ईयू-भारत FTA पर आयरलैंड अध्यक्षता में हस्ताक्षर का लक्ष्य: राजदूत केविन केली
सारांश
मुख्य बातें
आयरलैंड के भारत में राजदूत केविन केली ने 1 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में कहा कि यूरोपीय संघ (EU) परिषद की अध्यक्षता के दौरान भारत के साथ EU की रणनीतिक साझेदारी को और प्रगाढ़ करना आयरलैंड की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। 1 जुलाई से आयरलैंड ने EU परिषद की रोटेटिंग प्रेसीडेंसी संभाली है, जो 31 दिसंबर 2026 तक जारी रहेगी।
अध्यक्षता का दायरा और जिम्मेदारियाँ
अगले छह महीनों तक आयरलैंड EU के 27 सदस्य देशों के बीच होने वाली बातचीत का नेतृत्व करेगा। इसमें परिषद की बैठकों की अध्यक्षता, यूरोपीय संघ के कानूनों और नीतियों को आगे बढ़ाना, तथा 45 करोड़ से अधिक यूरोपीय नागरिकों से जुड़े अहम मुद्दों पर सहमति बनाना शामिल है। यह आयरलैंड की आठवीं बार EU परिषद की अध्यक्षता है, जो यूरोप में उसकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।
ईयू-भारत मुक्त व्यापार समझौता: मुख्य लक्ष्य
राजदूत केली ने स्पष्ट किया कि आयरलैंड की अध्यक्षता का सबसे महत्वाकांक्षी लक्ष्य भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप देना है। उन्होंने कहा, 'हमारी सबसे बड़ी उम्मीद है कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर हमारी अध्यक्षता खत्म होने से पहले हस्ताक्षर हो जाएं। यही हमारा लक्ष्य है और हमें उम्मीद है कि ऐसा होगा। इसे पूरा करने के लिए हम हर संभव कोशिश करेंगे।' उन्होंने यह भी बताया कि बातचीत का कठिन चरण पूरा हो चुका है और दोनों पक्षों के कानूनी विशेषज्ञ अब समझौते के मसौदे की विधिक समीक्षा कर रहे हैं।
केली ने कहा कि यदि आयरलैंड की अध्यक्षता के दौरान इस ऐतिहासिक FTA पर हस्ताक्षर होते हैं, तो यह उनके देश के लिए 'बहुत बड़ी उपलब्धि' होगी।
सहयोग के प्रमुख क्षेत्र
राजदूत के अनुसार, आयरलैंड की अध्यक्षता के दौरान भारत के साथ व्यापार, तकनीक, अनुसंधान, कनेक्टिविटी, समुद्री सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला सुदृढ़ीकरण और डिजिटल सहयोग जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के महत्व को भी रेखांकित किया और कहा कि आयरलैंड के अध्यक्षता कार्यक्रम में भारत के साथ EU के संबंधों को स्पष्ट प्राथमिकता दी गई है।
भू-राजनीतिक संदर्भ और बदलता रिश्ता
केली ने कहा कि आयरलैंड ऐसे समय में यह जिम्मेदारी संभाल रहा है जब दुनिया बड़े भू-राजनीतिक उथल-पुथल से गुजर रही है — कई क्षेत्रों में संघर्ष जारी हैं, प्रौद्योगिकी तेज़ी से बदल रही है और वैश्विक सहयोग की व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, 'भारत और यूरोपीय संघ को मिलाकर दुनिया की लगभग दो अरब आबादी होती है। हम दोनों मजबूत लोकतंत्र हैं, बड़ी आर्थिक ताकतें हैं और दुनिया की चुनौतियों का सामना करने में एक-दूसरे के लिए पहले से कहीं ज़्यादा ज़रूरी साझेदार बनते जा रहे हैं।'
गौरतलब है कि राजदूत केली के अनुसार, भारत में पिछले तीन वर्षों के अपने अनुभव में उन्होंने पाया है कि भारतीय नागरिक यूरोपीय घटनाक्रमों पर पहले से कहीं अधिक ध्यान देते हैं — और चर्चा का दायरा अब केवल व्यापार से बढ़कर तकनीक, सुरक्षा, भू-राजनीति और वैश्विक व्यवस्था तक फैल गया है।
आयरलैंड की अध्यक्षता की तीन प्राथमिकताएँ
आयरलैंड की अध्यक्षता तीन स्तंभों पर टिकी है: प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना, लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना और सुरक्षा को सुदृढ़ करना। इसका आधिकारिक नारा है — 'एकता में ताकत'। केली ने दोहराया कि आयरलैंड अपने यूरोपीय साझेदारों के साथ मिलकर एक अधिक प्रतिस्पर्धी, सुरक्षित और लचीला यूरोप बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। आने वाले महीनों में FTA वार्ता की प्रगति और इंडो-पैसिफिक नीति पर EU की स्थिति इस अध्यक्षता की सफलता की असली कसौटी बनेगी।