसला बनाता है। वन विभाग और पुलिस की संयुक्त जाँच से यह स्पष्ट होगा कि इन भूखंडों पर किसका कब्ज़ा था और नेटवर्क कितना बड़ा है।
आने वाले दिनों में इस मामले में गिरफ्तारियाँ और वन भूमि अतिक्रमण से जुड़ी कार्रवाई अपेक्षित है।