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बुलेट ट्रेन हब विवाद: बहादुरगुडा में 650 एकड़ पर फेंसिंग जारी, किसानों से झड़प के बाद पुलिस का कब्जा

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बुलेट ट्रेन हब विवाद: बहादुरगुडा में 650 एकड़ पर फेंसिंग जारी, किसानों से झड़प के बाद पुलिस का कब्जा

सारांश

हैदराबाद के बहादुरगुडा में बुलेट ट्रेन हब के लिए 650 एकड़ जमीन पर फेंसिंग का विवाद सिर्फ भूमि अधिग्रहण का मामला नहीं — यह दशकों से काबिज किसानों और सरकारी रिकॉर्ड के बीच की वह खाई है जो देश के हर बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में बार-बार सामने आती है।

मुख्य बातें

हाइड्रा ने 19 जुलाई 2026 को बहादुरगुडा गाँव में 650 एकड़ सरकारी भूमि पर फेंसिंग जारी रखी।
शनिवार को किसानों और पुलिस के बीच झड़प में डीसीपी योगेश गौतम समेत तीन पुलिसकर्मी मामूली रूप से घायल हुए।
किसान 8 दिनों से धरने पर थे; उनकी माँग — बाजार दर पर मुआवजा या वैकल्पिक जमीन।
कार्तिक रेड्डी को गाँव जाते समय हिरासत में लिया गया।
सरकारी रिकॉर्ड में सर्वे नंबर 25 और 26 की 650 एकड़ जमीन सरकारी दर्ज है; 2006 में नियमितीकरण प्रस्ताव खारिज हो चुका है।
केंद्र सरकार ने हैदराबाद को पुणे, चेन्नई और बेंगलुरु से जोड़ने वाले हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा की है।

तेलंगाना के शमशाबाद स्थित बहादुरगुडा गाँव में 19 जुलाई 2026 को भी तनाव बरकरार रहा, जब अधिकारियों ने प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल हब के लिए चिह्नित 650 एकड़ भूमि पर बाड़ लगाने का काम नहीं रोका। हैदराबाद डिजास्टर रिस्पॉन्स एंड एसेट प्रोटेक्शन एजेंसी (हाइड्रा) ने शनिवार देर रात किसानों का भूख हड़ताल शिविर हटाकर कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच फेंसिंग का कार्य आगे बढ़ाया।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस ने बहादुरगुडा गाँव को अपने नियंत्रण में ले लिया है और बाहरी लोगों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी है। शनिवार को जब रेवेन्यू डिपार्टमेंट और हाइड्रा के कर्मचारियों ने जमीन पर बाड़ लगाना शुरू किया, तो किसानों ने तीखा विरोध किया। कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर पत्थर और मिर्च पाउडर फेंका, जिससे डीसीपी योगेश गौतम और दो सब-इंस्पेक्टर को मामूली चोटें आईं। कई राजनीतिक कार्यकर्ताओं समेत अनेक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि शुक्रवार रात गाँव की बिजली काट दी गई, बाहरी लोगों को अंदर आने से रोका गया और स्कूल बसों को भी रोके जाने के कारण बच्चों को घर पर रहना पड़ा। हालाँकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

किसानों की माँग और सरकारी रुख

किसानों का कहना है कि वे सालों से इस जमीन पर खेती करते आ रहे हैं और अपनी आजीविका के लिए इसी पर निर्भर हैं। उनकी माँग है कि सरकार या तो वैकल्पिक भूमि दे या बाजार दर पर मुआवजा दे। किसान स्वीकार करते हैं कि उनके पास औपचारिक मालिकाना हक नहीं है, लेकिन वे दशकों से यहाँ काबिज हैं।

दूसरी ओर, रेवेन्यू डिपार्टमेंट के अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि सर्वे नंबर 25 और 26 में दर्ज 650 एकड़ भूमि सरकारी रिकॉर्ड में सरकारी जमीन है। हाइड्रा ने अपने बयान में कहा कि रियल एस्टेट डेवलपर्स ने इस जमीन को — जो आउटर रिंग रोड से सटी होने के कारण बेशकीमती है — किसानों से कुछ लाख रुपये में हासिल किया था, जबकि इसकी बाजार कीमत करोड़ों रुपये है।

हाइड्रा के अनुसार, जमीन को नियमित करने का एक प्रस्ताव सरकार को भेजा गया था, जिसे चीफ कमिश्नर ऑफ लैंड एडमिनिस्ट्रेशन ने 2006 में यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि वह क्षेत्र एक विकसित जोन है और वहाँ भूमि आवंटन पर प्रतिबंध है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने प्रदर्शनकारी किसानों का समर्थन करते हुए सरकार के भूमि अधिग्रहण का विरोध किया है। बीआरएस नेता पी. कार्तिक रेड्डी को पुलिस ने गाँव की ओर जाते समय रोककर उनके घर के पास हिरासत में ले लिया। यह विरोध ऐसे समय में आया है जब राज्य में भूमि अधिग्रहण को लेकर सियासी तापमान पहले से ऊँचा है।

बुलेट ट्रेन हब की पृष्ठभूमि

केंद्र सरकार ने हाल ही में हैदराबाद को पुणे, चेन्नई और बेंगलुरु से जोड़ने वाले हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा की है। तेलंगाना राज्य सरकार राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, शमशाबाद के निकट एक बुलेट ट्रेन हब विकसित करने की योजना बना रही है। किसान आठ दिनों से इस परियोजना के विरुद्ध धरना दे रहे थे, जिसे शनिवार देर रात हाइड्रा ने हटवा दिया।

आगे क्या होगा

फिलहाल गाँव में भारी पुलिस बल तैनात है और फेंसिंग का काम जारी है। किसानों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की बात कही है। बीआरएस के हस्तक्षेप के बाद यह मामला राजनीतिक रंग ले चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना पर्याप्त पुनर्वास नीति के इस तरह के अधिग्रहण भविष्य में और टकराव को जन्म दे सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जमीन पर काबिज लोगों के पुनर्वास की नीति अधूरी रहती है। हाइड्रा का यह तर्क कि जमीन सरकारी है, कागजी तौर पर सही हो सकता है, लेकिन दशकों से खेती कर रहे लोगों को बिना पर्याप्त मुआवजे के हटाना सामाजिक न्याय के सवाल खड़े करता है। गौरतलब है कि 2006 में ही नियमितीकरण अर्जी खारिज हो चुकी थी — फिर भी इतने वर्षों तक इन लोगों को हटाया नहीं गया, जो नीतिगत अस्पष्टता को दर्शाता है। बिना स्पष्ट पुनर्वास ढाँचे के बुलेट ट्रेन जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाएँ जनविरोध की आग में उलझ सकती हैं।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बहादुरगुडा में बुलेट ट्रेन हब विवाद क्या है?
तेलंगाना के शमशाबाद स्थित बहादुरगुडा गाँव में हाइड्रा और रेवेन्यू डिपार्टमेंट प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल हब के लिए 650 एकड़ जमीन पर बाड़ लगा रहे हैं, जिसे सरकारी रिकॉर्ड में सरकारी भूमि दर्ज किया गया है। वर्षों से इस जमीन पर खेती कर रहे किसान बाजार दर पर मुआवजे या वैकल्पिक जमीन की माँग कर रहे हैं।
किसानों और पुलिस के बीच झड़प में क्या हुआ?
शनिवार को जब अधिकारियों ने फेंसिंग शुरू की तो किसानों ने विरोध किया। कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर पत्थर और मिर्च पाउडर फेंका, जिससे डीसीपी योगेश गौतम और दो सब-इंस्पेक्टर को मामूली चोटें आईं। कई प्रदर्शनकारियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।
सरकार का इस जमीन पर क्या दावा है?
हाइड्रा और रेवेन्यू डिपार्टमेंट के अनुसार, सर्वे नंबर 25 और 26 में दर्ज 650 एकड़ जमीन आधिकारिक रिकॉर्ड में सरकारी भूमि है। 2006 में चीफ कमिश्नर ऑफ लैंड एडमिनिस्ट्रेशन ने नियमितीकरण प्रस्ताव इस आधार पर खारिज कर दिया था कि वह क्षेत्र एक विकसित जोन है।
बीआरएस का इस मामले में क्या रुख है?
भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने किसानों का समर्थन करते हुए सरकार के भूमि अधिग्रहण का विरोध किया है। बीआरएस नेता पी. कार्तिक रेड्डी को पुलिस ने गाँव जाते समय रोककर उनके घर के पास हिरासत में ले लिया।
हैदराबाद बुलेट ट्रेन हब परियोजना क्या है?
केंद्र सरकार ने हैदराबाद को पुणे, चेन्नई और बेंगलुरु से जोड़ने वाले हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा की है। तेलंगाना राज्य सरकार राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, शमशाबाद के निकट इस परियोजना के लिए एक केंद्रीय हब विकसित करने की योजना बना रही है।
राष्ट्र प्रेस
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