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भारत ने 60 से अधिक देशों के साथ संसदीय मैत्री समूहों का गठन किया

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भारत ने 60 से अधिक देशों के साथ संसदीय मैत्री समूहों का गठन किया

सारांश

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 60 से अधिक देशों के साथ संसदीय मैत्री समूहों का गठन किया है। यह कदम भारत की संसद के विश्व स्तर पर संवाद बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती मिलेगी।

मुख्य बातें

60 से अधिक देशों के साथ संसदीय मैत्री समूहों का गठन संसदीय संबंधों को मजबूती प्रदान करने का उद्देश्य प्रत्यक्ष संवाद और नियमित संपर्क को बढ़ावा द्विपक्षीय संबंधों में सुधार वैश्विक मुद्दों पर चर्चा

नई दिल्ली, 23 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत के संसदीय संबंधों को और अधिक मजबूती प्रदान करने के लक्ष्य से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 60 से अधिक देशों के साथ संसदीय मैत्री समूहों का गठन किया है। यह कदम दर्शाता है कि भारत की संसद वैश्विक संसदों के साथ प्रत्यक्ष और नियमित संवाद बढ़ाने की इच्छुक है, ताकि पारंपरिक राजनय के अलावा संसदीय स्तर पर भी संबंध मजबूत बनाए जा सकें।

इन मैत्री समूहों में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के सांसद शामिल हैं। वरिष्ठ नेताओं में रवि शंकर प्रसाद, एम. थंबीदुरई, पी. चिदंबरम, राम गोपाल यादव, टी.आर. बालू, काकोली घोष दस्तीदार, गौरव गोगोई, कनिमोझी करुणानिधि, मनीष तिवारी, डेरेक ओ’ब्रायन, अभिषेक बनर्जी, असादुद्दीन ओवैसी, अखिलेश यादव, के.सी. वेणुगोपाल, राजीव प्रताप रूडी, सुप्रिया सुले, संजय सिंह, बैजयंत पांडा, शशि थरूर, निशिकांत दुबे, अनुराग सिंह ठाकुर, भर्तृहरि महताब, डी. पुरंदेश्वरी, संजय कुमार झा, हेमा मालिनी, बिप्लब कुमार देब, सुधांशु त्रिवेदी, जगदंबिका पाल, सस्मित पात्रा, अपराजिता सारंगी, श्रीकांत एकनाथ शिंदे, पी.वी. मिधुन रेड्डी और प्रफुल्ल पटेल सहित कई अन्य नेता शामिल हैं।

लोकसभा सचिवालय ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा, "जिन देशों के साथ ये मैत्री समूह बनाए गए हैं, उनमें श्रीलंका, जर्मनी, न्यूज़ीलैंड, स्विट्जरलैंड, दक्षिण अफ्रीका, भूटान, सऊदी अरब, इजरायल, मालदीव, अमेरिका, रूस, यूरोपीय संसद, दक्षिण कोरिया, नेपाल, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जापान, इटली, ओमान, ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, सिंगापुर, ब्राजील, वियतनाम, मेक्सिको, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं।"

इस पहल का मुख्य लक्ष्य सांसदों को अपने विदेशी समकक्षों से सीधे संवाद करने का अवसर प्रदान करना है। वे अनुभव साझा करेंगे, एक-दूसरे से सीख सकेंगे और नियमित संपर्क के माध्यम से आपसी विश्वास को बढ़ाएंगे। इससे द्विपक्षीय संबंध मजबूत होंगे और आपसी समझ में सुधार होगा। इन समूहों के माध्यम से व्यापार, तकनीक, सामाजिक नीतियों, संस्कृति और आज की वैश्विक चुनौतियों जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी।

लोकसभा सचिवालय ने कहा कि अध्यक्ष ओम बिरला ने हमेशा इस बात पर जोर दिया है कि संसदीय राजनय भारत की वैश्विक पहचान को मजबूत बनाता है। उनके नेतृत्व में संसद ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय भागीदारी की है और भारत को एक आत्मविश्वासी, जिम्मेदार और परिपक्व लोकतंत्र के रूप में प्रस्तुत किया है, जो संवाद और सहयोग में विश्वास करता है।

संसद से संसद और जनता से जनता के बीच संपर्क बढ़ाने पर जोर देते हुए यह पहल विदेश संबंधों में एक व्यापक और भागीदारी आधारित दृष्टिकोण को दर्शाती है। ये मैत्री समूह नियमित संवाद, अध्ययन यात्राओं और संयुक्त बैठकों के माध्यम से दीर्घकालिक सहयोग को बढ़ावा देंगे। इस प्रकार भारत की संसद देशों के बीच एक सेतु के रूप में और विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की सशक्त आवाज के रूप में अपनी भूमिका को और मजबूत करेगी।

उल्लेखनीय है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत का पक्ष दुनिया के सामने रखने के लिए विभिन्न देशों में बहुदलीय शिष्टमंडल भेजे थे। विभिन्न दलों और विचारधाराओं के नेताओं को एक साथ लाकर यह संदेश दिया गया कि देश की सुरक्षा और हितों के मामले में भारत एकजुट है। इस पहल से संवाद, समावेश और सामूहिक जिम्मेदारी में विश्वास को दर्शाया गया, जो भारत के लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।

इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि राष्ट्र हित के मुद्दों पर भारत एक है। लोकसभा की ओर से 60 से अधिक देशों के साथ मैत्री समूह गठित करने का निर्णय इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि पहले चरण में जहां 60 से अधिक देशों के साथ मैत्री समूहों का गठन किया गया है, वहीं निकट भविष्य में कई अन्य देशों के साथ इन समूहों के गठन के प्रयास किए जा रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि यह भारत की वैश्विक पहचान को मजबूत बनाती है। संसदीय मैत्री समूहों का गठन विभिन्न देशों के साथ संबंधों को बढ़ावा देगा और संवाद को बढ़ाने में मदद करेगा।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कितने देशों के साथ मैत्री समूहों का गठन किया है?
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 60 से अधिक देशों के साथ संसदीय मैत्री समूहों का गठन किया है।
इन मैत्री समूहों का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इन मैत्री समूहों का मुख्य उद्देश्य सांसदों को अपने विदेशी समकक्षों से सीधे संवाद का अवसर प्रदान करना है।
कौन-कौन से प्रमुख नेता इसमें शामिल हैं?
इसमें प्रमुख नेता जैसे रवि शंकर प्रसाद, पी. चिदंबरम, और शशि थरूर शामिल हैं।
इन मैत्री समूहों के माध्यम से किन विषयों पर चर्चा होगी?
इन समूहों के माध्यम से व्यापार, तकनीक, सामाजिक नीतियों, संस्कृति और वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा होगी।
इस पहल का महत्व क्या है?
इस पहल का महत्व संवाद को बढ़ावा देना और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना है।
राष्ट्र प्रेस
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