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सड़क पर नमाज हो या गणपति उत्सव — सभी धर्मों पर समान नियम लागू हों: हुसैन दलवई

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सड़क पर नमाज हो या गणपति उत्सव — सभी धर्मों पर समान नियम लागू हों: हुसैन दलवई

सारांश

कांग्रेस नेता हुसैन दलवई का सीधा सवाल — अगर सड़क पर नमाज गलत है, तो गणपति उत्सव और नवरात्रि भी सड़क से हटाओ। एक ही बयान में उन्होंने गाजियाबाद मुठभेड़, योगी के गाय-बयान, वंदे मातरम और शिवसेना के संभावित पुनर्मिलन पर भी निशाना साधा।

मुख्य बातें

हुसैन दलवई ने कहा कि सड़क पर नमाज के साथ-साथ गणपति महोत्सव , नवरात्रि , शादियाँ और अंतिम संस्कार यात्राओं पर भी एकसमान नियम लागू होने चाहिए।
गाजियाबाद मुठभेड़ को उन्होंने 'पुलिस द्वारा कानून हाथ में लेना' बताया और माँग की कि अपराधी को अदालत के सामने पेश किया जाए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गाय को 'माँ' कहने पर आपत्ति जताई; कहा — गाय को राष्ट्रीय पशु कहना सही, लेकिन राजनीतिकरण अनुचित।
उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के बीच भविष्य में गठबंधन की संभावना जताई; कहा — BJP शिंदे गुट को तोड़ने में लगी है।
वंदे मातरम पर कहा — पहली दो पंक्तियाँ देश का वर्णन करती हैं, स्वतंत्रता संग्राम में इसका महत्व था; BJP की भूमिका पर सवाल उठाया।

कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने 2 जून को मुंबई में मीडिया से बातचीत में कई विवादास्पद मुद्दों पर अपनी स्पष्ट राय रखी। उन्होंने कहा कि यदि सड़क पर नमाज पर रोक लगाई जानी है, तो सभी धर्मों के सार्वजनिक आयोजनों पर एकसमान नियम लागू होने चाहिए। उन्होंने गाजियाबाद मुठभेड़, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान, वंदे मातरम विवाद और उद्धव ठाकरे तथा एकनाथ शिंदे के बीच बढ़ती मुलाकातों पर भी टिप्पणी की।

सड़क पर धार्मिक आयोजन और समानता का सवाल

भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता किरीट सोमैया की सड़क पर नमाज न पढ़ने की माँग के जवाब में दलवई ने कहा, 'मैं मानता हूँ कि हमारे समाज में लोग सड़क पर नमाज पढ़ते हैं, हालाँकि मैं कहता रहता हूँ कि बारी-बारी से मस्जिद में नमाज पढ़नी चाहिए।' उन्होंने पलटकर पूछा कि कौन-सा धर्म सड़क पर नहीं है — गणपति महोत्सव से लेकर नवरात्रि उत्सव तक, शादियाँ और अंतिम संस्कार यात्राएँ भी सार्वजनिक सड़कों पर होती हैं।

दलवई ने कहा कि अन्य देशों में ऐसी परंपरा नहीं है, लेकिन भारत में जगह की कमी के कारण लोग सड़कों पर उत्सव मनाते हैं। उनका तर्क था कि ऐसे में सभी धर्मों के लोगों पर एकसमान नियम लागू होना चाहिए — किसी एक समुदाय को अलग करना उचित नहीं है।

गाजियाबाद मुठभेड़ पर तीखी प्रतिक्रिया

दलवई ने गाजियाबाद मुठभेड़ को लेकर कहा कि 'मुठभेड़ का मतलब है कि पुलिस कानून को अपने हाथ में ले रही है और कानून तोड़ रही है — यह गलत है।' उन्होंने आरोप लगाया कि धर्म के नाम पर राजनीति हो रही है और कथित तौर पर यह संदेश दिया जा रहा है कि किसी के मुसलमान होने मात्र से एनकाउंटर जायज़ हो जाता है। उनका स्पष्ट मत था कि किसी भी अपराधी को अदालत के सामने पेश किया जाए और न्यायिक फैसले के अनुसार दंडित किया जाए।

योगी के गाय संबंधी बयान पर आपत्ति

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गाय को 'माँ' कहने की टिप्पणी पर दलवई ने कहा, 'पहले इसे राष्ट्रीय पशु कहा गया, अब 'माँ' कहा जा रहा है।' उन्होंने कहा कि मुसलमान समझौता करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें और पीछे धकेलने की कोशिशें जारी हैं। उनके अनुसार गाय को राष्ट्रीय पशु कहना सही है, किंतु इस मुद्दे का राजनीतिकरण अनावश्यक तनाव पैदा करता है।

वंदे मातरम और ऐतिहासिक संदर्भ

वंदे मातरम विवाद पर दलवई ने कहा कि गीत की पहली दो पंक्तियाँ देश का वर्णन करती हैं और उन्हें वे गाते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि ब्रिटिश शासनकाल में स्वतंत्रता सेनानी 'वंदे मातरम' बोलकर जेल जाते थे, और सवाल उठाया कि उस समय BJP कहाँ थी।

शिवसेना में संभावित पुनर्मिलन के संकेत

उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे की बढ़ती मुलाकातों पर दलवई ने कहा कि भविष्य में दोनों गुटों में गठबंधन संभव है, क्योंकि दोनों छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर राजनीति करते हैं और दोनों का दल शिवसेना कहलाता है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों बाबासाहेब आंबेडकर के समर्थक हैं। उनके अनुसार BJP द्वारा शिंदे गुट को तोड़ने की कोशिशों के बीच शिंदे का उद्धव ठाकरे के साथ जाना स्वाभाविक हो सकता है।

दलवई के ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण बनते दिख रहे हैं और धार्मिक आयोजनों को लेकर देशभर में बहस तेज़ हो रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह बहस की दिशा को मूल सवाल — सार्वजनिक स्थानों पर व्यवस्था और यातायात — से हटाकर सांप्रदायिक तुलना की ओर ले जाता है। गाजियाबाद मुठभेड़ पर उनकी न्यायिक जवाबदेही की माँग संवैधानिक दृष्टि से सही है, लेकिन कांग्रेस ने स्वयं शासन में रहते हुए एनकाउंटर के मामलों पर कितनी जवाबदेही सुनिश्चित की — यह सवाल भी उतना ही प्रासंगिक है। शिवसेना पुनर्मिलन की भविष्यवाणी महाराष्ट्र की बदलती राजनीति का संकेत है, लेकिन महागठबंधन की आंतरिक दरारें इतनी आसानी से नहीं भरतीं।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हुसैन दलवई ने सड़क पर नमाज के बारे में क्या कहा?
दलवई ने कहा कि यदि सड़क पर नमाज पर रोक लगाई जाए, तो गणपति महोत्सव, नवरात्रि उत्सव, शादियाँ और अंतिम संस्कार यात्राओं पर भी वही नियम लागू होने चाहिए। उन्होंने स्वयं सुझाया कि मस्जिद में बारी-बारी से नमाज पढ़ना बेहतर है, लेकिन नियम सभी के लिए समान होने चाहिए।
गाजियाबाद मुठभेड़ पर दलवई का क्या रुख है?
दलवई ने मुठभेड़ को गैरकानूनी बताते हुए कहा कि पुलिस कानून अपने हाथ में ले रही है। उनका मत है कि किसी भी अपराधी को गिरफ्तार कर अदालत के सामने पेश किया जाना चाहिए और न्यायिक फैसले के अनुसार दंडित किया जाना चाहिए।
क्या उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे का गठबंधन हो सकता है?
दलवई के अनुसार भविष्य में यह संभव है, क्योंकि दोनों गुट शिवाजी महाराज के नाम पर राजनीति करते हैं और शिवसेना नाम से जुड़े हैं। उन्होंने यह भी कहा कि BJP द्वारा शिंदे गुट को तोड़ने की कोशिशों के बीच शिंदे का उद्धव के साथ जाना स्वाभाविक हो सकता है।
वंदे मातरम विवाद पर दलवई ने क्या कहा?
दलवई ने कहा कि गीत की पहली दो पंक्तियाँ देश का वर्णन करती हैं और वे उन्हें गाते हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि ब्रिटिश शासन में स्वतंत्रता सेनानी 'वंदे मातरम' बोलकर जेल जाते थे, और सवाल उठाया कि उस दौर में BJP कहाँ थी।
योगी आदित्यनाथ के गाय संबंधी बयान पर कांग्रेस की क्या प्रतिक्रिया है?
दलवई ने कहा कि गाय को राष्ट्रीय पशु कहना सही है, लेकिन उसे 'माँ' कहकर राजनीतिकरण करना अनावश्यक है। उन्होंने कहा कि मुसलमान समझौता करने की कोशिश कर रहे हैं, फिर भी उन्हें और पीछे धकेलने की प्रवृत्ति जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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