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जन औषधि योजना से 12 साल में ₹45,000 करोड़ की बचत, देशभर में 20,149 केंद्र सक्रिय

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जन औषधि योजना से 12 साल में ₹45,000 करोड़ की बचत, देशभर में 20,149 केंद्र सक्रिय

सारांश

12 साल में ₹45,000 करोड़ की बचत — यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की दवाओं पर घटे बोझ की कहानी है। 20,149 जन औषधि केंद्रों के ज़रिए सरकार ने जेनेरिक दवाओं को आम आदमी की पहुंच में लाने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने लोकसभा में बताया कि PMBJP से 12 वर्षों में ₹45,000 करोड़ की बचत हुई।
देशभर में 20,149 जन औषधि केंद्र सक्रिय; योजना 784 में से 776 जिलों में लागू।
योजना के तहत 2,110 दवाएं और 315 सर्जिकल व चिकित्सा उपकरण उपलब्ध।
केंद्र संचालकों को 200 दवाओं का स्टॉक रखने पर मासिक प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
PMBI जागरूकता के लिए PIB, MyGov और My Bharat जैसे मंचों के साथ मिलकर अभियान चलाता है।

केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने 25 जुलाई 2025 को लोकसभा में बताया कि प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (PMBJP) के माध्यम से पिछले 12 वर्षों में आम नागरिकों ने ब्रांडेड दवाओं की तुलना में करीब ₹45,000 करोड़ की बचत की है। संसद में दिए गए इस बयान के अनुसार, देशभर में अब तक 20,149 जन औषधि केंद्र खोले जा चुके हैं, जो सस्ती जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराने का सबसे बड़ा सरकारी नेटवर्क बन चुका है।

योजना का विस्तार और उपलब्ध दवाएं

PMBJP के अंतर्गत फिलहाल 2,110 प्रकार की दवाएं और 315 सर्जिकल एवं चिकित्सा उपकरण उपलब्ध हैं। इनमें हृदय रोग, कैंसर, मधुमेह, संक्रमण, एलर्जी और पाचन संबंधी बीमारियों की दवाओं के साथ-साथ पोषक पूरक (न्यूट्रास्यूटिकल्स) भी शामिल हैं।

लैब रिएजेंट और वैक्सीन को छोड़कर, राष्ट्रीय आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल लगभग सभी जेनेरिक दवाएं इस प्रोडक्ट बास्केट में हैं। यह योजना देश के 784 में से 776 जिलों में लागू है, जो इसकी व्यापक भौगोलिक पहुंच को दर्शाता है।

केंद्र संचालकों को प्रोत्साहन व्यवस्था

जन औषधि केंद्रों को सबसे अधिक मांग वाली 100 दवाएं और बाज़ार में तेज़ी से बिकने वाली 100 दवाएं — यानी कुल 200 दवाओं का स्टॉक रखने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने पर केंद्र संचालकों को मासिक प्रोत्साहन राशि दी जाती है।

योजना को लागू करने वाली एजेंसी फार्मास्यूटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेस ब्यूरो ऑफ इंडिया (PMBI) प्रत्येक केंद्र के बिक्री प्रदर्शन का नियमित मूल्यांकन करती है, ताकि गुणवत्ता और उपलब्धता सुनिश्चित रहे।

जागरूकता अभियान और निगरानी तंत्र

PMBI दवाओं की पहुंच और बिक्री बढ़ाने के लिए केंद्रीय संचार ब्यूरो, पत्र सूचना कार्यालय (PIB), MyGov और My Bharat जैसे सरकारी मंचों के साथ मिलकर जागरूकता अभियान चलाता है। दवाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी की जाती है और आवश्यकतानुसार कदम उठाए जाते हैं।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब देश में स्वास्थ्य सेवाओं पर जेब से होने वाला खर्च (out-of-pocket expenditure) एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। ₹45,000 करोड़ की संचित बचत का अर्थ है कि लाखों परिवारों, विशेषकर निम्न और मध्यम आय वर्ग के लोगों का, दवाओं पर होने वाला बोझ उल्लेखनीय रूप से कम हुआ है। गौरतलब है कि यह योजना 2008 में शुरू हुई थी और 2015 के बाद इसे व्यापक रूप से पुनर्गठित और विस्तारित किया गया।

आगे की राह

केंद्र सरकार के अनुसार, जन औषधि केंद्रों के नेटवर्क को और विस्तार देने की योजना है ताकि शेष 8 जिलों को भी इस योजना के दायरे में लाया जा सके। PMBI की नियमित समीक्षा प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि जेनेरिक दवाओं की गुणवत्ता और आपूर्ति श्रृंखला में कोई व्यवधान न आए।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ की बचत का आंकड़ा प्रभावशाली है, लेकिन असली सवाल यह है कि यह बचत किस आधार पर मापी गई — क्या यह ब्रांडेड दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से तुलना है या वास्तविक बाज़ार मूल्य से? गौरतलब है कि 776 जिलों में उपस्थिति के बावजूद ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में इन केंद्रों की पहुंच और जागरूकता अभी भी सीमित बताई जाती है। योजना की सफलता के लिए केंद्रों की संख्या से अधिक जरूरी है — उनकी निरंतर दवा उपलब्धता और गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच। जब तक इन पहलुओं पर पारदर्शी डेटा सार्वजनिक नहीं होता, यह आंकड़ा नीतिगत सफलता का पूरा चित्र नहीं दर्शाता।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (PMBJP) क्या है?
PMBJP केंद्र सरकार की एक योजना है जिसके तहत जन औषधि केंद्रों के ज़रिए सस्ती और गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएं आम नागरिकों को उपलब्ध कराई जाती हैं। इस योजना में 2,110 दवाएं और 315 सर्जिकल उपकरण शामिल हैं, जो ब्रांडेड दवाओं की तुलना में काफी कम कीमत पर मिलती हैं।
जन औषधि योजना से अब तक कितनी बचत हुई है?
सरकार के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में PMBJP के माध्यम से नागरिकों ने ब्रांडेड दवाओं की तुलना में करीब ₹45,000 करोड़ की बचत की है। यह जानकारी केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने लोकसभा में दी।
देश में कितने जन औषधि केंद्र हैं और ये कहाँ उपलब्ध हैं?
देशभर में अब तक 20,149 जन औषधि केंद्र खोले जा चुके हैं। यह योजना देश के 784 में से 776 जिलों में लागू है, यानी लगभग पूरे देश में इसकी पहुंच है।
जन औषधि केंद्रों पर कौन-कौन सी दवाएं मिलती हैं?
इन केंद्रों पर हृदय रोग, कैंसर, मधुमेह, संक्रमण, एलर्जी और पाचन संबंधी बीमारियों की दवाएं, सर्जिकल उपकरण और पोषक पूरक उपलब्ध हैं। राष्ट्रीय आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल लगभग सभी जेनेरिक दवाएं (लैब रिएजेंट और वैक्सीन को छोड़कर) इस योजना में शामिल हैं।
जन औषधि केंद्र संचालकों को क्या लाभ मिलता है?
केंद्र संचालकों को 200 दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखने पर मासिक प्रोत्साहन राशि दी जाती है। PMBI नियमित रूप से बिक्री प्रदर्शन के आधार पर केंद्रों का मूल्यांकन करती है और आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए निरंतर निगरानी रखती है।
राष्ट्र प्रेस
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