रामलीला मैदान रैली पर सियासी घमासान: इंडिया ब्लॉक ने कहा ऐतिहासिक, एनडीए बोला फ्लॉप
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 1 नवंबर 2026 को रामलीला मैदान में आयोजित इंडिया ब्लॉक की रैली के बाद सियासी संग्राम तेज़ हो गया है। विपक्षी गठबंधन के नेताओं ने इसे ऐतिहासिक जनसैलाब बताया, जबकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने कहा कि 10 लाख लोगों के जुटने का दावा पूरी तरह विफल रहा और रैली बुरी तरह फ्लॉप हुई। दोनों पक्षों के परस्पर विरोधी दावों ने राष्ट्रीय राजनीति में नई तल्खी पैदा कर दी है।
विपक्ष का दावा — जनआंदोलन बन गई रैली
बिहार से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता भाई वीरेंद्र ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तंज कसते हुए कहा कि देशभर के अलग-अलग राज्यों से 21 दलों के कार्यकर्ता एकजुट हुए और उन्होंने दिल्ली को हिला दिया। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और उनकी पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं को सामने आना पड़ा।' वीरेंद्र ने यह भी चेतावनी दी कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा नहीं होता, इसी तरह का आंदोलन जारी रहेगा और उन्होंने 'वोट की चोरी' का आरोप दोहराया।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा 'मोना' ने BJP की प्रतिक्रिया को 'बौखलाहट' बताया। उन्होंने कहा, 'अगर उन्हें इस बात का डर नहीं था कि रैली में भारी भीड़ जुटने वाली है, तो फिर ट्रेनें क्यों रद्द की गईं और लोगों को क्यों रोका गया?' उन्होंने UP के कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भूमिका को विशेष रूप से सराहा।
एनडीए का पलटवार — कुर्सियाँ भी नहीं भर पाई
राजस्थान सरकार में मंत्री जोगाराम पटेल ने दावा किया कि रैली पूरी तरह फ्लॉप रही। उनके अनुसार राजस्थान में कांग्रेस ने सबसे अधिक ज़ोर लगाया था — सभी जिला अध्यक्षों को 1 लाख की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे और विफल रहने पर पद जाने या टिकट न मिलने की चेतावनी भी दी गई थी — फिर भी कथित तौर पर लक्ष्य का 10 प्रतिशत भी नहीं पहुँच सका।
उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री जेपीएस राठौर ने कहा कि विपक्षी दल अपने-अपने राज्यों में अलग-अलग चुनाव लड़ते हैं, लेकिन दिल्ली में एकता का नाटक करते हैं। उन्होंने कहा कि रामलीला मैदान में जितनी भीड़ थी, उतनी BJP के मंडल-स्तरीय कार्यक्रमों में भी जुट जाती है।
BJP नेताओं के तीखे वार
मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने रैली में आयोजित 'मॉक पार्लियामेंट' पर निशाना साधते हुए कहा कि जब वास्तविक संसद का सत्र चलता है, तब राहुल गांधी और कांग्रेस नेता सार्थक चर्चा में हिस्सा नहीं लेते। उन्होंने कहा, 'अब इस मॉक पार्लियामेंट के जरिए वे जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।'
BJP नेता राम कदम ने आरोप लगाया कि विपक्ष देश में अराजकता का माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा, 'मोदी का विरोध करते-करते वे असल में देश का ही विरोध कर रहे हैं। आज भारत वैश्विक स्तर पर तरक्की कर रहा है।'
BJP नेता बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के एक बयान पर तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहीं नहीं जा रहे। उन्होंने कहा, 'नरेंद्र मोदी अगले कार्यकाल में भी प्रधानमंत्री के तौर पर देश का नेतृत्व करते रहेंगे — देश की जनता उनके साथ खड़ी है।'
आम जनता और राजनीतिक असर
गौरतलब है कि यह रैली ऐसे समय में हुई जब विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है। इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की माँग की है — एक ऐसी माँग जो गठबंधन के सभी 21 दलों के लिए साझा एजेंडे का हिस्सा बन चुकी है।
भीड़ के आँकड़ों पर दोनों पक्षों के परस्पर विरोधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है। ट्रेनें रद्द किए जाने के आरोपों पर भी सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आगे क्या होगा
इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने संकेत दिया है कि यह आंदोलन जारी रहेगा और आने वाले हफ्तों में और रैलियाँ आयोजित की जा सकती हैं। एनडीए की ओर से तीखे जवाब देने का सिलसिला भी जारी रहने की उम्मीद है। दोनों पक्षों के बीच यह टकराव आगामी विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में और अधिक महत्त्वपूर्ण हो सकता है।