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झारखंड कैबिनेट: जंगली जानवरों के हमले में मौत पर ₹10 लाख मुआवजा, ₹4 लाख से ढाई गुना वृद्धि

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झारखंड कैबिनेट: जंगली जानवरों के हमले में मौत पर ₹10 लाख मुआवजा, ₹4 लाख से ढाई गुना वृद्धि

सारांश

झारखंड कैबिनेट ने जंगली जानवरों के हमले में मृत्यु पर मुआवजा ढाई गुना बढ़ाकर ₹10 लाख किया — वनक्षेत्रीय समुदायों के लिए बड़ी राहत। साथ ही सरकारी कर्मचारियों को NBFC के जरिये ब्याज-मुक्त वेतन अग्रिम और ₹947 करोड़ की सिंचाई परियोजना को भी मंजूरी मिली।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में 15 जून 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में जंगली जानवरों के हमले में मृत्यु पर मुआवजा ₹4 लाख से बढ़ाकर ₹10 लाख किया गया।
गंभीर चोट पर ₹2 लाख , सामान्य घायल होने पर ₹35,000 और स्थायी दिव्यांगता पर ₹3.50 लाख मुआवजा निर्धारित।
सरकारी कर्मचारियों को NBFC के माध्यम से 30 दिन तक का ब्याज-मुक्त वेतन अग्रिम मिलेगा; सरकारी खजाने पर कोई बोझ नहीं।
पलामू की अमानत बराज योजना को ₹947.26 करोड़ और रांची में नामकुम-डोरंडा मार्ग चौड़ीकरण को ₹162.82 करोड़ की स्वीकृति।
बोकारो और गोड्डा के कोल ब्लॉकों के लिए खनन पट्टे मंजूर; अधिवक्ता रोहिताश्य राय झारखंड के नए महाधिवक्ता नियुक्त।

झारखंड सरकार ने 15 जून 2026 को जंगली जानवरों के हमले में जान गंवाने वाले पीड़ितों के परिजनों के लिए मुआवजा राशि को ₹4 लाख से बढ़ाकर ₹10 लाख करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में रांची में हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया, जो राज्य के वनक्षेत्रीय समुदायों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।

मुआवजे की नई दरें और वितरण प्रक्रिया

संशोधित प्रावधानों के अनुसार, जंगली जानवरों के हमले में मृत्यु होने पर परिजनों को ₹10 लाख का मुआवजा मिलेगा — जो पूर्व की ₹4 लाख की राशि से ढाई गुना अधिक है। गंभीर रूप से घायल होने पर ₹2 लाख, सामान्य चोट की स्थिति में ₹35,000 और स्थायी दिव्यांगता की दशा में ₹3.50 लाख का मुआवजा देय होगा।

सरकार ने मुआवजा वितरण की प्रक्रिया को भी सरल और समयबद्ध बनाया है, जिसके अंतर्गत पीड़ित परिवारों को प्रारंभिक सहायता राशि तत्काल उपलब्ध कराई जाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड के वनाच्छादित जिलों में हाथी, तेंदुआ और अन्य वन्यजीवों के हमलों की घटनाएँ लगातार चिंता का विषय रही हैं।

सरकारी कर्मचारियों को वेतन अग्रिम की सुविधा

कैबिनेट ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों को आपात आर्थिक जरूरतों के लिए वेतन अग्रिम और आसान ऋण सुविधा देने का भी निर्णय लिया। इस व्यवस्था के तहत कर्मचारी महीने के बीच में अपनी तनख्वाह का अग्रिम हिस्सा प्राप्त कर सकेंगे। यह योजना गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों (NBFC) के माध्यम से संचालित होगी।

सरकार के अनुसार, यदि अग्रिम राशि उसी वेतन चक्र में — अर्थात 30 दिनों के भीतर — लौटा दी जाती है, तो कोई ब्याज या अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। लंबी अवधि के लिए आसान किस्तों पर ऋण की सुविधा भी उपलब्ध होगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस व्यवस्था से सरकारी खजाने पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।

बुनियादी ढाँचे और खनन को मंजूरी

कैबिनेट ने पलामू जिले की अमानत बराज योजना के लिए ₹947.26 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति दी, जिसे सिंचाई और कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके अलावा रांची में नामकुम से डोरंडा मार्ग के चार लेन चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण कार्य के लिए ₹162.82 करोड़ की स्वीकृति भी प्रदान की गई।

खनन क्षेत्र में बोकारो जिले के पर्वतपुर और सीतानाला कोल ब्लॉक तथा गोड्डा जिले के जीतपुर कोल ब्लॉक के लिए खनन पट्टों को मंजूरी दी गई। पूर्वी सिंहभूम के कुछ खनिज ब्लॉकों को आरक्षित करने के लिए केंद्र सरकार की स्वीकृति लेने का निर्णय भी लिया गया।

अन्य प्रमुख निर्णय

बैठक में संविदा पर कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों और डाटा एंट्री ऑपरेटरों के वेतनमान में एकरूपता लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई, जिससे लंबे समय से वेतन असमानता झेल रहे कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है। गोड्डा और बोकारो समाहरणालयों में कार्यरत कुछ कर्मियों की सेवा नियमित करने और मोटरयान निरीक्षक पद पर नियुक्ति को भी स्वीकृति दी गई।

इसके अतिरिक्त महिला हेल्पलाइन 181 की सेवाएँ जारी रखने, झारनेट 2.0 परियोजना की अवधि बढ़ाने, बाँध सुरक्षा अधिनियम के तहत विशेषज्ञों का स्वतंत्र पैनल गठित करने और वन विभाग में हाइब्रिड मॉडल अपनाने के प्रस्तावों को भी हरी झंडी मिली। कैबिनेट ने अधिवक्ता रोहिताश्य राय को झारखंड का महाधिवक्ता नियुक्त करने को औपचारिक स्वीकृति प्रदान की।

गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय में हुई जब राज्य में वन्यजीव-मानव संघर्ष की घटनाओं को लेकर पीड़ित परिवार लंबे समय से पर्याप्त मुआवजे की माँग कर रहे थे। नई दरें लागू होने के बाद राज्य सरकार की जवाबदेही और वितरण की गति पर नज़र रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा वितरण की गति और पारदर्शिता होगी — झारखंड में पूर्व में ऐसे मुआवजे महीनों तक अटके रहे हैं। NBFC-आधारित वेतन अग्रिम योजना कर्मचारियों के लिए राहत तो है, पर यह सुनिश्चित करना ज़रूरी होगा कि NBFC की शर्तें वास्तव में अनुकूल हों और कर्मचारी दीर्घकालिक ऋण-जाल में न फँसें। ₹947 करोड़ की अमानत बराज परियोजना पलामू जैसे सूखाग्रस्त क्षेत्र के लिए अहम है, लेकिन राज्य की बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में विलंब का इतिहास रहा है। एक बैठक में इतने विविध फैसलों की बाढ़ कभी-कभी क्रियान्वयन की गहराई पर सवाल खड़े करती है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड में जंगली जानवरों के हमले में मृत्यु पर कितना मुआवजा मिलेगा?
झारखंड कैबिनेट के 15 जून 2026 के फैसले के बाद जंगली जानवरों के हमले में मृत्यु होने पर परिजनों को ₹10 लाख का मुआवजा मिलेगा। पहले यह राशि ₹4 लाख थी, यानी इसमें ढाई गुना वृद्धि की गई है।
घायल होने पर कितना मुआवजा मिलेगा?
गंभीर रूप से घायल होने पर ₹2 लाख, सामान्य चोट की स्थिति में ₹35,000 और स्थायी दिव्यांगता की दशा में ₹3.50 लाख का मुआवजा देय होगा। सरकार ने वितरण प्रक्रिया को समयबद्ध और सरल बनाने की भी व्यवस्था की है।
झारखंड सरकारी कर्मचारियों को वेतन अग्रिम कैसे मिलेगा?
कैबिनेट के फैसले के अनुसार, सरकारी कर्मचारी NBFC के माध्यम से महीने के बीच में अपनी तनख्वाह का अग्रिम हिस्सा ले सकेंगे। यदि राशि 30 दिनों के भीतर लौटा दी जाए तो कोई ब्याज या अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा; लंबी अवधि के लिए आसान किस्तों पर ऋण भी उपलब्ध होगा।
अमानत बराज योजना क्या है और इसे कितनी राशि मिली?
अमानत बराज योजना पलामू जिले की एक सिंचाई परियोजना है, जिसे कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कैबिनेट ने इसके लिए ₹947.26 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति दी है।
झारखंड के नए महाधिवक्ता कौन हैं?
कैबिनेट ने अधिवक्ता रोहिताश्य राय को झारखंड का महाधिवक्ता नियुक्त करने को औपचारिक स्वीकृति प्रदान की। यह नियुक्ति 15 जून 2026 की कैबिनेट बैठक में मंजूर की गई।
राष्ट्र प्रेस
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