इंदौर में हाथी के हमले से ऑटो चालक की मौत, कलेक्टर शिवम वर्मा ने वन विभाग को कार्रवाई के आदेश दिए
सारांश
मुख्य बातें
इंदौर के चंदन नगर इलाके में 27 जुलाई 2026 को एक हाथी के हमले में 49 वर्षीय ऑटो-रिक्शा चालक विजय होलकर की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के एक दिन बाद, 28 जुलाई को इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने जनरल फॉरेस्ट डिवीजन के डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर को आधिकारिक आदेश जारी कर उन जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध तत्काल कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए, जिनकी वजह से हाथी शहरी क्षेत्र में पहुँचा।
घटनाक्रम: कैसे हुआ हमला
पुलिस के अनुसार, यह हाथी पड़ोसी जिले उज्जैन के एक साधु द्वारा एक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल कराने के लिए इंदौर लाया गया था। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद जब हाथी को राजनगर इलाके से ले जाया जा रहा था, तब विजय होलकर उसके पास गए और उसे गुड़ खिलाने की कोशिश की। इसी दौरान हाथी अचानक आक्रामक हो गया — उसने अपनी सूंड से होलकर को लपेटा, जमीन पर पटका और कुचल दिया। गंभीर रूप से घायल होलकर को पहले जिला अस्पताल और फिर एक अन्य चिकित्सा केंद्र ले जाया गया, जहाँ उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
सीसीटीवी में कैद हुई घटना, साधु मौके से फरार
यह पूरी घटना चंदन नगर इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई, जिससे इलाके के निवासियों में दहशत फैल गई। रिपोर्टों के अनुसार, हमले के तुरंत बाद साधु और उसके साथी मौके से फरार हो गए। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त राजेश डंडोतिया ने बताया कि पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है और महावत को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि हाथी के हैंडलर के खिलाफ मामला दर्ज किया जा सकता है, और बिना अनुमति के घनी आबादी वाले आवासीय क्षेत्र में हाथी लाना और भी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकता था।
कलेक्टर का आदेश: कानूनी कार्रवाई और बचाव उपाय
कलेक्टर शिवम वर्मा ने अपने आदेश में कहा, "अक्सर देखा गया है कि हाथी लगातार शहरी इलाकों में आ रहे हैं। नतीजतन, चंदन नगर पुलिस स्टेशन इलाके में हाल ही में हुई एक घटना में एक व्यक्ति की जान चली गई। वाइल्डलाइफ (प्रोटेक्शन) एक्ट और अन्य लागू कानूनों के अनुसार जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जानी चाहिए और ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए जरूरी बचाव उपाय सुनिश्चित किए जाने चाहिए।" उन्होंने वन विभाग को की गई कार्रवाई की रिपोर्ट अपने कार्यालय में सौंपने का भी निर्देश दिया।
आम जनता पर असर और व्यापक चिंता
यह घटना इस बात को उजागर करती है कि धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजनों के लिए हाथियों को बिना उचित अनुमति और सुरक्षा प्रबंध के शहरी क्षेत्रों में लाना कितना खतरनाक हो सकता है। वाइल्डलाइफ (प्रोटेक्शन) एक्ट के तहत किसी भी वन्यजीव को सार्वजनिक स्थानों पर लाने के लिए वन विभाग की पूर्व अनुमति अनिवार्य है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में हाथियों के शहरी इलाकों में आने की घटनाएँ पहले भी सामने आती रही हैं।
आगे की जाँच और अपेक्षित कार्रवाई
पुलिस की जाँच जारी है और महावत से पूछताछ के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी। वन विभाग को निर्देश दिया गया है कि वे भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस बचाव उपाय लागू करें और प्रशासन को रिपोर्ट सौंपें।