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भारत-पाक कैदी सूची आदान-प्रदान: 188 भारतीय मछुआरों व कैदियों की रिहाई की मांग

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भारत-पाक कैदी सूची आदान-प्रदान: 188 भारतीय मछुआरों व कैदियों की रिहाई की मांग

सारांश

भारत और पाकिस्तान ने 1 जुलाई को कांसुलर एक्सेस समझौते के तहत कैदियों की सूची साझा की। भारत ने सजा पूरी कर चुके 188 मछुआरों व कैदियों की रिहाई और 13 कैदियों को तत्काल कांसुलर एक्सेस देने की माँग की — यह कूटनीतिक तनाव के बीच एक अनिवार्य, लेकिन नाज़ुक प्रक्रिया है।

मुख्य बातें

1 जुलाई 2026 को भारत और पाकिस्तान ने कांसुलर एक्सेस समझौते के तहत कैदियों व मछुआरों की सूचियों का आदान-प्रदान किया।
भारत ने पाकिस्तान को 386 नागरिक कैदियों और 53 मछुआरों की सूची सौंपी; पाकिस्तान ने भारत को 52 नागरिक कैदियों और 198 मछुआरों की सूची दी।
विदेश मंत्रालय ने सजा पूरी कर चुके 188 भारतीय मछुआरों व कैदियों की तत्काल रिहाई की माँग दोहराई।
पाकिस्तान से 13 भारतीय कैदियों को तत्काल कांसुलर एक्सेस देने की माँग की गई, जो अब तक नहीं मिली।
2014 से अब तक पाकिस्तान से 2,661 भारतीय मछुआरे और 78 नागरिक कैदी स्वदेश लौट चुके हैं।

भारत और पाकिस्तान ने 1 जुलाई 2026 को कांसुलर एक्सेस समझौते के अंतर्गत एक-दूसरे की हिरासत में बंद नागरिक कैदियों और मछुआरों की अद्यतन सूचियों का आदान-प्रदान किया। इस अवसर पर विदेश मंत्रालय (MEA) ने पाकिस्तान से उन 188 भारतीय मछुआरों और नागरिक कैदियों की तत्काल रिहाई और वतन वापसी सुनिश्चित करने की माँग दोहराई, जो अपनी सजा पूरी कर चुके हैं।

सूचियों का ब्यौरा

भारत ने पाकिस्तान को अपनी हिरासत में रखे 386 नागरिक कैदियों और 53 मछुआरों की सूची सौंपी — ये सभी पाकिस्तानी हैं या उनके पाकिस्तानी होने की संभावना है। वहीं, पाकिस्तान ने भारत को अपनी हिरासत में मौजूद 52 नागरिक कैदियों और 198 मछुआरों की सूची दी — ये भारतीय हैं या उनके भारतीय होने की संभावना है।

यह आदान-प्रदान नई दिल्ली और इस्लामाबाद में एक साथ राजनयिक माध्यमों से संपन्न हुआ, जो 2008 के कांसुलर एक्सेस समझौते के तहत हर वर्ष 1 जनवरी और 1 जुलाई को अनिवार्य रूप से किया जाता है।

भारत की प्रमुख माँगें

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार पाकिस्तान से लगातार नागरिक कैदियों, मछुआरों, उनकी नौकाओं और लापता भारतीय रक्षा कर्मियों की रिहाई की माँग करती रही है। मंत्रालय के अनुसार, पाकिस्तान से यह भी अपेक्षा की गई है कि वह उन 13 नागरिक कैदियों को तत्काल कांसुलर एक्सेस दे, जिन्हें भारतीय माना जाता है, किंतु अब तक यह सुविधा नहीं दी गई है।

मंत्रालय ने कहा, "जब तक इन कैदियों की रिहाई और भारत वापसी नहीं हो जाती, तब तक उनकी सुरक्षा, देखभाल और भलाई सुनिश्चित की जाए।"

2014 से अब तक की वापसी का लेखा-जोखा

विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत सरकार के निरंतर प्रयासों के फलस्वरूप 2014 से अब तक पाकिस्तान से 2,661 भारतीय मछुआरे और 78 भारतीय नागरिक कैदी स्वदेश लौट चुके हैं। इनमें 2023 से अब तक वापस आए 500 मछुआरे और 20 नागरिक कैदी भी सम्मिलित हैं।

गौरतलब है कि यह आदान-प्रदान ऐसे समय में हुआ है जब भारत-पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक संबंध अत्यंत तनावपूर्ण हैं, और दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय संवाद लगभग ठप है।

आगे की राह

विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया है कि सजा पूरी कर चुके 188 भारतीय कैदियों और मछुआरों की रिहाई प्रक्रिया में तेज़ी लाने के लिए पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव जारी रहेगा। लापता भारतीय रक्षा कर्मियों का मुद्दा भी इस वार्ता के केंद्र में बना हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके पीछे की वास्तविकता चिंताजनक है — 188 भारतीय सजा पूरी करने के बाद भी पाकिस्तान की जेलों में बंद हैं। यह सवाल उठता है कि 2008 के समझौते के डेढ़ दशक बाद भी रिहाई की प्रक्रिया इतनी धीमी क्यों है। 13 कैदियों को कांसुलर एक्सेस न मिलना अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मानदंडों का उल्लंघन है, जिस पर मुख्यधारा की कवरेज अक्सर पर्याप्त ध्यान नहीं देती। लापता रक्षा कर्मियों का मुद्दा और भी संवेदनशील है — इस पर पाकिस्तान की चुप्पी और भारत की माँगों के बीच की खाई को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-पाकिस्तान कांसुलर एक्सेस समझौता क्या है?
यह 2008 में दोनों देशों के बीच हुआ एक द्विपक्षीय समझौता है, जिसके तहत भारत और पाकिस्तान हर वर्ष 1 जनवरी और 1 जुलाई को एक-दूसरे की हिरासत में मौजूद नागरिक कैदियों और मछुआरों की सूची साझा करते हैं। इसका उद्देश्य दोनों देशों के नागरिकों की कूटनीतिक पहुँच और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
1 जुलाई 2026 को कितने कैदियों और मछुआरों की सूची साझा की गई?
भारत ने पाकिस्तान को 386 नागरिक कैदियों और 53 मछुआरों की सूची दी, जबकि पाकिस्तान ने भारत को 52 नागरिक कैदियों और 198 मछुआरों की सूची सौंपी। दोनों सूचियों में संबंधित देश के नागरिक या संभावित नागरिक शामिल हैं।
भारत ने पाकिस्तान से 188 कैदियों की रिहाई की माँग क्यों की?
ये 188 भारतीय मछुआरे और नागरिक कैदी अपनी सजा पूरी कर चुके हैं, फिर भी पाकिस्तान की हिरासत में बंद हैं। विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान से उनकी रिहाई और भारत वापसी की प्रक्रिया में तेज़ी लाने की माँग की है।
13 भारतीय कैदियों को कांसुलर एक्सेस क्यों नहीं मिली?
विदेश मंत्रालय के अनुसार, पाकिस्तान की हिरासत में 13 ऐसे कैदी हैं जिन्हें भारतीय माना जाता है, लेकिन उन्हें अब तक कांसुलर एक्सेस नहीं दी गई है। भारत ने पाकिस्तान से इन्हें तत्काल यह सुविधा देने की माँग की है, जो अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मानदंडों के अनुरूप अनिवार्य है।
2014 से अब तक कितने भारतीय पाकिस्तान से वापस आए हैं?
विदेश मंत्रालय के अनुसार, 2014 से अब तक 2,661 भारतीय मछुआरे और 78 नागरिक कैदी पाकिस्तान से स्वदेश लौट चुके हैं। इनमें 2023 से अब तक वापस आए 500 मछुआरे और 20 नागरिक कैदी भी शामिल हैं।
राष्ट्र प्रेस
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