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जौहर दिवस 2026: रानी पद्मिनी को देशभर के नेताओं ने किया नमन, 26 अगस्त 1303 की अग्नि-गाथा को याद किया

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जौहर दिवस 2026: रानी पद्मिनी को देशभर के नेताओं ने किया नमन, 26 अगस्त 1303 की अग्नि-गाथा को याद किया

सारांश

26 अगस्त 1303 की वह अग्नि-गाथा आज भी जीवित है। जौहर दिवस पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से लेकर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव तक, देशभर के नेताओं ने रानी पद्मिनी और 16 हज़ार वीरांगनाओं के बलिदान को नमन किया — नारी शक्ति और स्वाभिमान की इस अमर कथा को राष्ट्रीय स्मृति में जीवित रखते हुए।

मुख्य बातें

जौहर दिवस प्रत्येक वर्ष 26 अगस्त को मनाया जाता है, जो 1303 की ऐतिहासिक घटना की स्मृति में है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने एक्स पर श्रद्धांजलि दी।
जोशी के अनुसार, 26 अगस्त 1303 को रानी पद्मिनी ने 16 हज़ार वीरांगनाओं के साथ अग्निकुंड में आहुति दी थी।
राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार और दिल्ली के मंत्रियों ने सोशल मीडिया पर अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
नेताओं ने इस बलिदान को नारी शक्ति, स्वाभिमान और मातृभूमि-रक्षा का अनुपम प्रतीक बताया।

जौहर दिवस पर बुधवार, 26 अगस्त 2026 को देशभर के राजनेताओं ने रानी पद्मिनी और चित्तौड़ की उन हज़ारों वीरांगनाओं को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने 26 अगस्त 1303 को स्वाभिमान की रक्षा के लिए अग्निकुंड में आहुति दी थी। दिल्ली से राजस्थान और मध्य प्रदेश तक, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों ने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हुए इस ऐतिहासिक बलिदान को नारी शक्ति और आत्मसम्मान का अमर प्रतीक बताया।

मुख्य श्रद्धांजलियाँ और नेताओं के वक्तव्य

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स पर लिखा, 'जौहर दिवस पर रानी पद्मिनी और समस्त वीरांगनाओं को श्रद्धापूर्वक नमन। उनका अदम्य साहस, स्वाभिमान और सम्मान की रक्षा के लिए किया गया सर्वोच्च त्याग भारतीय इतिहास और लोकस्मृति में नारी शक्ति के अनुपम प्रतीक के रूप में सदैव प्रेरणा देता रहेगा।'

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक्स पर लिखा, 'शौर्य, त्याग एवं अदम्य साहस की प्रतिमूर्ति रानी पद्मिनी जी और उनके साथ आत्म बलिदान करने वाली समस्त वीरांगनाओं को जौहर दिवस पर कोटि-कोटि नमन करता हूँ। नारी स्वाभिमान एवं आत्मगौरव की रक्षा के लिए आप सभी ने जो त्याग किया, वह सदैव अविस्मरणीय रहेगा।'

बिहार सरकार में मंत्री विजय सिन्हा ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'चरित्रता, त्याग, वीरता और अभूतपूर्व शौर्य के प्रतीक रानी पद्मिनी जी के जौहर दिवस पर सभी वीरांगनाओं को सादर नमन।'

चित्तौड़ की वीरभूमि को विशेष श्रद्धांजलि

मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री राकेश सिंह ने लिखा, 'जौहर दिवस पर महारानी पद्मिनी जी एवं चित्तौड़ की वीरांगनाओं के अदम्य साहस, त्याग और स्वाभिमान को शत-शत नमन। चित्तौड़ की वीरभूमि पर अद्वितीय पराक्रम और आत्मसम्मान की अमर गाथा रचने वाली वीरांगनाओं का गौरवपूर्ण इतिहास सदैव स्मरणीय रहेगा।'

राजस्थान सरकार में मंत्री जोगाराम पटेल ने एक्स पर लिखा, 'पवित्रता, त्याग, शौर्य एवं स्वाभिमान की प्रतिमूर्ति रानी पद्मिनी जी ने हज़ारों वीरांगनाओं के साथ अग्निकुंड में आहुति देकर मातृभूमि की रक्षा और मर्यादा को अमर बना दिया। जौहर दिवस पर उनके अदम्य साहस, त्याग और बलिदान को मेरा सादर वंदन।'

सांसद सी.पी. जोशी का ऐतिहासिक संदर्भ

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता और चित्तौड़गढ़ से सांसद सी.पी. जोशी ने इस अवसर पर ऐतिहासिक तथ्य को रेखांकित करते हुए लिखा, 'चरित्रता, त्याग, वीरता और अभूतपूर्व शौर्य के प्रतीक माँ पद्मिनी जी के जौहर दिवस पर समस्त वीर वीरांगनाओं को कोटिशः नमन। 26 अगस्त 1303 को माँ पद्मिनी जी ने 16 हज़ार वीरांगनाओं के साथ अग्निकुंड में आहुति दी थी।' यह वक्तव्य इस ऐतिहासिक घटना की भयावहता और बलिदान की व्यापकता को रेखांकित करता है।

जौहर दिवस का ऐतिहासिक महत्त्व

गौरतलब है कि 26 अगस्त 1303 को अलाउद्दीन खिलजी के चित्तौड़ पर आक्रमण के समय रानी पद्मिनी के नेतृत्व में हज़ारों राजपूत वीरांगनाओं ने जौहर किया था। यह घटना भारतीय इतिहास में नारी स्वाभिमान और आत्मसम्मान की सबसे प्रतीकात्मक कथाओं में से एक मानी जाती है। प्रत्येक वर्ष इस तिथि पर देशभर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित होते हैं। इस वर्ष भी राजनेताओं की सक्रिय भागीदारी ने इस ऐतिहासिक स्मृति को राष्ट्रीय विमर्श में केंद्रीय स्थान दिलाया।

यह ऐसे समय में आया है जब राजपूत समाज और इतिहास से जुड़ी पहचान का प्रश्न राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है। आने वाले दिनों में चित्तौड़गढ़ में भी स्थानीय स्तर पर स्मरण कार्यक्रम आयोजित होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो राजपूत पहचान और इतिहास को चुनावी दृष्टि से महत्त्वपूर्ण राज्यों — विशेषकर राजस्थान और मध्य प्रदेश — में प्रासंगिक बनाए रखती है। यह ध्यान देने योग्य है कि इस वर्ष भी श्रद्धांजलि देने वाले अधिकांश नेता BJP से जुड़े हैं, जो इस ऐतिहासिक प्रतीक को अपनी सांस्कृतिक राजनीति के केंद्र में रखती है। इतिहासकारों के बीच रानी पद्मिनी की ऐतिहासिकता पर बहस जारी रहती है, लेकिन लोकस्मृति में उनका स्थान अटल है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस राजनीतिक-सांस्कृतिक आयाम को नज़रअंदाज़ करती है, जो इन श्रद्धांजलियों को महज़ भावनात्मक नहीं, बल्कि सुविचारित रणनीतिक संवाद बनाता है।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जौहर दिवस क्या है और यह 26 अगस्त को क्यों मनाया जाता है?
जौहर दिवस प्रत्येक वर्ष 26 अगस्त को मनाया जाता है, जो 26 अगस्त 1303 की उस घटना की स्मृति में है जब रानी पद्मिनी ने चित्तौड़ में हज़ारों वीरांगनाओं के साथ अग्निकुंड में आहुति दी थी। यह दिन नारी स्वाभिमान और बलिदान के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।
रानी पद्मिनी कौन थीं और उनका जौहर क्यों प्रसिद्ध है?
रानी पद्मिनी चित्तौड़ की रानी थीं, जिन्होंने 1303 में अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के समय अपने सम्मान की रक्षा के लिए जौहर किया था। सांसद सी.पी. जोशी के अनुसार, उनके साथ 16 हज़ार वीरांगनाओं ने भी अग्निकुंड में आहुति दी थी, जो इसे भारतीय इतिहास की सबसे बड़ी सामूहिक बलिदान-गाथाओं में से एक बनाता है।
इस वर्ष जौहर दिवस पर किन प्रमुख नेताओं ने श्रद्धांजलि दी?
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, बिहार के मंत्री विजय सिन्हा, मध्य प्रदेश के मंत्री राकेश सिंह, राजस्थान के मंत्री जोगाराम पटेल और चित्तौड़गढ़ से सांसद सी.पी. जोशी ने एक्स और सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
जौहर और जौहर दिवस का राजनीतिक महत्त्व क्या है?
जौहर दिवस राजपूत समुदाय और व्यापक हिंदू सांस्कृतिक पहचान के लिए भावनात्मक रूप से महत्त्वपूर्ण है। राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में इस दिन नेताओं की सक्रियता इसे सांस्कृतिक स्मृति और राजनीतिक संवाद दोनों का हिस्सा बनाती है।
चित्तौड़गढ़ में जौहर दिवस कैसे मनाया जाता है?
चित्तौड़गढ़ में जौहर दिवस पर स्थानीय स्तर पर स्मरण कार्यक्रम और श्रद्धांजलि सभाएँ आयोजित होती हैं। यह स्थान ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि यहीं पर 1303 में यह घटना घटी थी।
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