दक्षिण तट रेलवे: भारतीय रेलवे ने कहा — ओडिशा का कोई क्षेत्र नहीं जाएगा, भ्रामक रिपोर्टें खारिज
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रेलवे ने बुधवार, 6 मई 2026 को एक बार फिर स्पष्ट किया कि नवगठित दक्षिण तट रेलवे (साउथ कोस्ट रेलवे — SCOR) के गठन से ओडिशा का कोई भी भौगोलिक क्षेत्र प्रभावित नहीं होगा। रेलवे ने इसके विपरीत दावे करने वाली रिपोर्टों को भ्रामक और दुर्भावनापूर्ण करार दिया और कहा कि ये निहित स्वार्थ वाले व्यक्तियों एवं समूहों द्वारा फैलाई जा रही हैं। यह स्पष्टीकरण उन व्यापक रूप से प्रसारित रिपोर्टों के जवाब में आया है जिनमें दावा किया गया था कि नए दक्षिण तटीय रेलवे क्षेत्र के कारण ओडिशा को क्षेत्रीय नुकसान उठाना पड़ेगा।
विशाखापत्तनम डिवीजन में क्या शामिल है
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, नवगठित साउथ कोस्ट रेलवे के विशाखापत्तनम डिवीजन में पलासा से इच्छापुरम तक 53 किलोमीटर का रेलखंड शामिल है। इस खंड में सात स्टेशन — पलासा, सुमादेवी, मंदासा रोड, बरुवा, सोमपेटा, झाडूपुडी और इच्छापुरम — आते हैं। रेलवे ने स्पष्ट किया कि ये सभी स्टेशन आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में स्थित हैं, न कि ओडिशा में।
ओडिशा के रेलखंड रायगड़ा डिवीजन में बने रहेंगे
रेलवे ने यह भी बताया कि कोरापुट-सिंगापुर रोड, कोठावलासा-किरंदुल, कुनेरू-थेरुबली और गुनुपुर-परालाखेमुंडी खंडों सहित कुल 696 किलोमीटर रेलमार्ग ईस्ट कोस्ट रेलवे (ECR) के नवगठित रायगड़ा डिवीजन के अंतर्गत ही बने रहेंगे। रेलवे ने दोहराया कि किसी भी परिस्थिति में ओडिशा के किसी भी हिस्से को आंध्र प्रदेश के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में नहीं लाया जा रहा है।
दक्षिण तट रेलवे का गठन: पृष्ठभूमि
केंद्र सरकार ने हाल ही में एक राजपत्र अधिसूचना जारी कर 1 जून 2026 से विशाखापत्तनम में मुख्यालय के साथ दक्षिण तट रेलवे जोन की स्थापना की है। दक्षिण मध्य रेलवे (SCR) और पूर्वी तट रेलवे (ECR) के पुनर्गठन के बाद, नए जोन में गुंटकल, गुंटूर, विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम जैसे प्रभाग शामिल होंगे। यह कदम आंध्र प्रदेश की लंबे समय से लंबित माँग को पूरा करता है।
ओडिशा में विरोध और राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस घोषणा के बाद ओडिशा में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। बीजू जनता दल (BJD), भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस), वामपंथी दलों और कई अन्य विपक्षी समूहों ने पलासा-इच्छापुरम खंड को साउथ कोस्ट रेलवे (SCOR) को हस्तांतरित करने के फैसले को तत्काल वापस लेने की माँग की है। हालाँकि, रेलवे का कहना है कि इस खंड में कोई भी ओडिशा का स्टेशन शामिल नहीं है, इसलिए हस्तांतरण का प्रश्न ही नहीं उठता। रेलवे ने जनता से अपील की है कि वे निराधार और जानबूझकर फैलाई गई गलत सूचनाओं से गुमराह न हों। यह ऐसे समय में आया है जब रेलवे पुनर्गठन को लेकर कई राज्यों में संवेदनशीलता बढ़ी हुई है।